26/05/2026
पंचायत नामा
खंड ओढ़ा का गांव घुकांवाली अपनी धार्मिक और सामाजिक उपलब्धियों के लिए क्षैत्र में अलग पहचान रखता है। गांव में मुख्य रूप से जटसिख और जाट परिवार निवास करते हैं, हालांकि प्रजापत, बनिया, नाई, मेघवाल और मजहबी सिख सहित अन्य बिरादरियों के लोग भी गांव में भाइचारे से रहते हैं।
गांव का नाम कैसे रखा गया
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पुराने समय में यहां पर दो परिवार सिद्धू व बेनीवाल आकर वसे थे। गांव के समाजसेवी हनुमान बेनीवाल ने बताया कि इसके बाद करीब 174 वर्ष पूर्व गांव दडबांकला के जेलदार ढुंकल राम ने गांव नुहियांवाली का करीब 5 हजार एकड़ रकबा खरीद लिया और अपनी छोटी बेटी घुंकली उर्फ़ घुकांदेवी सिद्धू को गांव बीरूवाला से लाकर यहां पर वसा दिया। फिर ब्रिटिश सरकार से सिफारिश करके गांव का नाम घुकांवाली रखवा दिया और बेनीवालों को नंबरदार बना दिया।......
धार्मिक सौहार्द की मिसाल
गांव में सभी धर्मों के प्रति आस्था देखने को मिलती है। यहां पर श्री हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, श्री कृष्ण मंदिर, गोगा मेडी, अनामी धाम सच्चा सौदा, गुरुद्वारा साहिब, बाबा विश्वकर्मा मंदिर, शीतला माता मंदिर, बाबा बसंत दास समाधि और संत सेवा दास डेरा नामक संप्रदाय स्थित हैं।.......................
पंचायत का इतिहास
गांव के पहले सरपंच कृपाल सिंह बने उसके बाद नत्थू राम, रामप्रताप, खेत पाल, जंग सिंह, आद राम, खेत पाल, हरबंस कौर, उतम सिंह, पवन कुमार, सर्वजीत कौर, नायब सिंह और वर्तमान में महिला सरपंच स्वर्णजीत कौर हैं।
सुविधाएं
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गांव में राजकीय उच्च विद्यालय व प्राईमरी स्कूल, पशु हस्पताल, पटवार भवन, जलघर, लाइब्रेरी, डाकघर, सहकारी समिति और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं।
गांव में सेठ चानन मल की पुरानी हवेली व एक दरबाजा भी हैं, जो अब जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। इसके अलावा गांव के बीचोंबीच एक प्राचीन तालाब और पुराना कुआं भी स्थित है। .......................
गांव में समस्याएं भी कम नहीं
गांव में कई गलियों और नालियों में सफाई न होने से गंदा पानी जमा रहता है। गांव में स्वास्थ्य केंद्र व बैंक सुविधा नहीं होने के कारण गांववासियों को ओढ़ा या पन्नीवाला मोटा जाना पडता है। बच्चों के खेलने हेतु स्टेडियम भी नही है।
गांव घुकांवाली
जिला मुख्यालय से दूरी 30 किलोमीटर और खंड कार्यालय 5 किलोमीटर की दूरी पर है
जनसंख्या: लगभग 4900
कुल घर: करीब 800
मतदाता: लगभग 3200
रकबा: 4800 एकड़ लगभग
साक्षरता दर: लगभग 70 प्रतिशत
मुख्य फसलें: गेहूं, नरमा, धान व सरसों
आय के स्रोत: कृषि व पशुपालन आदि