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13/10/2025

IRCTC घोटाले में कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव,राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के ख़िलाफ़ आरोप तय किए। सीबीआई के चार्जशीट को स्वीकारा। अब मुक़दमा चलेगा ।

Delhi metro look like wow 😲 🙄
05/02/2025

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😃
05/02/2025

😃

10 लोग लड़के को देखने आते है और सीधे उसकी बचत, तनख्वाह, कार्य सुरक्षा के बारे में सबके सामने पूछकर उस लड़के का आंकलन करते ...
12/04/2023

10 लोग लड़के को देखने आते है और सीधे उसकी बचत, तनख्वाह, कार्य सुरक्षा के बारे में सबके सामने पूछकर उस लड़के का आंकलन करते है ।

और जब वही लड़का , पूछे कि लड़की को खाना बनाना, परिवार में सामंजस्य बनाना, या अन्य बातें पूछे तो वह रूढ़िवादिता लगती है ।

वास्तव में रूढ़िवादिता यह नहीं है, रूढ़िवादिता तो यह है कि मूर्खतापूर्ण तरीके से लड़के के स्वाभिमान को ठेस पहुचा कर उसके पगार से उसका आंकलन करते हैं और ठीक उसी प्रकार से खुद की बेटी का आंकलन किया जाता है तो ज्ञान दर्शन देने लगते हैं।

यह वास्तव में एक छद्म नारीवाद है और कुछ नहीं

हमारी बेटी को तो मैग्गी भी बनाना नही आता - तो उसको क्या पूजने के लिए ले जा रहे है जो घर मे मेहमान बनकर सिर्फ रोटियां खाएगी ।
लड़का लायक है तो दहेज क्यो लेना - क्यो, लड़की नालायक है क्या जो लड़के से अच्छी नौकरी, तनख्वाह की आशा करते हो?
लड़की का बाप तो बेचारा #दहेज की चिंता से मरा जा रहा है - कभी लड़के के माता पिता की तरफ भी देख लेना चाहिए, बेचारे इस चिंता में नींदें उड़ी रहती है कि जब तक लड़का काम, धंधा, नौकरी नही लगेगा तो कोन शादी करेगा । उनके मन की व्यथा कौन कहे ।

#दहेज #बेरोजगार

लिखूं या नहीं समझ में नही आ रहा। कभी जिम्मेदारियों का अहसास तो कभी पढ़े लिखे नही होने का मलाल। किसको जिम्मेदार ठहराऊं मा...
07/03/2023

लिखूं या नहीं समझ में नही आ रहा। कभी जिम्मेदारियों का अहसास तो कभी पढ़े लिखे नही होने का मलाल। किसको जिम्मेदार ठहराऊं मां–बाप, स्कूल को या खुद को।

कभी कभी लगता है हम धरती पर क्यों हैं? किसके लिए हैं सवाल तो बहुत है जिसका जवाब शायद ही हो। 3 भाइयों में सबसे बड़ा मैं था शुरुआत के दिनों में स्कूल तो गया था लेकिन स्कूल के पढ़ाई की जगह पर काम करवाते थे मास्टर साहब। जो मुझे ठीक नही लगा और मैं स्कूल जाना कम कर दिया। फिर पिताजी बीमार रहने लगे तो घर का भार मेरे ऊपर आ गया। मैं एक रिश्तेदार के साथ कोलकाता जाकर रहने लगा कुछ दिन मैंने वहां काम किया लेकिन वेतन कम होने की वजह से घर चलाना बड़ा ही मुश्किल हो गया। मैं पंजाब जाकर एक फैक्ट्री में काम करने लगा। क्या होली,क्या दिवाली सारे पर्व को सिर्फ महसूस करता था। दस हजार की वेतन में दोनों भाई की पढ़ाई, पिताजी की दवाई, राशन का खर्चा बीबी की फरमाइश अलग उसमें अपने आप के लिए पैसा कहां बचा पता था।

