Rohit sir m

Rohit sir m Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Rohit sir m, Madhepura.

02/08/2026

आज का अनुभव 👇
बड़े भाई के बच्चे को छोटा भाई सिर पर बैठा लेता है, उसकी हर गलती को भी अपनापन समझकर नजरअंदाज कर देता है।
लेकिन जब वही छोटा भाई अपने बच्चों के लिए थोड़ा सा अपनापन, सम्मान या अधिकार चाहता है, तो उसे किसी न किसी नजरिए से गलत ठहरा दिया जाता है और धीरे-धीरे दरकिनार कर दिया जाता है।

दर्द इस बात का नहीं कि बराबरी का व्यवहार नहीं मिला,
दर्द इस बात का है कि **जिस रिश्ते को निभाने में हमने कभी हिसाब नहीं लगाया, उसी रिश्ते में हमारे हिस्से का अपनापन तौल-तौलकर दिया गया।**

रिश्ते उम्र से बड़े-छोटे नहीं होते,
**रिश्ते तो व्यवहार से बड़े या छोटे बनते हैं।**

जहाँ एक के बच्चों की हर बात प्यार कहलाए और दूसरे के बच्चों की वही बात गलती, वहाँ समस्या बच्चों में नहीं, **नजरिए में होती है।**

02/08/2026

आज का अनुभव 👇
**हमारे समाज में अक्सर गलती से ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखा जाता है कि गलती किसने की है।**

बड़े जब गलती करते हैं तो उसे *उम्र, अनुभव और परिस्थिति* का नाम देकर सह लिया जाता है। लेकिन वही गलती अगर छोटों से हो जाए, तो उसे संस्कार, अनुशासन और चरित्र का सवाल बना दिया जाता है।

शायद समस्या गलती में उतनी नहीं है, जितनी **गलती को देखने के हमारे दोहरे नजरिए में है।**

आज लगा कि बच्चों से गलती होने पर उन्हें अपमानित करने के बजाय समझाना चाहिए, और बड़ों से गलती होने पर केवल इसलिए चुप नहीं रहना चाहिए कि वे बड़े हैं।

**सम्मान उम्र का हो सकता है, लेकिन सही और गलत का फैसला उम्र देखकर नहीं होना चाहिए।**

क्योंकि जिस घर में बड़ों की हर गलती माफ और छोटों की हर गलती अपराध बन जाए, वहाँ धीरे-धीरे **न्याय नहीं, डर पैदा होता है।**

सुरक्षित शनिवार
01/08/2026

सुरक्षित शनिवार

आज का क्रिएशन
01/08/2026

आज का क्रिएशन

01/08/2026

# 🛡️ सुरक्षित शनिवार

# # # 📅 माह – अगस्त | प्रथम सप्ताह

# # # 🏫 विद्यालय

**नव प्राथमिक विद्यालय हरिनंदन टोला गाढ़ा**
**प्रखंड – शंकरपुर | जिला – मधेपुरा**

# # # 🌊 बाढ़ से खतरे एवं डूबने से बचाव के उपाय

* बाढ़ के समय सुरक्षित एवं ऊँचे स्थान पर जाएँ।
* तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचें।
* नदी, नहर, तालाब एवं गड्ढों के पास न जाएँ।
* बिजली के खंभों एवं टूटे हुए तारों से दूर रहें।
* बाढ़ के पानी में तैरने या वाहन चलाने का प्रयास न करें।
* प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी एवं निर्देशों का पालन करें।
* बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखें।

# # # 🛟 आपदा प्रबंधन एवं मॉक ड्रिल

* आपदा के समय घबराएँ नहीं, शांत रहें।
* आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुँचने का अभ्यास करें।
* मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा के समय बचाव के तरीकों का अभ्यास करें।
* दूसरों की सहायता करते समय अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

# # # 🚑 प्राथमिक उपचार (First Aid) की जानकारी

* घायल व्यक्ति को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुँचाएँ।
* चोट लगने पर प्राथमिक उपचार दें।
* रक्तस्राव होने पर साफ कपड़े से घाव को दबाएँ।
* गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
* बेहोश व्यक्ति को बिना उचित जानकारी के कोई भोजन या पानी न दें।

