25/06/2025
पर्वतों के सानिध्य में अविरल प्रवाहित होती यह सलिला मानो धरित्री की निःशब्दता को स्वर प्रदान कर रही हो। चारों ओर व्याप्त हरियाली, मेघों का घनघोर समागम तथा कोमल कुहासे से आच्छादित ये स्थिर गिरिशिखर—सब मिलकर एक दिव्य दृश्य की रचना कर हैं।
मानों.... यहाँ काल थम-सा जाता है, और इस सौंदर्य की आलोकधारा में चित्त स्वयमेव ही विलीन हो जाता है। यह स्थल केवल यात्रा नहीं, अपितु आत्मा की एक तपस्या है—जहाँ प्रकृति स्वयं काव्य रूप धारण कर लेती है।
- यात्राग्राफी -