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सायरा क्षेत्र के मकवानों का गुड़ा में सामाजिक समरसता का अनूठा संगममातृशक्ति ने किया सामूहिक पूजन और सहभोज।VHN News। सायरा...
14/03/2026

सायरा क्षेत्र के मकवानों का गुड़ा में सामाजिक
समरसता का अनूठा संगम

मातृशक्ति ने किया सामूहिक पूजन और सहभोज।

VHN News। सायरा

उदयपुर । संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत 'कुटुंब प्रबोधन' की भावना को साकार करते हुए जिले के सायरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत ढोल के मकवानों का गुड़ा गांव में 'संगत और पंगत' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम ने गांव में सामाजिक समरसता की एक मिसाल पेश की, जहां सभी समाजों के लोग एक सूत्र में बंधे नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य रात्रि सामूहिक भजनों के साथ हुई, जिसमें गांव की संपूर्ण मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्तिमय माहौल के बीच दशा माता का विधि-विधान से पूजन किया गया।

धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से परिवारों में संस्कार और एकता को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। पूजन के उपरांत आयोजित 'सामूहिक भोजन' (पंगत) कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इसमें जाति-पाति के भेदभाव को भुलाकर संपूर्ण गांव की मातृशक्ति ने एक साथ बैठकर भोजन किया। यह दृश्य सामाजिक एकता और आपसी प्रेम को प्रदर्शित कर रहा था।

इस पूरे आयोजन को सफल और सार्थक बनाने में नवयुवक मंडल, मकवाना गुड़ा और गांव की मातृशक्ति का विशेष योगदान रहा। युवाओं ने सेवा भाव से व्यवस्थाएं संभालीं, जो नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।

मादड़ी देवस्थान में 'जल जीवन मिशन' योजना बनी आफत VHN News। Sayra उदयपुर । जिले के सायरा तहसील क्षेत्र के देवस्थान में 'ज...
14/03/2026

मादड़ी देवस्थान में
'जल जीवन मिशन' योजना बनी आफत

VHN News। Sayra

उदयपुर । जिले के सायरा तहसील क्षेत्र के देवस्थान में 'जल जीवन मिशन' के तहत किए गए कार्यों की लापरवाही से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो गई है। पिछले 7 महीनों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और CHC के मुख्य गेट के सामने पाइप लाइन का गड्ढा खुला होने से बड़ा हादसा होने का खतरा बढ़ गया है। ढलान वाली सड़क पर फैली मिट्टी के कारण वाहन फिसल रहे हैं और मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ गई है। अस्पताल के निकट होने के कारण एंबुलेंस और मरीजों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। जल जीवन मिशन के कार्यों में विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को तुरंत इस गड्ढे को भरवाकर सड़क दुरुस्त करनी चाहिए ताकि किसी भी
जनहानि से बचा जा सके।

Vinodkothari1320

होली दहन LIVE
02/03/2026

होली दहन LIVE

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 #मीडिया_कवरेज दैनिक पुकार & दैनिक भास्कर
02/03/2026

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दैनिक पुकार & दैनिक भास्कर

अंतरराष्ट्रीय श्रवण दिवस पर जो लोग सुन ओर बोल नहीं सकते है उनके लिए निशुल्क थेरेपी एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रह...
02/03/2026

अंतरराष्ट्रीय श्रवण दिवस पर जो लोग सुन ओर बोल नहीं सकते है उनके लिए निशुल्क थेरेपी एवं
परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

डॉ महिपाल सिंह राणावत
बाल विकास पुनर्वास विशेषज्ञ

रजिस्ट्रेशन अनिवार्य 📞98291 31887

@टॉप फ़ैन

तीन दिवसीय निशुल्क चिकित्सा शिविर के पहले दिन 112 हुए लाभान्वित VHN Media @ Sayraसायरा। क्षेत्र के निकटवर्ती राजकीय आयुर...
24/02/2026

तीन दिवसीय निशुल्क चिकित्सा शिविर के
पहले दिन 112 हुए लाभान्वित

VHN Media @ Sayra

सायरा। क्षेत्र के निकटवर्ती राजकीय आयुर्वेद औषधालय एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर नांदेशमा में तीन दिवसीय विशाल निशुल्क चिकित्सा शिविर का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस सोमवार को इस शिविर में विभिन्न रोगों से ग्रसित 112 महिला-पुरुष ने उपचार का लाभ लिया।

पूरी खबर VHN News Rajasthan पर
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Vinodkothari1320

22/02/2026

सायरा के कमोल में प्रात: साढ़े 7 बजे
शोभायात्रा के राग से वैराग्य की और शीतल ।

#ग्राउंड_रिपोर्ट #दीक्षा_महोत्सव....

