30/09/2023
हे श्याम
सोचती हूँ, कि कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाई तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाई वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करती
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी न था I
सोचती हूँ कि क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी न था I"