समय बीतता गया पिताजी भी नहीं रहे, एक भाई का जॉब लग गया। दूसरा का ग्रेजुएशन कंप्लीट हो गया। दोनों भाइयों ने शादी कर ली मैंने भी जहां-तहां से पैसे उधार लेकर शादी में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि पत्नी मना करती रही लेकिन बड़ा भाई जो ठहरा फर्ज तो अदा करना ही था। मेरे एक दोस्त के कहने पर मैं साऊथ की तरफ चला गया ओवर टाईम मिला कर 18000 बन जाते थे। नई नवेली दुल्हन ने मां को रखने से साफ इन्कार कर दिया, घर में पत्नी के साथ क्लेश अलग से। बच्चे की पढ़ाई, मां की दवाई, मैं जहां रहता था वहां का खर्चा 18000 भी अब कम पड़ने लगा था। घर, आंगन का बटवारा हो गया था। तीनों की पत्नी का आपस में बोलचाल बंद ।छोटा भाई प्राइवेट जॉब करता था अच्छे पोजिशन पर अच्छा सैलरी उठाता था। दोनों भाई ने अपने अपने जमीन पर अच्छा सा मकान खड़ा कर लिया और मेरा वही खपरैल वाला मकान, प्राइवेट जॉब वाले के पास मोटरसाइकिल तो सरकारी वाले के पास कार। और मैं जब गांव जाता था तब वही पुराना एटलस का साइकिल लेकर घूमता रहता था। आर्थिक तंगी के कारण बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते थे वही दोनों भाइयों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में, दोनों की पत्नी अपने बच्चे को मेरे बच्चों के साथ खेलने नहीं देती थी उसे लगता था कि मेरा बच्चा बिगड़ हो जाएगा।

मेरी पत्नी गांव में खेती करती थी। कभी-कभी या लगता था कि कि मैंने जो भाइयों के लिए किया हो सकता है उसकी पत्नी महसूस ना की हो लेकिन भाई को महसूस होता ही होगा। मैं अपने फैक्ट्री में डे के अलावा नाइट शिफ्ट भी करता था कभी-कभी सोते समय यह सोचता था कि काश इस रात का सुबह ना हो। किस हालत में मैं मजदूरी करता था वह मुझे ही पता था और उन तमाम लोगों को पता था जो दूसरे शहर में जाकर मजदूरी करते था। मैं अकेला थोड़ी था जो इस हालात से गुजर रहा था मेरे जैसे लाखों लोग इस चेन्नई शहर में दिन काट रहे थे। सुपरवाइजर से लेकर मैनेजर तक की गलियां सुनता रहा। यहां तक कि पहनावा देखकर रास्ते में भी लोग बिहारी कहते थे और साथ-साथ गाली भी दे जाते थे। आखिर कसूर क्या था मेरा... चलिए थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि बिहार में फैक्ट्री नहीं है बिहार में रोजगार के साधन नहीं है इसलिए बिहारी बाहर जाकर काम करते हैं। लेकिन कोई बंगाल का आदमी दिल्ली में, कोई दिल्ली का आदमी बेंगलुरु में, कोई हरियाणा का आदमी मुंबई में जाकर भी तो काम करता होगा। तो फिर हमारे साथ भेदभाव क्यों? जितना झेलता था चेन्नई में उतना वह क्यों नहीं झेलते थे जो हमारा हक हिस्सा मारकर बैठे थे।

मुझे आज भी याद है कि चुनाव में वोट देने के लिए कई बार तमिलनाडु से बिहार जनरल डिब्बा में जमीन पर सो कर गया था। क्यों किसके लिए? सत्ता आने के बाद तो लोग अपना पेट भरते हैं हम जैसे लोग बेहतर की आस लगाए रह जाते हैं। कल मेरे रिश्तेदार का फोन आया बोला तमिलनाडु में हिंदी बोलने पर मजदूर की हत्या हो गई है। मैं अंदर ही अंदर रो पड़ा गांव में ठेठ भाषा बोलने वाला बड़ी मुश्किल से हिंदी सीखा। बड़ी मुश्किल से मेहनत मजदूरी करके घर का भरण पोषण कर रहा था। नर्क समान जिंदगी जीने को मजबूर था, मुझे याद है कि पिछले डेढ़ साल से मैंने एक शर्ट तक नहीं खरीदा। इतनी मेहनत के बाद भी अपने ही देश में हिंदी बोलने पर मौत किसे पसंद??