रिश्ते स्वर्ग से बनते हैं। उन्हें टूटने मत दीजिए, बल्कि उन्हें निभाना सीखिए - राष्ट्रसंत ललित प्रभ म.सा विद्या निकेतन स्...
22/02/2026

रिश्ते स्वर्ग से बनते हैं। उन्हें टूटने मत दीजिए,
बल्कि उन्हें निभाना सीखिए -
राष्ट्रसंत ललित प्रभ म.सा

विद्या निकेतन स्कूल सेक्टर 4 में राष्ट्रसंतों को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें हुई नम

VHN News @ Udaipur

उदयपुर, 22 फरवरी। राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललित प्रभ म.सा ने कहा कि जहां हम आधा-एक घंटा जाते हैं, उसे तो मंदिर मानते हैं, पर जहाँ 23 घंटे रहते हैं उस घर को मंदिर क्यों नहीं बनाते हैं। उन्होंने कहा कि घर का वातावरण ठीक नहीं होगा तो मंदिर में भी मन में शांति नहीं रहेगी पर हमने घर का वातावरण अच्छा बना लिया तो हमारा घर-परिवार ही मंदिर-तीर्थ बन जाएगा।

संतश्री ने कहा कि घर का हर सदस्य संकल्प ले कि वह कभी किसी का दिल नहीं दुखाएगा। हम किसी के आँसू पौंछ सकते हैं तो अच्छी बात है, पर हमारी वजह से किसी की आँखों में आँसू नहीं आने चाहिए। अगर हमारे कारण माता-पिता की आँखों में आँसू आ जाए तो हमारा जन्म लेना ही बेकार हो गया। उन्होंने कहा कि हमसे धर्म-कर्म हो तो अच्छी बात है, पर ऐसा कोई काम न करें कि जिससे घर नरक बन जाए।

उन्होंने कहा कि परिवार को अंग्रेजी में कहते हैं फैमिली का मतलब है फादर एण्ड मदर आई लव यू। जिस घर में माता-पिता से प्रेम और उनका सम्मान होता है, उसी का नाम परिवार है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में सात वार होते हैं, पर दुनिया में एक आठवाँ वार और होता है, जिसका नाम है परिवार। यदि यह आठवाँ वार ठीक है तो सातों वार सुखदायी है। परिवार का गणित हमें समझाता है कि 5, 6, 7, 8, 9 भले ही कितने भी बड़े क्यों न हों, पर यदि वे आपस में झगड़ते रहेंगे तो उनकी कीमत कम ही होनी है और यदि मेल-जोल बनाकर रखेंगे तो 1 और 0 कम औकात के होने के बावजूद अपनी 10 गुना कीमत बना लेंगे।

राष्ट्रसंत रविवार को लोक कल्याणकारी प्रवचन समिति और श्री वासुपूज्य स्वामी मंदिर ट्रस्ट दादावाड़ी द्वारा विद्या निकेतन स्कूल सेक्टर 4 में आयोजित तीन दिवसीय विराट प्रवचन माला के तीसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो अपने घर-परिवार में प्रेम नहीं घोल पाया वह भला समाज में क्या प्रेम रस घोल पाएगा? जो अपने सगे भाई को सहारा बनकर ऊपर उठा न पाया, वह समाज को क्या ऊपर उठा पाएगा? मकान, घर और परिवार की नई व्याख्या देते हुए संतश्री ने कहा कि ईंट, चूने, पत्थर से मकान का निर्माण होता है, घर का नहीं। जहाँ केवल बीबी-बच्चे रहते हैं वह मकान घर है, पर जहाँ माता-पिता और भाई-बहिन भी प्रेम और आदरभाव के साथ रहते हैं वही घर परिवार कहलाता है। चुटकी लेते हुए संतश्री ने कहा कि लोग सातों वारों को धन्य करने के लिए व्रत करते हैं, अच्छा होगा वे आठवां वार परिवार को धन्य करे, सातों वार अपने आप सार्थक हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि किसी क्लब के सदस्य बनकर इंसानियत की सेवा न कर पाओ तो दिक्कत नहीं, पहले घरवालों की सेवा करना शुरू करो, कमजोर भाई के काम आओ, इससे बढ़कर इंसानियत की कोई सेवा नहीं हो सकती। जो बाहर जाकर तो सेवा करता है, पर घरवालों को दुत्कारता है ऐसे लोगों को भगवान कभी माफ नहीं करता।

