18/01/2026
आप सभी ने उत्तराखंड के पौड़ी जिले में मकर संक्रांति के दिन डाडा मंडी, थल नदी, किमसार, त्याडौं गाढ़, आदि अनेक स्थानों पर आयोजित होने वाले गेंद मेले के बारे में अवश्य सुना होगा।
परंतु मकर संक्रांति से एक दिन पहले आयोजित होने वाले पारंपरिक गेंद मेले के बारे में नहीं सुना होगा।
पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम सभा तल्ला बनास में मकर संक्रांति से एक दिन पहले पारंपरिक गेंद का खेल खेला जाता है।
इस खेल को आप रग्बी खेल का वास्तविक पौराणिक रूप समझ सकते हैं।
यह खेल जंगल में पाई जाने वाली एक गोलाकार कंद गिंदौड़ा से खेला जाता है।
इस खेल में दो पक्ष होते हैं
१ - लिडखुल्या ( विवाहित जिन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हो गई हो)
२ - ढिन्टू ( अविवाहित एवं विवाह के बाद जिनको पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई हो)
( गांव के बुजुर्ग ढिन्टूऔ की तरफ से खेलते हैं)
इस खेल में दो दिशाएं तय होती हैं
एक दिशा में लीडखुल्यौ और दूसरी दिशा में ढिन्टूऔ को गोल (होल) करना होता है।
गोल (होल) होने के पश्चात समस्त ग्रामवासी मंडाण चौक में एकत्रित होकर ढोल दमाऊ की ताल पर उत्साह से नृत्य करते हैं।
प्रसाद के रूप में सभी को गुड़ बांटा जाता है।
रात्रि में पारंपरिक स्वाल ( रयांस दाल कि भरी हुई रोटी) बनाए जाते हैं जिन्हें घी के साथ खाया जाता है और आपस में बांटे जाते हैं।
विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी ढिन्ढूओं की जीत हुई।
पौराणिक खेल त्यौहार के इस प्रारूप के कुछ आंशिक दृश्य आप सभी के सामने प्रस्तुत है।
जय भारत जय उत्तराखंड