Deep Rajwar Photography

Deep Rajwar Photography Wildlife Photographer & Conservationist based in Jim Corbett, Uttarakhand.
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Born with a passion for wildlife and dedicated to documenting nature and conservation stories.

16/07/2026

एक अपील 🌱

वृक्षारोपण तभी सार्थक है जब उसके साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाई जाए। केवल फोटो, सेल्फी या दिखावे के लिए पौधे लगाना प्रकृति के साथ न्याय नहीं है। एक छोटा-सा पौधा तभी पेड़ बनता है जब उसे समय, पानी और संरक्षण मिलता है।

अगर हर लगाया गया पौधा जीवित रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को छाँव, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण मिलेगा।

याद रखें—पौधा लगाना शुरुआत है, उसे पेड़ बनाना हमारी असली जिम्मेदारी है। 🌿

#हरेला

14/07/2026

कभी कभी ऐसे भी दीदार हो जाते है गजराज के …
वैसे भी सीताबनी एक प्रमुख हाथी गलियारा है तो ऐसे नज़ारे दिख ही जाते हैं…

13/07/2026

कोसी नदी से एक अपील…

बरसात का मौसम सिर्फ़ बारिश का नहीं, बल्कि कोसी नदी में नए जीवन के जन्म का समय भी है। यही वह अवधि होती है जब अधिकांश मछलियाँ प्रजनन करती हैं और आने वाली पीढ़ी को जन्म देती हैं। ऐसे समय में एक मछली को मारना केवल एक जीव को खत्म करना नहीं, बल्कि भविष्य की अनगिनत मछलियों को जन्म लेने से रोक देना है।

इसी कारण प्रजनन काल में कई स्थानों पर मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसका उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि नदी के प्राकृतिक जीवन चक्र को सुरक्षित रखना है। ऐसे में केवल शौक या मनोरंजन के लिए मछलियाँ पकड़ना न तो प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता है और न ही कानून की भावना के अनुरूप।

कोसी नदी सिर्फ़ मछलियों की नहीं है बल्कि यह किंगफिशर, ऊदबिलाव,जलपक्षियों और अनेक जलीय जीवों का भी घर है। मछलियाँ इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं यदि इनकी संख्या घटेगी, तो उसका असर पूरी नदी की जैव विविधता पर पड़ेगा..

वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि बरसात के इस संवेदनशील समय में कोसी नदी पर नियमित गश्त बढ़ाई जाए और प्रतिबंध के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए..

प्रकृति से प्रेम केवल तस्वीरों और शब्दों से नहीं, बल्कि उसके सबसे नाज़ुक समय में उसकी रक्षा करने से साबित होता है..

River

12/07/2026

मानसून डायरी 📔

11/07/2026

बारिश में नहाया हुआ ब्राउन फिश आउल 🦉

fish

10/07/2026

।कोसी नदी के वेटलैंड से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़
जहाँ मादा नहीं वरन् नर करता है बच्ची को परवरिश।।

हाल ही में कोसी नदी के वेटलैंड में मुझे ग्रेटर पेंटेड स्नाइप के एक नर को उसके नन्हे चूज़ों के साथ कैमरे में रिकॉर्ड करने का अवसर मिला। यह केवल एक दुर्लभ दृश्य नहीं, बल्कि इस बात का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है कि यह प्रजाति इस क्षेत्र में सफलतापूर्वक प्रजनन कर रही है।

ऐसा नहीं है कि ग्रेटर पेंटेड स्नाइप को कॉर्बेट लैंडस्केप में पहली बार देखा गया है। ई बर्ड पर इसकी उपस्थिति दर्ज है, लेकिन वह केवल देखे जाने तक सीमित है। स्थानीय गाइड और प्रकृति प्रेमी भी समय-समय पर इसके दिखाई देने की बात करते रहे हैं लेकिन वह अनुभव केवल आँखों तक ही सीमित रहा.

बड़े ही आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कॉर्बेट लैंडस्केप से इस प्रजाति की कोई सार्वजनिक फोटो या वीडियो, विशेषकर इसके कन्फर्म्ड ब्रीडिंग का दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने नहीं आया। सोशल मीडिया, ई बर्ड और अन्य सार्वजनिक प्लेटफ़ॉर्म पर भी मुझे इसका कोई फोटो या वीडियो उपलब्ध नहीं मिला..