संतप्रवर ने कहा कि जिस घर में सुबह उठकर भाई-भाई आपस में गले मिलते हैं और माता-पिता के पाँव छूते हैं वह हर सुबह आखातीज का पर्व बन जाती है, जहाँ दोपहर में देराणी-जेठाणी मिलकर खाना बनाते हैं और सास-बहू साथ-साथ खाना खाते हैं उनकी दोपहर होली का पर्व बन जाती है और जो बेटे-बहू सोने से पहले बड़े-बुजुर्गों के पाँव दबाने का सुकुन पाते हैं उनकी रातें भी दुआओं की दीपावली बन जाती है।

उन्होंने कहा कि मंच पर खड़े होकर भाषण और प्रवचन देना सरल है, पर घर में प्रेम से रहना मुश्किल है। व्यक्ति 84 लाख जीवयोनियों से क्षमा बाद में मांगे, पहले घरवालों से क्षमा मांगने का बड़प्पन दिखाए। केवल उम्र से व्यक्ति बड़ा नहीं होता, जो वक्त आने पर झुक जाता है, पर परिवार को कभी टूटने नहीं देता वही घर में सबसे बड़ा कहलाता है। उन्होंने कहा कि अगर आप घर में आपस में नहीं बोलते हैं तो मंदिर के दर्शन, संतों की सेवा और सामायिक का धर्म करने से पहले टूटे रिश्तों को सांधें और गले मिलें अन्यथा सारा धर्म-कर्म निष्फल्ल हो जाएगा।

संतश्री ने कहा कि अपने घर को सजाना सीखिए। कोई रूठ जाए तो उसे मनाना सीखिए। रिश्ते स्वर्ग से बनते हैं। उन्हें टूटने मत दीजिए, बल्कि उन्हें निभाना सीखिए। रिश्ते शीशे की तरह नाजुक होते हैं, एक झटका लगा कि टूटकर बिखर गए। फर्क केवल इतना है कि शीशा गलती से टूटता है और रिश्ता गलतफहमी से। अगर कोई रिश्ता आपको पसंद न भी हो, तब भी उसे तोडने की बेवकूफी मत कीजिए। गंदा पानी पीने के काम न आ पाए तो क्या हुआ, कम-से-कम आग बुझाने का काम तो उससे ले ही सकते हैं। परिवार में किसी से दुश्मनी मोल मत लीजिए। जन्मकुंडली में शनि, दिमाग में मनी और परिवार में दुश्मनी, तीनों ही कष्टदायी होते हैं।
इससे पूर्व डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में स्वस्थ होकर आना हमारी प्रकृति है, बीमार होना हमारी विकृति है, पर खुद को सदा स्वस्थ रखना यही हमारी भारतीय संस्कृति है। अगर हम सदा स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं तो हमें ध्यान और योग का नियमित अभ्यास करना चाहिए। ध्यान और योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत रहता है, जीवन ऊर्जावान होता है और भीतर की संभावनाएं जागृत होती है।