एक पल को लगा कर आत्महत्या कर लें जिसको हम लोग पाल पोस कर बड़ा किया जब वह अपना नहीं हो सका, जिन को वोट देकर मैंने कुर्सी पर बैठाया वह अपना नहीं हो सका तो जिनके लिए मजदूरी कर रहा हूं जिनके कंपनी को बढ़ाने के पैसे के बदले लिए दिन रात मेहनत कर रहा हूं वो अपना क्या होगा?? फिर मेरा ध्यान अपने बीवी बच्चों पर गया तो जीने की आस दिखाई दी। अब मैं घर जा रहा हूं वहां शायद खेती बारी ही करूं। ट्रेन किस जनरल बोगी में मेरे जैसे हजारों लोग जो उदास तो जरूर हैं लेकिन इस जिल्लत भरी जिंदगी से हमेशा के लिए दूर हो जाना चाहते हैं।

✍️ अज्ञात

05/03/2023

Wife :- तुम बहुत बदल गए हो,

आजकल मुझसे ठीक से बात ही नही करते....😒

Husband :- ऐसा नही है , काम के थोड़ा बिज़ी था...😞


Wife:- 2-3 दिन से तुम कामका बहाना बना रहे हो...तुम मुझसे कुछ छिपा थे हो...

Husband :- नही थोड़ी टेन्सन है....

Wife :- तुम हमेशा अपनी टेन्सन मुझसे छिपाते हो...
मुझे बताओ हम दोनों मिल कर कोई solution लिकालेंगे...
तुम मुझे कुछ तो बताओ problem क्या है....

Husband:- तो लो सुनो ..

👉TDS फ़ाइल करना है...
👉Income tax फ़ाइल करना है...
👉Property tax देना है...
👉GST फ़ाइल करना है......
👉Custom Dept में shipment अटक गई है...
👉उधारी आ नही रही है...
👉बाजार में ग्राहकी हे नही.....
👉ऊपर से Sealing का पंगा पड़ा हुआ है ...
👉मार्च closing में account पे ध्यान दु ....
👉Accountant आ नही रहा, रोज़ गोली दे रहा है ..

अब दे मुझे इसका SOLUTION....

समझती ही नही है 🙄🙄🙄
Wife :-
🤔🤔🤔
😷😷😷
तुम ना आज 2 पेग मार ही लो...

😂😂😂

04/03/2023

आगामी 10 वर्षों में अधिकतम घरों की अर्थिक स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारण.. ये होगें ...

1. घर मे प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्ट फोन, एवं प्रति वर्ष नया फोन लेना ।

2. जन्म दिन, मैरिज एनीवर्सरी में दिखावटी खर्चे।

3. जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चों का बेतहाशा बढ़ना ।

4. बच्चों के स्कूल, ट्यूशन आदि शिक्षण खर्चों में वृद्धि । धार्मिक संस्कार में कमी! घर का बना हुआ कम खाना बाहर का ज्यादा खाना ।

5. व्यक्तिगत खर्चे, ब्यूटी पार्लर, सेलून, ब्रांडेड कपड़ा, पार्टी, गेट टूगेदर आदि ।

5. सगाई, शादी आदि में प्रतिष्ठा की भूख के कारण होने वाले खर्चे।

6. लोन पर दिया जाने वाला ब्याज ।

7. मेडिकल खर्चों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी । कारण गलत खान पान ।

इस तरह के बिना जरूरत के खर्चे के अनुरूप कमाई बढ़ नही रही है।
परिणाम, तनाव तनाव तनाव ।

बिना जरूरत के खर्चे कम करे। जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान की थी, है, और रहेंगी। इच्छाएं अनन्त है । इन का कोई अन्त नहीं ।

दूसरो के लिए नही अपनी खुशी के लिए करे
🙏🙏🙏

*नाज़ुक उंगलियाँ और ज़हरीले सपने*एक विडंबना है ये ,एक दुःख ,एक दर्द ,एक पीड़ा । मैं नहीं जानता कि ये हाथ किसके हैं लेकिन बे...
16/01/2023