# # # 🎯 प्रश्नोत्तरी, समूह गतिविधियाँ एवं सुरक्षा शपथ

**प्रश्नोत्तरी:**
बाढ़, डूबने, आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँ।

**समूह गतिविधियाँ:**

* बाढ़ से बचाव के उपायों पर चर्चा।
* आपदा के समय सुरक्षित स्थान तक पहुँचने का अभ्यास।
* प्राथमिक उपचार का प्रदर्शन।
* मॉक ड्रिल में सामूहिक भागीदारी।

**सुरक्षा शपथ:**

> “हम आपदा के समय घबराएँगे नहीं। स्वयं सुरक्षित रहेंगे और दूसरों को भी सुरक्षित रखने में सहयोग करेंगे। बाढ़ एवं डूबने से बचाव के सभी सुरक्षा उपायों का पालन करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता करेंगे।”

01/08/2026

# # # 🛡️ सुरक्षित शनिवार

**माह – अगस्त | प्रथम सप्ताह**
**दिनांक – 01/08/2026**
**विषय – पेयजल की अशुद्धता से होने वाले खतरे एवं इसके उपाय**

**1. अशुद्ध पेयजल क्या है?**
जिस पानी में गंदगी, कीटाणु, हानिकारक रसायन या अन्य दूषित पदार्थ मिले हों और जिसे पीने से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है, उसे अशुद्ध पेयजल कहते हैं।

**2. अशुद्ध पानी से होने वाले खतरे**

* दस्त और उल्टी
* हैजा और पेचिश
* टाइफाइड
* पीलिया (हेपेटाइटिस-ए/ई)
* पेट दर्द एवं संक्रमण
* शरीर में पानी और लवण की कमी (डिहाइड्रेशन)
* बच्चों में कमजोरी और कुपोषण का खतरा

**3. अशुद्ध पानी से बचने के उपाय**

* हमेशा **स्वच्छ और सुरक्षित पानी** ही पिएँ।
* पानी को पीने से पहले **उबालकर** ठंडा करें या उचित जल-शुद्धिकरण विधि अपनाएँ।
* पानी को हमेशा **ढककर** रखें।
* पानी निकालने के लिए साफ बर्तन या करछी का प्रयोग करें।
* पीने के बर्तन को प्रतिदिन साफ करें।
* खुले स्रोत, गंदे तालाब या संदिग्ध स्थान का पानी बिना शुद्ध किए न पिएँ।
* शौचालय और कूड़े-कचरे को जलस्रोत से दूर रखें।
* दस्त होने पर **ORS** दें और आवश्यकता होने पर स्वास्थ्यकर्मी/चिकित्सक से संपर्क करें।

# # # 💧 बच्चों के लिए संदेश

**“स्वच्छ जल, स्वस्थ जीवन।
पानी को स्वच्छ रखें, बीमारी को दूर रखें।”**

# # # 🎯 गतिविधि

बच्चों से पूछें—
**“अगर आपके घर का पीने वाला पानी गंदा दिखाई दे तो आप क्या करेंगे?”**
बच्चों से सुरक्षित पानी प्राप्त करने और उसे साफ रखने के उपाय बताने को कहें।

31/07/2026

आज का अनुभव 👇
**एक सवाल बेटे से भी...**

जब बहू के द्वारा परिवार के किसी सदस्य को अपशब्द कहे जाते हैं, खरी-खोटी सुनाई जाती है या उनके साथ दुर्व्यवहार होता है, तो उंगली सबसे पहले बेटे पर उठती है—
**“तुम अपनी पत्नी को समझाते क्यों नहीं?”**
**“तुम उसे रोकते क्यों नहीं?”**
**“तुम्हारी वजह से घर का माहौल खराब हो रहा है।”**

लेकिन कभी किसी ने उस बेटे से यह पूछा है कि...

जब वही बहू **बेटे को अपशब्द कहती है, उसे अपमानित करती है, उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचाती है, उसकी बातों को तिरस्कार से ठुकराती है**, तब वह बेटा किससे शिकायत करे?

माँ-बाप से करे तो कहा जाता है—
**“अपनी पत्नी की शिकायत लेकर हमारे पास क्यों आए हो?”**

परिवार से कहे तो कहा जाता है—
**“पति-पत्नी के बीच की बात है, तुम दोनों खुद सुलझाओ।”**

और अगर वह चुप रह जाए, तो उसकी चुप्पी को उसकी कमजोरी समझ लिया जाता है।

सबसे बड़ा दर्द तब होता है जब बेटा हर रिश्ते को बचाने के लिए खुद को समझाता रहता है, सबकी भावनाओं का ख्याल रखता है, सबको खुश रखने की कोशिश करता है...
लेकिन **उसकी अपनी भावनाओं का ख्याल रखने वाला कोई नहीं होता।**