उन्होंने कहा कि संबोधि योग जीवन को सुंदर बनाने के लिए है। संबोधि योग के तीन रत्न हैं - 1. आसन, 2. प्राणायाम और 3. ध्यान। आसन आरोग्य के लिए है, प्राणायाम से प्राण-शक्ति का विकास होता है और संबोधि ध्यान से आत्म-प्रकाश के मालिक बनते हैं, भीतर का अंधकार दूर होता है। उन्होंने कहा कि संबोधि ध्यान का लक्ष्य है - चंचल और उग्र मन को शांत और प्रसन्नतापूर्ण बनाना, आत्म-चेतना की ओर केन्द्रित होना। आत्मा में प्रेम, प्रसन्नता, आनंद, उत्साह, करुणा और सौंदर्य को सजीव करना सबसे सुंदर संबोधि साधना है। उन्होंने कहा कि मैं आत्मा हूँ इस सत्य का अनुभव करना ही आत्म-ज्ञान है। आत्मा के अंतरतम में परमात्मा की निर्मल अनुभूति परम आत्म-ज्ञान है। उन्होंने कहा कि मोक्ष है - शाश्वत शांति, परिपूर्ण आनंद। जैसे बच्चे परीक्षा खत्म होते ही किताबों को भूलकर अपनी सहज मस्ती में आ जाते हैं, ऐसे ही खुद को चाह और चिंता के बोझ से मुक्त करके अपनी सहज आनंदमयी स्थिति को जीना मोक्ष है।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को योग क्रिया
और मंत्र मेडिटेशन का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक ताराचंद जैन, बी एल दलाल, अध्यक्ष राज लोढ़ा, वीरेंद्र सिरोया, कालू लाल जैन, हस्तीमल लोढ़ा, प्रकाश चित्तौड़ा, गोपाल जैन, अशोक गुप्ता पंजाब, प्रकाश दफ्तरी जयपुर, रवि टॉक, मनोहर लाल बाफना द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं को प्रकाश कोठारी परिवार द्वारा साहित्य की प्रभावना दी गई। इस अवसर पर वर्षितप तपस्या करने वाले श्रीमती शिल्पा हस्तीमल लोढ़ा परिवार का श्री संघ द्वारा अभिनंदन एवं मंच संचालन हंसराज चौधरी
ने किया।

कार्यक्रम संयोजक प्रकाश कोठारी ने बताया कि राष्ट्रसंत के सोमवार को चित्रकूट नगर के रसिकलाल धारीवाल स्कूल में कैसे लाएं जीवन में शिक्षा और संस्कार पर विशेष प्रवचन आयोजित होंगे।

सायरा के कमोल में जैन भगवती दीक्षा महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब , शीतल बनी साध्वी आगम प्रज्ञा श्रीजी अति करेंगे तो क्षति न...
22/02/2026

सायरा के कमोल में जैन भगवती दीक्षा
महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब ,
शीतल बनी साध्वी आगम प्रज्ञा श्रीजी

अति करेंगे तो क्षति निश्चित है
कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे :- जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ

ग्राउंड रिपोर्ट
विनोद कोठारी जैन

VHN News @ सायरा - 313704

उदयपुर। जिले के सायरा क्षेत्र के कमोल गांव में 22 फरवरी रविवार को जैन भगवती दीक्षा महोत्सव में जन सैलाब उमड़ पड़ा। यह अवसर था शीतल सोलंकी के दीक्षा महोत्सव का ।

रविवार प्रातः 7:15 बजे मुमुक्षु शीतल की घर से विदाई हुई। इस दौरान जैन संतों द्वारा मंगल पाठ किया गया। मुमुक्षु शीतल ने दीक्षा से पूर्व अंतिम बार संतों को गोचरी वेराई तथा स्वयं भी गृहस्थ जीवन का अंतिम आहार ग्रहण किया।

संयम महोत्सव में प्रात: 8 बजे से शीतल सोलंकी की धूमधाम के साथ शोभायात्रा निकली जो कमोल बस स्टैंड होती हुई आयोजन स्थल पहुंची जहां हज़ारों की संख्या में लोगों की मौजदूगी रही। विविध संत साध्वीयों द्वारा क्रमशः प्रवचन के माध्यम से सत्य अहिंसा और संयम के महत्त्व और सिंद्धांतों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महाश्रमण जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने कहा कि लता भी दो तरह की होती है एक कांटों वालीं तो दूसरी अंगूरवालीं बस फर्क है संगति का। गलत लता हाथ लग जाय तो खुचर चल जाती है उन्होंने कहानी के माध्यम से बताया कि अति करेंगे तो क्षति निश्चित है कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।

वहीं मार्तण्ड उपाध्याय डॉ. प.पू. गौतम मुनि ने कहा कि नाम बिना शरीर की कोई क़ीमत नहीं होती कीमत होती है गुणों से। मुनि श्री ने आगे कहा कि
मुमुक्षु शीतल ने शोश्यल युग के बावजूद संयम का मार्ग चुनकर कांटों से मुक्त होकर वैराग्य मार्ग चुनकर य़ह साबित कर दिया कि संकल्प अगर दृढ़ हो तो जीत भी अवश्य होती है।

गायक द्वारा 'फ़ूलों का तारो' का सबका कहना है एक हज़ारों में मेरी बहना है गीत की प्रस्तुति दी तो लोगों की आंखे भर आई।

मुमुक्षु शीतल सोलंकी ने प्रवचनों के उपरांत अपने परिजनों व समाजजनों को भावुक विदाई देते हुए सांसारिक मोह-माया का त्याग कर श्वेत वस्त्र धारण किए

