Irfan khan

Irfan khan सोशल मीडिया प्रभारी बाड़मेर जिला/AIMIM RAJASTHAN

मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतु विधायक आदरणीय श्री हरीश चौधरी जी को जन...
13/05/2026

मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतु विधायक आदरणीय श्री हरीश चौधरी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Harish Chaudhary

सियानी गांव की यह तस्वीर सिर्फ दो मासूम बच्चों की नहीं, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है जो राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में ...
13/05/2026

सियानी गांव की यह तस्वीर सिर्फ दो मासूम बच्चों की नहीं, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है जो राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पीढ़ियों से जिंदा है।

एक ओर आसमान से आग बरस रही है, तपती सड़कें पैरों को जला रही हैं, और दूसरी ओर ये छोटे-छोटे बच्चे सिर पर पानी के बर्तन उठाकर अपने घर की प्यास बुझाने निकल पड़े हैं।

आजादी को लगभग 80 साल होने जा रहे हैं। हर चुनाव में बड़े-बड़े मंच सजते हैं, भाषण होते हैं, वादे किए जाते हैं कि “अब पानी की समस्या खत्म कर देंगे”। लेकिन सच यह है कि सियानी जैसे गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकारें बदलीं, नेता बदले, नारे बदले, लेकिन गांवों की प्यास नहीं बदली।

जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में उनके सिर पर पानी का बोझ है। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि व्यवस्था से सवाल है आखिर कब तक गांवों की जिंदगी टेंकरों के भरोसे चलेगी?

रेगिस्तान के लोगों ने हमेशा कठिन हालात में भी मुस्कुराना सीखा है, लेकिन पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए हर रोज लड़ना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म की बात है।
जरूरत है कि पानी को सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानी हक समझा जाए। ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्यास नहीं, बेहतर भविष्य विरासत में मिले।

“80 साल आज़ादी के बाद भी, गांव पानी की आस में खड़ा है।”

हैदराबाद से सांसद व ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब असदुद्दीन ओवैसी साहब को जन्मदिन की ...
13/05/2026

हैदराबाद से सांसद व ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब असदुद्दीन ओवैसी साहब को जन्मदिन की दिली मुबारकबाद।

अल्लाह तआला आपको सेहत, लंबी उम्र और कामयाबी अता फरमाए। आपकी रहनुमाई में कौम तरक्की की राह पर यूँ ही आगे बढ़ती रहे, आमीन।

12/05/2026

देश कि अर्थव्यवस्था गिर रही है अदानी अंबानी को बोलो कि निजाम हैदराबाद कि तरह आधी दौलत राष्ट्रहित में दे दे

11/05/2026

राजनीति में मतभेद होना एक सामान्य बात है, लेकिन जब किसी धर्म को राजनीतिक बहस में अपमानजनक तरीके से घसीटा जाता है, तो यह समाज में नफ़रत और दूरी पैदा करता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक इंटरव्यू में बीजेपी नेता पृथ्वी सिंह द्वारा “इस्लाम” को लेकर दिए गए बयान ने कई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
इस्लाम कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि दुनिया के करोड़ों लोगों का मजहब है, जो अमन, इंसाफ, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है। किसी पार्टी से असहमति हो सकती है, उसकी विचारधारा की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी धर्म को “राजनीतिक रोटियां सेंकने” के नाम पर निशाना बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ माना जाएगा।
भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। राजनीति अगर विकास, शिक्षा, रोजगार और जनता के मुद्दों पर हो तो लोकतंत्र मजबूत होता है, लेकिन धर्मों को लेकर कटाक्ष समाज में खाई पैदा करते हैं।
आज �

10/05/2026

संसार की माया में नहीं “माँ” की छाया में सुकून है!
#मातृ_दिवस कि हार्दिक शुभकामनाए

10/05/2026

सदर साहब

09/05/2026

कैप्शन दीजिए ❤️

अद्भुत पराक्रम शौर्य व अदम्य साहस के पर्याय वीर शिरोमणि  #महाराणा_प्रताप जी कि जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन। 🙏
09/05/2026

अद्भुत पराक्रम शौर्य व अदम्य साहस के पर्याय वीर शिरोमणि #महाराणा_प्रताप जी कि जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन। 🙏

09/05/2026

08/05/2026

कन्नौज की बेटी के साथ हुई दरिंदगी सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है।
एक मदरसे की छात्रा का अपहरण, उसे जबरन शराब पिलाना, मांग में सिंदूर भरकर उसकी पहचान और अस्मिता से खिलवाड़ करना, और लगातार तीन दिनों तक उसके साथ रेप यह केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि समाज की संवेदनहीनता का भी प्रमाण है।

सबसे बड़ा सवाल उन लोगों से है जो हर मंच पर PDA यानी “पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक” की राजनीति का दावा करते हैं। आज जब कन्नौज जैसी घटना उनके अपने संसदीय क्षेत्र में हुई, तब उनकी आवाज़ क्यों बंद है? आखिर क्यों पीड़िता के लिए न तो सड़क पर संघर्ष दिख रहा है और न ही कोई बड़ा बयान? क्या इंसाफ की आवाज़ सिर्फ वोट बैंक देखकर उठाई जाएगी?

और दुख की बात यह भी है कि प्रदेश के कई मुस्लिम विधायक और तथाकथित सेकुलर चेहरे भी इस मुद्दे पर खामोश दिखाई दे रहे हैं। यही वह सच्चाई है जिसे समझने की जरूरत है। जब मुसलमानों पर मॉब लिंचिंग होती है, जब हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जाती है, तब ये तथाकथित सेकुलर नेता अक्सर चुप्पी साध लेते हैं। लेकिन चुनाव आते ही भाईचारे और गठबंधन की बड़ी-बड़ी बातें शुरू हो जाती हैं।

समाज को अब यह समझना होगा कि सिर्फ नारों से सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलता। “एक जिस्म दो जान” जैसे भावनात्मक नारों से आगे बढ़कर अपनी राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व क्षमता को मजबूत करना होगा। जिस समाज की अपनी मजबूत आवाज़ विधानसभा और संसद में होती है, उसकी पीड़ा को इतनी आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जरूरत है जहनी गुलामी को तोड़ने की। जरूरत है ऐसे नेतृत्व को मजबूत करने की जो हर अन्याय पर बिना डर और बिना समझौते के आवाज़ उठाए चाहे पीड़ित किसी भी धर्म या जाति का हो। क्योंकि इंसाफ का मतलब सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि इंसानियत की रक्षा भी है।

कन्नौज की बेटी को इंसाफ मिले, दोषियों को सख्त सजा मिले, और समाज यह तय करे कि अब किसी भी बेटी की चीख राजनीति की खामोशी में दबकर नहीं रह जाएगी।

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