27/03/2024
मेरी कुछ सुनना, अपनी कुछ सुनना.....
प्रेम जैसे संभव हो है भाव समझ पाना,
सरल और सहज नहीं हो तुम.....
यूं हर दिन थोड़ा और स्नेह जताना,
गुलाब सी खुशबू रहेगी हर रिश्ते में,
और तुम मेरे लाल पलाश बन जाना.....
दूरी में भी हर रोज पास होने का एहसास कराना,
क्युकी बिरहा का अर्थ मुश्किल है समझ पाना....
किसी वस्तु या रंगों के श्रृंगार की अभिलाषा नहीं,
तुम मुझे केवल प्रेम और सम्मान से सजाना.....
हां गुलाब सी खुशबू रहेगी रिश्ते में,
और तुम मेरे लाल पलाश बन जाना.....
✍️बिट्टू दिव्य