26/08/2022
बजरंग अखाड़ा ...न्यायिक अवमानना
100 पुराने बजरंग अखाड़ा की भूमि को डेढ़ वर्ष पूर्व अवैध रूप से अन्य व्यक्तियों के नाम पर नामांतरण कर दिया गया तब जनाक्रोश के दबाव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए माननीय न्यायालय कलेक्टर से पुनरावलोकन अनुमति मांगी माननीय न्यायालय कलेक्टर द्वारा 26 अगस्त 21 को पुनरावलोकन आदेश दिया तब से अब तक विभिन्न संगठनो द्वारा अनुविभागीय अधिकारी एवम कलेक्टर से पुनर्विलोकन प्रक्रिया हेतु निवेदन किया किंतु कोई कार्यवाही नही हुई।
अनुविभागीय अधिकारी की भूल को माननीय न्यायालय कलेक्टर के आदेश के बावजूद सुधारा नही जा सका यह वरिष्ठ न्यायालय के आदेश का अपमान ही नहीं अवमानना भी है जिसके विरोध में मुंगेली के विभिन्न संगठनों द्वारा भारी संख्या में जनदर्शन में कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी बात रखी तथा एक सप्ताह के भीतर निराकरण की मांग की ।
गौरतलब हो कि नगर का बजरंग अखाड़ा एक पंजीकृत अखाड़ा है जिसका संचालन कई वर्षों से किया जा रहा है लेकिन इस भूमि को भूमाफियाओं के द्वारा धोखे से बेच दिया गया है जिसके बाद इस मामले की जानकारी लगते ही हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों एवं आम नागरिकों के द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया था जिसके बाद जिला प्रशासन के द्वारा अखाड़े की भूमि को यथावत ट्रस्ट के नाम पर रखे जाने को लेकर सहमति दी गयी थी लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा आजतक इस भूमि को ट्रस्ट के नाम नही किया गया है और इस भूमि के बारे में मिली जानकारी के अनुसार अखाड़े की भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम से नामांतरण ही नही बिक्री भी कर दिया गया है जिससे नाराज हिन्दू संगठनों के द्वारा पुनः कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन सौंप कर अखाड़े की भूमि को यथावत रखे जाने की मांग करने की अपील किया गया वही इस मामले में जल्द कार्यवाही नही होने से उग्र आंदोलन किये जाने की चेतावनी दिया गया है।