दक्षिण भूषण, आगम ज्ञाता, जैन मार्तण्ड उपाध्याय डॉ. प.पू. गौतम मुनि (प्रथम) ने दीक्षा प्रदान की और मुमुक्षु शीतल को समारोह में मौजूद एक दर्जन से ज्यादा संत साध्वीयों द्वारा पात्र, रजोहरण, आगम शास्त्र इत्यादि क्रमशः भेट किए गए और जैन मार्तण्ड डॉ. प.पू गौतम मुनि ने आगम प्रज्ञा श्रीजी म.सा नाम प्रदान किया तो 15000 से ज्यादा लोगों के एक स्वर से समारोह स्थल गूंज उठा।
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21/02/2026

सायरा के कमोल में भक्ति संध्या में
मुमुक्षु शीतल सोलंकी की झलक। (21फरवरी)

21/02/2026

ये शाम बड़ी मस्तानी (21 फरवरी )
उदयपुर के टाउन हॉल रोड से सूर्यास्त का नजारा

क्रोध के सौ नुकसान हैं, पर क्षमा के हजार फायदे हैं - राष्ट्र संत ललितप्रभ म.सा VHN News @ Udaipur उदयपुर, 21 फरवरी। राष्...
21/02/2026

क्रोध के सौ नुकसान हैं, पर क्षमा के हजार फायदे हैं - राष्ट्र संत ललितप्रभ म.सा

VHN News @ Udaipur

उदयपुर, 21 फरवरी। राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललित प्रभ म.सा ने कहा कि हमने कमरों में तो ऐसी लगा लिया है पर दिमाग अभी भी हीटर जैसा बना हुआ है। अगर व्यक्ति केवल एक बार गुस्सा करता है तो उसकी 24 घंटे की एनर्जी खत्म हो जाती है। गुस्सा हंसी की हत्या करता है और खुशी को खत्म कर देता है। अगर हम गुस्सा करेंगे तो घर वाले भी हमें पसंद नहीं करेंगे और मुस्कान से जिएंगे तो पड़ोसी भी हमें पसंद करना शुरू कर देंगे।

राष्ट्रसंत शनिवार को लोक कल्याणकारी प्रवचन समिति और श्री वासुपूज्य स्वामी मंदिर ट्रस्ट दादावाड़ी द्वारा विद्या निकेतन स्कूल सेक्टर 4 में आयोजित तीन दिवसीय विराट प्रवचन माला के दूसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खुद को बार-बार समझाएं हे जीव अब तो शांत रह, कब तक गुस्सा करके अपने इस जन्म को और आने वाले जन्म को बिगाड़ता रहेगा। व्यक्ति अपनी सहनशक्ति बढ़ाएं, सहनशीलता बढ़ाएं तभी वह इस दुनिया में सुख और शांति से जी पाएगा। अगर कभी बड़े डांट लगा ले तो बुरा न माने यह सोच कर कि बड़े नहीं डांटेेंगे तो कौन डांटेगा और अगर छोटों से गलती हो जाए तो हमें यह सोचकर गुस्सा नहीं करना चाहिए कि छोटो से गलती नहीं होगी तो किससे होगी। अगर व्यक्ति माफी मांगना और माफ करना सीख जाए तो यह धरती जन्नत बन जाए।

राष्ट्रसंत ने कहा कि गुस्सा इंसान को बर्बादी की तरफ ले जाता है। गुस्से में अगर नौकरी छोड़ोगे तो करियर बर्बाद होगा, मोबाइल तोड़ोगे तो धन बर्बाद होगा, परीक्षा न दोगे तो वर्ष बर्बाद होगा और पत्नी पर चिल्लाओगे तो रिश्ता खराब होगा क्योंकि गुस्सा हमारा मुंह खोल देता है पर आंखें बंद कर देता है। यह पागलपन से शुरू होता है और प्रायश्चित पर पूरा होता है। उन्होंने कहा कि गुस्सा करने से पहले सौ बार सोचें, इससे लाभ नहीं नुकसान ही होना है। जो काम रुमाल से निपट सकता है भला उसके लिए रिवाॅल्वर का उपयोग क्यों किया जाए।

