21/04/2026
जंगल के रक्षक ही असुरक्षित….
घने जंगलों में जब आग भड़कती है, तो उसे बुझाने के लिए सबसे पहले कोई मशीन नहीं, कोई बड़ी टीम नहीं… बल्कि एक आम इंसान दौड़ता है—फायर वॉचर।
वही फायर वॉचर, जो ख़ासकर फायर सीजन (अग्नि ऋतु) के दौरान वन विभाग द्वारा रखे जाते हैं ताकि वनग्नि से जंगल और वन्यजीवों को बचाया जा सके..
हिंदुस्तान अख़बार में लगी ये ख़बर अत्यंत ही दुखद और सोचनीय है जो सिस्टम द्वारा किए हुए दावों की पोल खोलती दिख रही है और एक कड़वी हकीकत बयान कर रही है..
लेकिन आज सच इतना कड़वा है कि सुनकर भी यकीन करना मुश्किल है.
फायर सीजन शुरू हुए हफ्तों बीत चुके हैं, और रामनगर वन प्रभाग में ज़मीन पर तैनात सैकड़ों फायर वॉचर्स आज भी बिना जूते, बिना दस्ताने, बिना टॉर्च और बिना पर्याप्त राशन के काम कर रहे हैं…
सोचिए… जहां एक चिंगारी पल में विकराल आग बन सकती है, वहां ये लोग चप्पलों में, खाली हाथ, अपनी जान दांव पर लगाकर आग से लड़ रहे हैं..
ये सिर्फ लापरवाही नहीं है…
ये उन लोगों के साथ न्याय का खुला मज़ाक है, जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं ताकि जंगल, जानवर और हमारी प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके..
कितनी विडंबना है—
जिस क्षेत्र को महत्वपूर्ण वन क्षेत्र माना जाता है, वहीं के रक्षक सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं..
फाइलों में योजनाएं पूरी हो जाती हैं, बजट पास हो जाता है, लेकिन ज़मीन पर खड़े उस कर्मचारी तक कुछ भी नहीं पहुंचता… जिसे सबसे ज्यादा जरूरत है…
क्या कभी किसी ने सोचा—
जब वो फायर वॉचर आग के बीच खड़ा होता है, तो उसके मन में क्या चलता होगा?
शायद अपने परिवार का ख्याल… शायद ये डर कि कहीं आज वापस लौट पाऊंगा या नहीं…
और फिर भी वो रुकता नहीं… क्योंकि उसके लिए जंगल सिर्फ नौकरी नहीं, जिम्मेदारी है..
मैंने ख़ुद देखा है कि जब आग फेल जाती है तो ये फ़ायर वॉचर्स 2-3 दिनों तक दिन रात वही आग बुझाते रहते हैं और कभी कभी तो इनके पास खाना भी नहीं पहुँच पाता और पानी के लिए जंगल में दर दर भटकना पड़ता है और आग बुझाते बुझाते ख़ुद भी झुलस जाते हैं ..
ऐसी कई घटनाएँ हुई है पूर्व में जहाँ इनकी जान तक चली गई है आग में..
पहले अधिकारी ख़ुद फील्ड में आकर इनका हौसला अफ़ज़ाई करते थे इनके लिए सोचते थे पर अब एसी कमरों में बैठ कर ही सारी योजनाएं बनायी जाती है..
लेकिन क्या सिस्टम के लिए भी वो सिर्फ एक जिम्मेदारी है?
या फिर एक आंकड़ा… जो किसी हादसे के बाद फाइलों में जोड़ दिया जाएगा?
सवाल जो चुभते हैं
क्या इन फायर वॉचर्स की जान की कोई कीमत नहीं?
क्या उनकी सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी?
क्या हम एक बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
ये याद रखना ज़रूरी है
जंगल अपने आप सुरक्षित नहीं रहते…
उन्हें सुरक्षित रखते हैं ये गुमनाम चेहरे।
और अगर ये चेहरे ही सुरक्षित नहीं होंगे,
तो जंगल भी ज्यादा दिन सुरक्षित नहीं रहेंगे…