वो धूल भरे दिन

वो धूल भरे दिन यादें याद आती है

22/02/2026

कल एक सज्जन मिले। कहने लगे “हम अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय से हटाकर निजी विद्यालय में पढ़ाने लगे। सोचा था वहाँ पढ़ाई अच्छी होगी, बच्चे आगे बढ़ेंगे। लेकिन वहाँ भी कोई खास प्रगति नहीं दिख रही। बच्चे पढ़ाई में आगे जाने के बजाय पीछे जा रहे हैं। आखिर निजी विद्यालय में भेजकर फायदा क्या हुआ?”

मैंने उनसे पूछा- “फिर सरकारी विद्यालय छोड़ने की जरूरत क्या थी?”

सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की है। वेतन देती है, भवन बनवाती है, किताब देती है, मध्याह्न भोजन देती है, पोशाक देती है। शिक्षा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है- यह कोई कृपा नहीं, यह हमारा हक़ है।
लेकिन अगर शिक्षक विद्यालय में पढ़ाने नहीं जाते, पढ़ाई का माहौल नहीं बनता, तो क्या यह केवल सरकार की समस्या है? नहीं। यह हम सबकी समस्या है। यह समाज की चुप्पी की समस्या है।

हम अपने बच्चों को निजी विद्यालय में भेजते हैं। फीस भरने के लिए मजदूरी करते हैं, कर्ज लेते हैं, मवेशी बेचते हैं, रिक्शा-ठेला चलाते हैं, खेत तक बेच देते हैं। लेकिन कभी यह सोचते हैं कि जिस सरकारी विद्यालय के शिक्षक को सरकार हर महीने वेतन दे रही है, अगर वह पढ़ा नहीं रहा, तो उसके खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठाते?

गांव में जन वितरण प्रणाली का डीलर राशन नहीं देता- हम चुप।
मुखिया बिना घूस के आवास नहीं देता- हम चुप।
सीओ, कर्मचारी, आरओ, थानेदार बिना रिश्वत काम नहीं करते- हम चुप।
सांसद, विधायक, मंत्री से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं- हम चुप।

लेकिन कहते हैं- “सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होती।”

सच तो यह है कि हम और आप सरकारी स्कूल में पढ़ाई होने ही नहीं देते।
हमने सवाल पूछना छोड़ दिया है।
हमने जवाब मांगना छोड़ दिया है।
हमने अधिकार को अधिकार समझना छोड़ दिया है।

आज सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा के जिम्मेदार सिर्फ शिक्षक या सरकार नहीं, हम सब भी हैं। क्योंकि अन्याय देखकर भी चुप रहना, अन्याय में भागीदारी ही है।
और विडंबना देखिए- जिनके भीतर अपने गांव के बेइमानों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं, वही लोग महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों पर सवाल उठाते हैं।

महात्मा गांधी जी ने बिना खड्ग, बिना हथियार, केवल सत्य और अहिंसा के बल पर उस अंग्रेजी हुकूमत से लड़ाई लड़ी जो सैकड़ों वर्षों से भारत पर शासन कर रही थी। उन्होंने डरे हुए समाज को आवाज दी, सोए हुए राष्ट्र को जगा दिया।

आज हमारे पास संविधान है, कानून है, अधिकार है, लोकतंत्र है- फिर भी हम अपने गांव के एक भ्रष्ट डीलर या लापरवाह शिक्षक से नहीं लड़ पाते। और हम गांधी पर सवाल उठाते हैं?

पहले अपने आसपास के अन्याय के खिलाफ खड़े होइए। पहले अपने गांव, अपने विद्यालय, अपने समाज को सुधारने की जिम्मेदारी लीजिए। फिर किसी महापुरुष पर उंगली उठाइए।

सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करने से बदलाव नहीं आता। बदलाव साहस मांगता है।
और सच कहूं- जो अन्याय देखकर भी चुप रहे, वह व्यवस्था का शिकार नहीं, उसकी मजबूती का कारण होता है।

अब तय हमें करना है-हम चुप दर्शक बनेंगे या जागरूक नागरिक?

17/07/2025

Block Block Block ek aur BLOCK!

नजरों से जो उतर गए,
क्या फर्क पड़ता है
वो कहां गए।

07/10/2023

मैं मानता हूं कि साँप तो डसेगा ही चाहे उसे साँप कहो या साँप जी।

~ क्रिस्टोफर नोलन

29/05/2023
15/01/2023

Facebook wall se
*अच्छी-खासी कड़वी सच्चाई*

एक रेड लाईट एरिया मे क्या खूब बात लिखी पाई गई
:
"यहाँ सिर्फ जिस्म बिकता है,
ईमान खरीदना हो" तो अगले चौक पर
*पुलिस स्टेशन" हैं
आप चाहते हैं, कि आपकी तानाशाही चले
औरकोई आपका विरोध न करे
तो आप भारत में
*न्यायाधीश* बन जाइये !
आप चाहते हैं,
कि आप एक से बढ़कर एक झूठ बोलें
अदालत में, लेकिन कोई आपको सजा न दे,
तो आप *वकील* बन जाइये !
कोई महिला चाहती हो
कि वो खूब देह व्यापार करे
लेकिन कोई उनको वेश्या न बोले,
तो बॉलीवुड में *हिरोइन* बन जाये !
आप चाहते हैं,
कि आप खूब लूट मार करें,
लेकिन कोई आपको डाकू न बोले,
तो आप भारत में *राजनेता* बन जाइये !
आप चाहते हैं,
कि आप दुनिया के हर सुख मांस,मदिरा,स्त्री
इत्यादि का आनंद लें,
लेकिन कोई आपको भोगी न कहे,
तो किसी भी धर्म के *धर्मगुरु* बन जाओ !
आप चाहते हैं,
कि आप किसी को भी बदनाम कर दें,
लेकिन आप पर कोई मुकदमा न हो,
तो मीडिया में *रिपोर्टर* बन जाइये !
यकीन मानिये कोई आप का बाल भी बाँका
नहीं कर पाएगा. भारत में, हर *"गंदे"* काम के
लिए एक *वैधानिक पद* उपलब्ध है,
इसीलिए *मेरा भारत महान* है..!!

🌹🌹🌹🌹🌹

साभार.... (Repost)
ेटी_मेरी
जय हिंद 🇮🇳

02/11/2021
27/10/2021
20/10/2021

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