04/08/2026
9 अगस्त को सिर्फ भीड़ मत बनो... इतिहास बनो !
आज मैं अपने समाज के हर युवा से एक सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ...
क्या विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ डीजे, डांस, रैली और सोशल मीडिया की रील तक ही सीमित रह गया है?
अगर हाँ... तो हमें खुद से सवाल पूछना होगा।
जिस दिन हमें अपने पूर्वजों के संचर्ष, अपने संविधान से मिले अधिकारों, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा और अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर चर्चा करनी चाहिए, उस दिन अगर हमारी सबसे बड़ी चिंता सिर्फ
"कौन-सा गाना बजेगा?" रह जाए, तो यह सोचने का विषय है।
मैं जश्न के खिलाफ नहीं हूँ।
मैं रैली के खिलाफ नहीं हूँ।
मैं डांस के खिलाफ भी नहीं हूँ।
लेकिन मैं उस सोच के खिलाफ हूँ, जो 9 अगस्त को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित कर देती है।
अगर...
9 अगस्त के अगले दिन भी हमारे गाँव का एक बच्चा स्कूल छोड़ देता है...
हमारी भाषा बोलने में हमें शर्म आती है...
हम अपने महापुरुषों के बारे में नहीं जानते...
समाज की समस्याओं पर हम चुप रहते हैं...
तो हमें सबसे पहले खुद को बदलने की ज़रूरत है।
याद रखिए -
समाज की पहचान डीजे की आवाज़ से नहीं बनती।
समाज की पहचान उसके पढ़े-लिखे, जागरूक, ईमानदार
और जिम्मेदार युवाओं से बनती है।
इस बार 9 अगस्त पर एक वादा कीजिए-
सिर्फ जश्न नहीं मनाएँगे... अपने इतिहास को भी जानेंगे।
सिर्फ नारे नहीं लगाऐंगे... समाज के लिए काम भी करेंगे।
सिर्फ एक दिन नहीं... पूरे साल अपनी पहचान, शिक्षा, संस्कृति और एकता के लिए खड़े रहेंगे।
क्योंकि जव युवा बदलता है, तभी समाज बदलता है।
#आदिवासी