02/10/2021
“जिंदगी तो अपने दम पे जी जाती है
दूसरों के कंधो पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं !”
शहीद भगत सिंह जी की जयंती पर शत शत नमन .!
मार्क्स के विचारों से प्रभावित शहीद भगत सिंह देश के प्रति प्रेमी, पागल और दीवाने थे। बहरी हुकूमत को जगाने हेतु खुलेआम इंक़लाब चिल्लाए, जब ग़ुलाम देश गूँगी हुआ करती थी।आज इसीलिए शहीदों में सबसे प्रथम नाम भगत सिंह का लिया जाता है।इस शायर मिज़ाज क्रांतिकारी ने अपने प्राणों की आहुति भी इस तरह से दी कि अंग्रेजों को लग गया कि भारतीय दरसल किस मिज़ाज के होते हैं। अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद करने के लिए चले आंदोलनों में भगत सिंह का नाम बहुत ही गर्व से लिया जाता है। 12 साल की उम्र में जलियांवाला बाग कांड का उनके मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा था। 14 साल के भगत सिंह ने सरकारी स्कूलों में किताबें और कपड़ों में आग लगा दिया था। देश की रक्षा के खातिर अपनी पढ़ाई छोड़कर सन् 1920 में वो महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में शामिल हुए। 23 साल की छोटी सी उम्र में ही ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया था। ऐसे वीर को सलाम !🙏