18/09/2026
सिंदूर सागर की जलभराव की समस्या अब सिर्फ पानी की नहीं,जिंदगी और इंसाफ की लड़ाई बन चुकी है..!
निवाड़ी जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित ढीमरपुरा-कुंवरपुरा ग्राम पंचायत की तस्वीरें आज शासन-प्रशासन के सामने एक गंभीर सवाल बनकर खड़ी हैं..खेतों में भरा पानी,जलमग्न जमीन और उसी पानी के बीच बैठकर अपने अधिकार एवं समस्या के समाधान की मांग करते ग्रामीण-यह किसी प्रदर्शन की सामान्य तस्वीर नहीं,बल्कि वर्षों से अनदेखी होती आ रही समस्या की पीड़ा को बयां करती तस्वीरें हैं।
सिंदूर सागर तालाब से जुड़ी जलभराव की समस्या के कारण ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष बड़ी मात्रा में खेती की जमीन,रास्ते और घर-मकान प्रभावित होते हैं..किसानों और ग्रामीण परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है तथा बरसात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार आवेदन और ज्ञापन देकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं,लेकिन वर्षों बाद भी कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया।
आज ग्रामीणों ने पानी में बैठकर दिया जवाब देकर किया अनोखा प्रदर्शन..😔✊
जब कागजों पर दिए आवेदन और ज्ञापन समाधान नहीं दिला पाए,तो ग्रामीणों ने ऐसा रास्ता चुना जिसने प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया।
ग्रामीण जल सत्याग्रह पर बैठ गए..✊कई लोग पानी के बीच घंटों डटे रहे और अपनी मांग को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।तस्वीरों में दिखाई दे रहा यह विरोध अपने आप में बहुत कुछ कह रहा है।
कहीं पानी के बीच ग्रामीण खड़े हैं,कहीं हाथों में तख्तियां हैं और कहीं विरोध के रूप में अर्थी तक निकाली गई...यह दृश्य किसी भी संवेदनशील प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
#मुद्दा_आखिर_है_क्या..?
ग्रामीणों की प्रमुख मांग तालाब की तालाब कि पाखी नाली को चौड़ा करने से जुड़ी बताई जा रही है..ग्रामीणों का तर्क है कि पाखी नाली पर्याप्त चौड़ी होने से जलभराव की समस्या कम हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों की आपत्ति यह बताई जाती है कि पाखी नाली अधिक चौड़ी होने से तालाब जल्दी खाली हो जाएगा और गर्मी के मौसम में पानी की समस्या पैदा हो सकती है।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हो सकते हैं...लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों पक्षों के बीच समाधान निकालने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है..?
क्या शासन-प्रशासन का काम केवल आवेदन लेना और आश्वासन देना है..? या फिर दोनों पक्षों को एक मेज पर बैठाकर ऐसा व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान निकालना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है,जिससे बरसात में ग्रामीणों के खेत और घर सुरक्षित रहें तथा गर्मी में तालाब का पानी भी संरक्षित रहे..?
प्रशासन को किसी एक पक्ष का नहीं,समाधान का पक्ष लेना होगा
ग्रामीणों द्वारा प्रभावशाली लोगों की प्रशासनिक स्तर पर पकड़ होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और तथ्यात्मक पुष्टि आवश्यक है,लेकिन इतना निश्चित है कि जब एक समस्या वर्षों तक बनी रहे और लोग पानी में उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हो जाएं,तो प्रशासन को अब गंभीरता से हस्तक्षेप करना चाहिए।
किसी की जमीन डूबे और किसी की फसल बर्बाद हो-यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
और यह भी उचित नहीं होगा कि तालाब का पानी बचाने के नाम पर ग्रामीणों की जिंदगी और खेती लगातार संकट में रहे।
जरूरत है जल विशेषज्ञों,राजस्व अधिकारियों,पंचायत प्रतिनिधियों और दोनों पक्षों के ग्रामीणों की संयुक्त बैठक बुलाकर वास्तविक स्थिति का तकनीकी सर्वे कराने की..पानी की निकासी,तालाब की क्षमता,पाखी नाली की चौड़ाई और बरसात में आने वाले जलप्रवाह का वैज्ञानिक अध्ययन कर ऐसा रास्ता निकाला जाए,जिससे दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।
प्रशासन के लिए यह चेतावनी नहीं,समाधान का अंतिम अवसर समझा जाए..आज ग्रामीण पानी में बैठे हैं..कल यही आक्रोश सड़क पर उतर सकता है।
और यदि तब भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का स्वर और व्यापक होना स्वाभाविक है।
हम किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं...हम चाहते हैं कि बातचीत हो,सर्वे हो,निर्णय हो और समस्या का स्थायी समाधान हो...क्योंकि प्रशासन और जनता आमने-सामने खड़े हों,इससे किसी का भला नहीं होता।
ढीमरपुरा-कुंवरपुरा के ग्रामीणों को आंदोलन नहीं,समाधान चाहिए...तालाब को पानी चाहिए,किसानों को जमीन चाहिए..प्रशासन को दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।
#नोट-तस्वीरों में पानी के बीच बैठे ये ग्रामीण सिर्फ अपना दुख नहीं बता रहे-वे शासन-प्रशासन से पूछ रहे हैं कि आखिर हमारी समस्या का समाधान कब होगा..?
अब समय आ गया है कि निवाड़ी जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच/सर्वे,दोनों पक्षों की बैठक और स्थायी समाधान की कार्यवाही शुरू करे।
एक छोटी-सी समस्या यदि वर्षों तक अनदेखी की जाए,तो वही समस्या एक दिन बड़े जनआंदोलन का कारण बन सकती है।
प्रशासन जागे…ग्रामीणों की पीड़ा समझे…और ढीमरपुरा की इस समस्या का समाधान अब कागजों में नहीं,जमीन पर दिखाई दे...🙏
✍️ Obc Pritam Singh Kushwaha Deendyal Kushwaha Nandram Kushwaha Kushwaha Harcharan Pratap Singh