अगर कॉर्बेट लैंडस्केप से इसका प्रजनन पहले ही फोटो या वीडियो के रूप में दस्तावेज़ीकृत होता और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता, तो वह अब तक सामने आ चुका होता। मेरी जानकारी के अनुसार ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। विज्ञान में सबसे अधिक महत्व साक्ष्यों का होता है, दावों का नहीं…

अब पहली बार इस पक्षी के प्रजनन व्यवहार का फोटो और वीडियो के रूप में दस्तावेज़ी प्रमाण सामने आया है, जिसमें नर अपने नन्हे चूज़ों की देखभाल करता हुआ दिखाई दे रहा है। वन्यजीव विज्ञान में केवल देखे जाने की बात पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि किसी भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की पुष्टि ठोस फोटो और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर होती है। ऐसे दस्तावेज़ भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययन, जैव विविधता के अभिलेख और संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनते हैं।

इस दस्तावेज़ीकरण को राष्ट्रीय समाचार एजेंसी पी टी आई / टाइम्स ऑफ़ इंडिया/ आजतक सहित कई मीडिया संस्थानों ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि यह खबर मीडिया तक पहुँची, बल्कि यह है कि इसके माध्यम से लोगों का ध्यान कोसी नदी के वेटलैंड और वहाँ की समृद्ध जैव विविधता की ओर जाएगा..

यह दस्तावेज़ केवल एक दुर्लभ पक्षी की कहानी नहीं, बल्कि कोसी नदी के स्वस्थ वेटलैंड का भी प्रमाण है। उम्मीद है कि यह रिकॉर्ड इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास और इसके संरक्षण की आवश्यकता की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा।

behavior

09/07/2026

बरसात के रंग, हाथियों के संग। 🐘🌿

07/07/2026

शाम, कोसी नदी और मदमस्त नर हाथी…
प्रकृति का सबसे खूबसूरत संगम ❤️

07/07/2026

आज लगता है कि बरसात सचमुच आ गई है।

उमस भरी गर्मी के बाद बरसती हुई बारिश की हर बूँद, सांबर हिरणों के लिए भी सुकून लेकर आई है

मानों जंगल ने जैसे राहत की एक लंबी साँस ली हो

!!कॉर्बेट के दो जुड़वा 🐘 🐘 और जंगल के संघर्ष की एक जीवंत कहानी !!पिछले तीन दिनों से मैं इस हाथी के झुंड का लगातार अवलोकन...
05/07/2026

!!कॉर्बेट के दो जुड़वा 🐘 🐘 और जंगल के संघर्ष की एक जीवंत कहानी !!

पिछले तीन दिनों से मैं इस हाथी के झुंड का लगातार अवलोकन कर रहा हूँ। एक बात जो बार-बार देखने को मिली, वह यह कि झुंड अपना ज़्यादातर समय खुले इलाके और पानी के आसपास ही बिता रहा था। गाँव वाले बता रहे थे कि रात में हाथियों की लगातार चिंघाड़ सुनाई दे रही थी और उसी दौरान आसपास चीतलों की अलार्म कॉल भी हो रही थी.
अगली सुबह मुझे झुंड के पदचिह्नों के साथ उसी रास्ते पर बाघ के ताज़ा पंजों के निशान मिले, इससे साफ़ था कि बाघ पूरी रात इसी झुंड के आसपास सक्रिय था..

हालाँकि झुंड में और बच्चे हैं, लेकिन लगभग एक महीने की उम्र होने के कारण सबसे बड़ी चिंता इन्हीं दोनों नन्हों की है। जंगल के नियम सबसे पहले कमज़ोर और अनुभवहीन जीवन की परीक्षा लेते हैं। ऐसे नवजात बच्चे बाघ जैसे शीर्ष शिकारी के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य बन सकते हैं। लेकिन हाथियों की सबसे बड़ी ताकत उनका परिवार है। जिस तरह पूरा झुंड हर पल इन दोनों को अपने घेरे में लेकर चल रहा था, उसे देखकर यही महसूस हुआ कि जंगल में एक बच्चे की परवरिश सिर्फ़ उसकी माँ नहीं, पूरा परिवार मिलकर करता है..

कुछ महीने पहले मैं इसी कोसी नदी क्षेत्र में एक नवजात हाथी के बच्चे का दस्तावेज़ीकरण कर चुका हूँ, जिसे रात के अँधेरे में बाघ ने मार दिया था। शायद इसलिए इस बार इन दोनों नन्हे बच्चों को सुरक्षित देखकर मन में एक अलग ही सुकून था। अब बस यही उम्मीद है कि झुंड की एकजुटता इन्हें जंगल की हर चुनौती से पार ले जाएगी।

यही जंगल का वास्तविक जीवन है, जहाँ हर दिन अस्तित्व की परीक्षा होती है। “Survival of the Fittest” केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि प्रकृति का अटल नियम है। इन नन्हे बच्चों की ज़िंदगी अभी शुरू ही हुई है और आगे अनगिनत चुनौतियाँ उनका इंतज़ार कर रही हैं। उम्मीद है कि पूरे झुंड की एकजुटता, अनुभव और सुरक्षा इन्हें हर खतरे से बचाए रखेगी। यदि ये सचमुच जुड़वाँ हैं, तो इनका स्वस्थ होकर बड़ा होना अपने आप में प्रकृति की एक दुर्लभ और प्रेरणादायक कहानी होगी…

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