05/09/2026
#तेजा_संवाद 2.0
समाज को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा किसी बड़े आंदोलन की जरूरत नहीं होती…
कभी-कभी कुछ लोग एक मंच पर बैठकर ईमानदारी से अपनी कमियों पर बात कर लें, वही एक नई शुरुआत बन जाती है
#तेजा_संवाद 2.0 — एक चिंतन अपनों का… अपनों के लिए
3 सितंबर, जयपुर का बिरला ऑडिटोरियम
तेजासेना के बैनर तले एक ऐसा मंच, जहां राजनीति, समाज, शिक्षा और लेखन से जुड़े लोग एक साथ बैठे—यह सोचने के लिए कि हम अपने समाज को और बेहतर कैसे बना सकते हैं
सीकर के पूर्व सांसद स्वामी सुमेधानंद जी महाराज की देखरेख और रूपरेखा में आयोजित इस कार्यक्रम में गोविंदसिंहजी डोटासरा, हेमाराम जी चौधरी, उम्मेदाराम जी बेनीवाल, विजय जी पूनिया सहित अनेक समाजबंधुओं ने अपने विचार रखे
पूरे संवाद में कई बातें ऐसी थीं, जिन्हें सिर्फ मंच पर सुनकर भूल जाना नहीं चाहिए, बल्कि अपने घर, अपने व्यवहार और अपने समाज में उतारना चाहिए
✅ आलोचना कम, सकारात्मकता ज्यादा
सोशल मीडिया हमारे हाथ में एक बहुत ताकतवर माध्यम है
किसी की आवाज बनने के लिए…
किसी के दर्द को समाज तक पहुंचाने के लिए…
अच्छी जानकारी साझा करने के लिए…
लेकिन दुर्भाग्य से हम इसका इस्तेमाल कई बार किसी को नीचा दिखाने, गलत टिप्पणी करने और एक-दूसरे को निशाना बनाने में ज्यादा करने लगे हैं
सच तो यह है कि कोई भी पूर्ण नहीं है
दूसरों की कमियां गिनाने बैठेंगे तो हजार मिलेंगी और अपने भीतर झांकेंगे तो शायद उससे भी ज्यादा।
लड़ने के लिए प्रकृति ने जानवर बनाए हैं…
हम इंसान हैं, तो हमारे व्यवहार में भी इंसानियत दिखाई देनी चाहिए
✅ बड़ा बनना है तो साथ लेकर चलना होगा
बड़ा वह नहीं जो अकेला आगे निकल जाए।
बड़ा वह है जिसके साथ चलने वाला भी खुद को छोटा महसूस न करे
जाट समाज ने हमेशा आगे बढ़ने के साथ दूसरे समाजों को साथ लेकर चलने की कोशिश की है यह भावना और मजबूत होनी चाहिए
क्योंकि अगर हमें सच में बड़ा बनना है तो सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए भी रास्ते बनाने होंगे।
मेरा मानना है—हमारे कितने भी दोस्त हों, लेकिन अलग-अलग समाजों से अच्छे दोस्त जरूर होने चाहिए।
रिश्ते जाति से नहीं, दिल से मजबूत होते हैं
✅ शिक्षा—हमारी सबसे बड़ी ताकत
हमारे बुजुर्गों ने शायद कम पहना, कम खाया…
लेकिन बच्चों को खूब पढ़ाया
आज समाज ने जो मुकाम हासिल किया है, उसकी नींव में शिक्षा का सबसे बड़ा योगदान है
लेकिन अभी मंजिल बाकी है...
अपने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन बच्चों का हाथ पकड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है, जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह गए
एक जागरूक व्यक्ति सिर्फ अपने बच्चे का भविष्य नहीं बनाता, वह अपने आसपास के बच्चों के भविष्य में भी रोशनी भरता है
✅ नशे से दूरी, भविष्य से नजदीकी
नशा एक व्यक्ति से शुरू होता है…
फिर परिवार को प्रभावित करता है…
और धीरे-धीरे पूरे समाज को कमजोर कर देता है।
जरूरत है कि हमारे बच्चे नशे के पीछे नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल, हुनर और रोजगार के जुनून के पीछे भागें।
हजारों परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो चुके हैं।
इसलिए जागरूकता सिर्फ मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि घर-घर तक पहुंचे
✅ पाखंड नहीं, विवेक चाहिए
समाज की प्रगति सिर्फ आर्थिक मजबूती से नहीं होती
जब तक हम अंधविश्वास और पाखंड से बाहर निकलकर तर्क, विज्ञान और विवेक को स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी रहेगी
तेजा संवाद 2.0 से मिला यह संदेश आने वाली पीढ़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है
✅ दिखावे पर नहीं, भविष्य पर खर्च करें
खर्च करना गलत नहीं है…
बिना जरूरत सिर्फ दिखावे के लिए खर्च करना गलत है।
आज समाज में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ कई परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है
कई बार एक पिता अपनी बेटी की शिक्षा पर जितना खर्च नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा उसकी शादी के दिखावे पर खर्च कर देता है।
जबकि—
शादी कुछ घंटों की होती है,
शिक्षा पूरी जिंदगी साथ चलती है
हमें अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी
👉 अंत में…
मेरे लिए तेजा संवाद 2.0 सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था
यह अपने समाज को आईना दिखाने की कोशिश थी
अपनी कमियों को स्वीकार करने की हिम्मत…
अपनी अच्छाइयों को मजबूत करने का संकल्प…
और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर रास्ता बनाने का प्रयास
उत्तम समाज की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती, हर पीढ़ी को उसे थोड़ा और बेहतर बनाना होता है।
और शायद यही तेजा संवाद 2.0 का सबसे खूबसूरत संदेश था—
“उत्तम से उत्कृष्ट की ओर…”
यह लेख तेजासेना द्वारा आयोजित तेजा संवाद 2.0 में रखे गए विचारों, वक्ताओं के वक्तव्यों और उनसे मिली सामाजिक सीख का मेरा व्यक्तिगत सार है।
एक शानदार आयोजन के लिए तेजासेना का आभार, श्रीरामजी बिजारणिया और बेहतरीन मंच संचालन एवं कार्यक्रम प्रबंधन के लिए ओंकारजी मुंड का तहेदिल से शुक्रिया।
🖋️ Ajeet Bugalia