29/03/2017
ज्योतिन वारो आयोलाल, आस पुजईंदो झूलेलाल.. दो दिवसीय चेटीचंड महोत्सव का समापन आज , महोत्सव में नाचे सिन्धी समाज के लोग
पदमपुर, सिंधीसमाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव पर दो दिवसीय चेटीचंड महोत्सव का समापन बुधवार शाम होगा
झूलेलाल मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में सिंधी समाज द्वारा गीत गाये जा रहे हैं । शुरुआत मंदिर में वरुण देवता भगवान झूलेलाल की महाआरती और ज्योत प्रज्वलित प्रकाश से हुई।
मोके पर समाज अध्यक्ष लालचंद बादलानी, तुलसी हंजवाणी, दौलत राम ठाकुर, दौलत सोनी, पूर्ण सोनी, मुकुल शर्मा, सतीश पारवानी, जयकिशन पारवानी, लालू मस्ताना, हरीश ठाकुर,चेतन बादलानी, हेमंत ठाकुर , चेतन ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठ लोगों ने पंडित भूषण शर्मा की अगुवाई में आरती उतारकर सबके भले की कामना की। इसके बाद लंगर का आयोजन हुआ जिसमें सर्वसमाज के लोगों प्यार का संदेश देकर एक साथ प्रसाद ग्रहण किया। इससे पूर्व मंगलवार की शाम को चार बजे शोभा यात्रा निकली गई। शोभा यात्रा में समाज के युवाओं ने ‘ज्योतिन वारो आयोलाल, आस पुजईंदो झूलेलाल...’, ‘जेको चवंदो झूलेलाल तहिंजा थींदा बेड़ा पार...’ आदि भजनों पर जमकर नाचे और महिलाओं ने भी डांडिया खेला। इस दौरान वृद्ध बाबा लालू मस्ताना द्वारा सर पर आग जलाकर नृत्य प्रस्तुत कर चकित कर दिया। राहुल रोक्स आकर्षण का केंद्र रहे। शोभा यात्रा में भगवान झूलेलाल की झांकी के आगे शहनाई की धुनों ने वातावरण को सिन्धुमय कर दिया। पूरे शहर की परिक्रमा कर देर रात झूलेलाल मंदिर में विसर्जित हुई। समाज अध्यक्ष लाल चंद बाद्लानी ने बताया कि पर्व के दोरान समाज के लोग अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे।
विशेष :चेटीचंड पर झुलेलाल की आराधना से हर मन्नत होती है पूरी
समाज के वरिष्ठ डॉ दौलत राम ठाकुर ने बताया कि सिंधी समुदाय के आराध्य देव भगवान झूलेलाल जल के देवता हैं। इनका जन्मोत्सव ‘चेटीचंड’ हर्षोल्लास से मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि झूलेलाल की श्रद्धा से आराधना करने पर मन्नत पूरी होती है। एकजुटता के प्रतीक इस पर्व को सिंधी लोग मिलजुल कर चैत्र माह में लाल साईं जा पंजिड़ा मंत्र से आह्वान कर धूमधाम से मनाते हैं। साल में एक बार 40 दिन इनकी अर्चना की जाती है जिसे ‘लाल साईं जो चाली हो’ कहते हैं। झूलेलाल को ज्योतिस्वरूप माना गया है। यही कारण है कि झूलेलाल मंदिर में अखंड ज्योत जला आरती पल्लव पंजड़े गाए जाते हैं। सिंधी परिवार में जब भी कोई उत्सव आयोजित होता है तो सबसे पहले ‘आयोलाल झूलेलाल’ बेड़ा ही पार की गूंज सुनाई देती है।
फोटो 1 पदमपुर. चेटीचंड महोत्सव में शोभा यात्रा के दौरान नाचते श्रद्धालु