उन्होंने कहा कि गुस्सा आ भी जाए तब भी वाणी पर नियंत्रण रखने की कोशिश कीजिए नहीं तो आप हानि उठाएंगे। मां के पेट से निकला बच्चा और मुंह से निकले बोल वापस कभी अंदर नहीं जाते। उन्होंने कहा कि अगर गुस्सा करना ही है तो किसी को सुधारने के लिए करें, अहंकार जताने या किसी को नीचा दिखाने के लिए गुस्सा ना करें।

गुस्से को जीतने के टिप्स देते हुए संत प्रवर ने कहा कि विरोध के वातावरण में भी मुस्कान को तवज्जो दीजिए, गुस्से को जीतने के लिए क्रोध के वातावरण से दूर रहिए, मौन का अभ्यास बढ़ाइए, सकारात्मक व्यवहार कीजिए, विनोदी स्वभाव के मालिक बनिए, सप्ताह में 1 दिन क्रोध का उपवास अवश्य कीजिए। अगर आप शांति के वातावरण में क्रोध करते हैं तो दुनिया की नजर में आप उग्रवादी कहलाएंगे वहीं यदि क्रोध के वातावरण में भी आप शांत रहेंगे तो किसी देवदूत की तरह पहचाने जाएंगे।

इससे पूर्व डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर महाराज ने कहा कि कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं तो कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं। जो ज्यादा खाते हैं वे कम जीते हैं जो कम खाते हैं वे ज्यादा जीते हैं। स्वाद के लिए खाना पाप है, जीने के लिए खाना बुद्धिमानी है और संयम जीवन जीने के लिए खाना साधना है। अगर हम घर का बना हुआ खाना खाएंगे तो ज्यादा स्वस्थ रहेंगे और बाजार का खाएंगे तो पेट भी बर्बाद होगा और बीमारियाँ भी फ्री में आएंगी। अगर कोई रसोइयों के हाथों का खाना पाँच दिन लगातार खा ले तो वह गारन्टेड बीमार पड़ेगा। हम हितकारी, सीमित और ऋतु अनुसार भोजन लें। मिठाइयाँ और तली हुई चीजों को सप्ताह में अधिकतम एक बार लें। चुटकी लेते हुए संतश्री ने कहा कि हमारा पेट क्रबिस्तान थोड़े ही है जो आए जैसा डालते जाएं। आखिर पचेगा तो उतना ही जितनी हमारी पाचन क्षमता है बाकी तो सब वेस्ट मेटेरियल बनकर सवेरे वाली गाड़ी से निकल जाएगा
फिर ज्यादा खाने से क्या लाभ!

उन्होंने कहा कि स्वस्थ, प्रसन्न एवं मधुर जीवन का पहला पायदान है निरोगी काया। अगर व्यक्ति बीमार होने से पहले ही शरीर के प्रति जागरूक रहे तो वह हमेशा रोगों से बचा हुआ रहेगा। शरीर केवल शरीर नहीं है वरन् परमात्मा का मंदिर है। जिस ईट, चूने, पत्थर के मंदिर को हम बनाते हैं, उसकी तो हम पूरी हिफाजत करते हैं, वहाँ पर कोई गलत चीज नहीं चढ़ाते हैं और जिस शरीर रूपी मंदिर को परमात्मा ने स्वयं बनाया फिर उसमें हम गुटखा, जर्दा, शराब जैसी गलत चीजें क्यों चढ़ा देते हैं। अगर व्यक्ति शरीर का मंदिर की तरह ध्यान रखना शुरू कर दे तो उसे कभी डॉक्टरों की शरण में जाना नहीं पड़ेगा। वरन् वह स्वयं अपना चिकित्सक बन जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ वीरेंद्र सिरोया, कालू लाल जैन, हस्तीमल लोढ़ा, गजेंद्र भंसाली, मनीष गंलोडिया, भरत शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं को मनोहर लाल पुष्पा बाफना परिवार द्वारा साहित्य की प्रभावना दी गई। कार्यक्रम में गुरु भक्ति गीत चंदनबाला महिला मंडल एवं पुष्पा बहु मंडल ने प्रस्तुत किया। मंच संचालन हंसराज चौधरी और आभार अनिल नाहर ने दिया।

कार्यक्रम संयोजक प्रकाश कोठारी ने बताया कि राष्ट्रसंत के कल रविवार को सुबह 9 से 11 बजे तक विद्या निकेतन स्कूल हिरण मगरी सेक्टर 4 में घर को कैसे स्वर्ग विषय पर सत्संग प्रवचन आयोजित होंगे।

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