05/10/2026
_*।। श्राद्ध के शुभ 16 तिथियाँ पे श्राद्ध और पंचबलि विधान करने का लाभ 👇।।*_
श्राद्ध श्राद्धपक्ष ( पितृपक्ष ) की तिथियों में होता है। हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गये हैं, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है और अपने पितरों के निमित्त पूरे श्राद्धपक्ष में प्रतिदिन पंचबलि विधान और गीता पाठ ( अध्याय -07 ) करना अत्यंत लाभकारी और पूर्वजों के आत्मा के मुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ कहा गया हैं।
जो *पूर्णमासी के दिन* श्राद्ध और पंचबलि विधान करता है उसकी बुद्धि, पुष्टि, स्मरणशक्ति, धारणाशक्ति, पुत्र-पौत्रादि एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती। वह पर्व का पूर्ण फल भोगता है।
इसी प्रकार *प्रतिपदा* धन-सम्पत्ति के लिए होती है एवं श्राद्ध और पंचबलि विधान करने वाले की प्राप्त वस्तु नष्ट नहीं होती।
*द्वितिया* को श्राद्ध और पंचबलि विधान करने वाला व्यक्ति राजा होता है। उत्तम अर्थ की प्राप्ति के
अभिलाषी को *तृतिया* विहित है। यही तृतिया शत्रुओं का नाश करने वाली और पाप नाशिनी है।
जो *चतुर्थी* को श्राद्ध और पंचबलि विधान करता है वह शत्रुओं का छिद्र देखता है अर्थात उसे शत्रुओं की समस्त कूटचालों का ज्ञान हो जाता है।
*पंचमी* तिथि को श्राद्ध और पंचबलि विधान करने वाला उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति करता है।
जो *षष्ठी* तिथि को श्राद्धकर्म संपन्न करता है उसकी पूजा देवता लोग करते हैं।
जो *सप्तमी* को श्राद्धादि करता है उसको महान यज्ञों के पुण्यफल प्राप्त होते हैं और वह गणों का स्वामी होता है।
जो *अष्टमी* को श्राद्ध / पंचबलि विधान करता है वह सम्पूर्ण समृद्धियाँ प्राप्त करता है।
*नवमी* तिथि को श्राद्ध / पंचबलि विधान करने वाला प्रचुर ऐश्वर्य एवं मन के अनुसार अनुकूल चलने वाली स्त्री को प्राप्त करता है।
*दशमी* तिथि को श्राद्ध/ पंचबलि विधान करने वाला मनुष्य ब्रह्मत्व की लक्ष्मी प्राप्त करता है।
*एकादशी* का श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ दान है अपने पितरों के निमित्त। वह समस्त वेदों का ज्ञान प्राप्त कराता है। उसके सम्पूर्ण पापकर्मों का विनाश हो जाता है तथा उसे निरन्तर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
*द्वादशी* तिथि के श्राद्ध/ पंचबलि विधान से राष्ट्र का कल्याण तथा प्रचुर अन्न की प्राप्ति कही गयी है।
*त्रयोदशी* के श्राद्ध/ पंचबलि विधान से संतति, बुद्धि, धारणाशक्ति, स्वतन्त्रता, उत्तम पुष्टि, दीर्घायु तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
*चतुर्दशी* का श्राद्ध/ प