*नाज़ुक उंगलियाँ और ज़हरीले सपने*

एक विडंबना है ये ,एक दुःख ,एक दर्द ,एक पीड़ा । मैं नहीं जानता कि ये हाथ किसके हैं लेकिन बेशक़ इतना जानता हूँ कि इन हाथों को जिन आँखों ने पाला है वे आँखें ये दृश्य कभी नहीं देखना चाहेगी। इस तस्वीर में दिखने वाली उंगलियाँ किन्हीं बुजुर्गों की प्रतीत नहीं हो रही ये कोमल उंगलियाँ मेरे गाँव मेरे देश के उन ग्रामीण युवाओं की हैं जो एक संकर संस्कृति का शिकार हो रहे हैं। ये उंगलियाँ उन युवाओं की हैं जिन्होंने 16 साल की उम्र में खलनायक तो देख ली किंतु उसका परिणाम न समझ सके,ये उंगलियाँ उन युवाओं की हैं जो अपनी पत्नी या स्वप्न सुंदरी की इच्छा अपने ज़मानत से रिहा होने के बाद पिस्टल से महंगा लहंगा लाकर पूरी करने के सपने देखते हैं, ये उंगलियाँ उन श्रमजीवी युवाओं की नहीं हैं जो खेतों में अथक मेहनत करके हाथों में बिवाई कर ले, ये उंगलियाँ उन मसिजीवी युवाओं की नहीं है जो उंगलियों के बीच कलम फँसा कर सुनहरे सपने देखते हैं, ये उंगलियाँ उन युवाओं की नहीं हैं जिनकी पिछली पाँच पीढ़ी का किसी से बैर नहीं था,लेकिन आज इनके हजार दुश्मन हैं, फेसबुकिया दोस्तों की गैंग है,चीर देंगे, फाड़ देंगे, गाड़ देंगे इनके स्लोगन हैं। इनसे मेरी गुज़ारिश है ज़मीनी हक़ीक़त पर उतर कर देखें, किसे बर्बाद कर रहे हैं ? खुद को। किसे लूट रहे हैं ? खुद को। आए दिन छोटी छोटी बातों पर सिर फुटौव्वल होती है,घर पर सिपाही आकर पाबंद कर जाते हैं ,कभी सड़क के किनारे औंधे मुँह पड़े नज़र आते हैं। ज़रा विचार करो शरीर की ये कोमलता घर वालों ने इसी दिन के लिए दी थी ?

अगली फ़ोटो पोस्ट करो तो उंगलियों में कलम फँसी हो...देखना ढेरों दुआएँ मिलेंगी।
(

मरियम जी , सुपुत्री जनाब नवाज शरीफ , पाकिस्तान ~ पाकिस्तान के 75 वे स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं अगर हिंदुस्तान का बंटव...
14/08/2022

मरियम जी ,
सुपुत्री जनाब नवाज शरीफ , पाकिस्तान
~ पाकिस्तान के 75 वे स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

अगर हिंदुस्तान का बंटवारा नहीं हुआ होता तो आज आप दिल्ली के लूटियन बंगले में होती । केंद्रीय या राज्य मंत्री होती । हम पटना से राजधानी ट्रेन पकड़ आपसे मिलने जाते । गेट पर खड़ा रहते 😐 एक पसेरी कतरनी चूड़ा के साथ 😊 फिर आप हमको अपना कमरा के खिड़की से देखती और दौड़ते हुए गेटकीपर को गेट खोलने को कहती । सर पर दुपट्टा रखते हुए , हम दोनो आपके ओसारा में लगे बेहतरीन कुर्सी पर बैठते । तब तक कोई स्टाफ कतरानी चूड़ा लेकर जाता । आप भी मुस्कुरा देती । फिर आप कहती की : आप हमेशा से मेरे लिए भागलपुर का कतरनी चूड़ा लेकर आते हैं 😊 हम कहते की आप एक बार ट्वीट की थी इस चूड़ा के बारे में , तो हम उसी समय रट लिए थे की कितना पसंद है मेरे भागलपुर का कतरनी चूड़ा, तो कैसे नही ले कर आते ।

फिर आपका बटलर बेहतरीन चाय और बिस्कुट लेकर आता । सफेद प्याली पर सुनहला कोर। अब आप सहज हो जाती । क्रॉस लेग आराम से कुर्सी पर बैठ मेरी रूममेट के बारे में पूछती 😊 ( महिला लोग का बीमारी होता है , अपने क्रश के रूममेट के बारे में पूछेगी ही पूछेगी ) हम कहते की वो अपना लाइफ में बिजी और हम अपना लाइफ में । ( पुरुष लोग अपना क्रश के रूममेट के बारे में पूछ ही नही सकता , इगो ) हम फिर आपको देखते हुवे एक बिस्कुट उठाने का नाटक करते और आप मुस्करा देती ☺️ ।

फिर आप कहती की चलिए न आपको अपना बंगला दिखाते हैं , कैसा इंटीरियर हुआ है । हम झट से चाय की प्याली टेबल पर रख देते । आप आगे आगे और हम बिलकुल पीछे । आपके इत्र की खुस्बू मेरे नजदीक से गुजर रही होती 😊 और बार बार आप अपने दुपट्टे को सर पर संवार रही होती 😊 इसी बीच हम दोनो एक दूसरे को तीखी नजर से कनखिया के भी देखते ...मेरी धड़कन बढ़ जाती 😐 आपका हमको नहीं पता 😐 ............
ऐ..... पार्टनर उठो झंडा फहराने चलना है उठो जल्दी से , नही तो हम अकेले चले जाएंगे 😐

( भाक यार , तबियत से लोग पड़ोसन का स्वतंत्रता दिवस भी मनाने नही देता है 😡 सपना ही सही पर इतना भी खुश नही रहने देते है इ लोग 😜😜 )

एक मोटी राखी हुआ करती थी,बडी सी फोम वाली...उपर शुभ लाभ बैठे होते थे..दो रूपये से लेकर पाँच रूपये तक की मोटी सी बडी़ राखी...
12/08/2022

एक मोटी राखी हुआ करती थी,बडी सी फोम वाली...
उपर शुभ लाभ बैठे होते थे..
दो रूपये से लेकर पाँच रूपये तक की मोटी सी बडी़ राखी गांव की दुकानों में मिला करती थी.. वो दुकानें जो प्रतिबिंब हुआ करती थी सादगी की...
बहनें तब रोड़वेज बस से आया करती थी..
जैसे ही बस,बस अड्डे पर आती..हम भाग लिया करते थे...एक पुराना झोला..जिसमें बताशे,गुड़ या गुजरी हुई करती थी...और खुशकिस्मती से बहन अगर,किसी बड़े से कस्बे में ब्याही है तो फिर फल के नाम पर हुआ करते थे दर्जन भर केले...
ये वो दौर था जब राखी बंधवाने का इतना शौक की जब तक कलाई से कोहनी तक सब कुछ धागों से भर ना जाता तब तक चैन नहीं पड़ता था...मुंह में घुमते उस गुड़ की मिठास आजकल के डिब्बे वाली मिठाई से हजार गुना बेहतर थी..फिर जेब से एक मुड़ा तुड़ा ग्रामीण पृष्ठभुमि को परिलक्षित करता हुआ, ट्रैक्टर छाप पाँच रूपये का कागज का नोट पाके बहन इतनी खुश हो जाया करती थी कि जैसे उन्हे कुबेर का खजाना मिल गया हो...

शाम को घर में खीर पूडी़ का दौर चलता..उस समय काल में पिज्जा और बर्गर वेटिंग रूम में ही विराजित थे..बाजारीकरण की हवा कोसों दूर थी...

राखी का धागा इतना पवित्र माना जाता कि आस पडौ़स की लड़कियों से भी राखी बंधवाने में कोई परहेज नहीं था...
मतलब रक्षा वचन, संस्कृति में इतना घुला मिला था कि बहुत सी बातें अंडरस्टूड हुआ करती थी...

पर अब वक्त बदल गया..
कच्चे मकान गाय के गोबर और सफेदी की पुताई का चोला उतार कर कंक्रीट के जंगलो में तब्दील हो गये और दिखावे का उबटन लगाकर हमने बना ली उन जंगलो के चौतरफा खानापूर्ति की दीवारें जिसमें बस अब औपचारिकता की हवा आती है..
दो रूपये की फोम की राखी की जगह चाईनिज राखियों ने ले ली और गुड़ का अपडेटेड वर्जन भी आ गया....
चीजें बदली तो संस्कार भी बदल गये...
रक्षा सुत्र कोरियर होने लगा और बहनों की जगह बस से 'अमेजॉन' का लिफाफा उतरने लगा..दस के नोट को दस गुना बढा़कर ऑनलाइन पेमेंट किया जाने लगा..और चेहरे पर मुस्कुराहट रिश्तों की गर्माइश से नहीं वरन केशबैक से छाने लगी...
वक्त ऐसा कि वक्त ही ना बचा...और जो वक्त बचा उसमें रिश्तों की मिठास का जायका ही न रहा..

वाकई अब बहनें बस से नहीं आती...
अब भाई दस का नोट नहीं निकालता..
अब पडौ़स से राखी नहीं आती..
अब धागा दिखावटी हो गया..
अब गुड़ मिलावटी हो गया..
अब बस त्योहार सजावटी हो गया....

खैर....रक्षा बंधन की अनंत शुभकामनाएं...
ईश्वर सब मंगल रखे...
🙏🙏🙏

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