बहू का दुख परिवार का दुख है,
तो बेटे का दुख भी परिवार का ही दुख होना चाहिए।

बहू के साथ गलत हो तो बेटे को कटघरे में खड़ा करना न्याय है,
तो बेटे के साथ गलत हो तो **उसे अकेला छोड़ देना कौन-सा न्याय है?**

रिश्ता चाहे माँ-बेटे का हो या पति-पत्नी का,
**गलती को रिश्ते के आधार पर नहीं, व्यवहार के आधार पर देखना चाहिए।**

क्योंकि बेटा सिर्फ बेटा नहीं होता...
**वह भी एक इंसान है। उसके भीतर भी भावनाएँ हैं, आत्मसम्मान है और टूट जाने की एक सीमा है।**

हर बार बेटे से यह उम्मीद करना कि वह सब सह लेगा,
सबको समझेगा,
सबको संभालेगा...

**शायद सबसे बड़ा अन्याय उसी बेटे के साथ है, जो सबको अपना मानकर चलता रहा।**

31/07/2026

आज का लेख👇
**बदलाव की शुरुआत कहाँ से होगी?**
किस बदलाव की बात करते हैं आप?
जो व्यक्ति अपने ही घर में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ तक नहीं उठा सकता, जो अपने सामने किसी के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को देखकर भी मौन रह जाता है, वह समाज में बदलाव की उम्मीद कैसे कर सकता है?

हम अक्सर समाज, गाँव, राज्य और देश को बदलने की बातें करते हैं। व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, दूसरों के आचरण पर टिप्पणी करते हैं और क्रांति की कल्पना करते हैं। लेकिन क्या कभी हमने स्वयं के भीतर झाँककर देखा है कि **जहाँ अन्याय हमारे बिल्कुल सामने होता है, वहाँ हमारा अपना साहस कहाँ चला जाता है?**

बदलाव केवल भाषणों से नहीं आता।
क्रांति केवल नारों से नहीं होती।
और समाज केवल दूसरों को बदलने से नहीं बदलता।

**शुरुआत खुद से करनी पड़ती है।**

जहाँ गलत हो, वहाँ गलत कहने का साहस चाहिए।
जहाँ किसी के साथ अन्याय हो, वहाँ उसके पक्ष में खड़े होने का विवेक चाहिए।
और जहाँ अपने ही लोग गलत हों, वहाँ रिश्तों और भावनाओं से ऊपर सत्य को रखने का साहस चाहिए।

सबसे कठिन संघर्ष बाहर की व्यवस्था से नहीं, **अपने भीतर के डर, मोह, स्वार्थ और सुविधाओं से होता है।**

यदि हम अपने घर में शांति बनाए रखने के नाम पर अन्याय को सहते रहेंगे, रिश्ते बचाने के नाम पर गलत को सही ठहराते रहेंगे और अपनों के व्यवहार पर इसलिए मौन रहेंगे क्योंकि विरोध करने की कीमत हमें स्वयं चुकानी पड़ेगी, तो फिर समाज में परिवर्तन की हमारी बातें केवल शब्द बनकर रह जाएँगी।

याद रखिए—

**जिस घर में अन्याय के सामने आवाज़ दबा दी जाती है, वहाँ से समाज बदलने की आवाज़ बहुत दूर तक नहीं जाती।**

बदलाव की पहली सीढ़ी है—
**अपने भीतर सच के प्रति ईमानदार होना।**

फिर अपने घर में,
फिर अपने आसपास,
फिर अपने समाज में।

क्योंकि क्रांति कहीं बाहर से आने वाली चीज़ नहीं है।
**क्रांति तब जन्म लेती है, जब एक व्यक्ति यह तय करता है कि अब वह गलत को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि वह उसके अपने लोग कर रहे हैं।**

इसलिए अगर सच में बदलाव चाहिए, तो शुरुआत किसी और से मत कीजिए।

**शुरुआत खुद से कीजिए।
अपने घर से कीजिए।
और सबसे पहले उस मौन को तोड़िए, जो अन्याय को ताकत देता है।**

28/07/2026

आज का अनुभव 👇
**"आज भी हमारे समाज में घर में बच्चे को संभालना, उसकी देखभाल करना और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाना 'काम' नहीं माना जाता। जबकि यही वह कार्य है जो एक नए जीवन के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की नींव रखता है।**

विडंबना यह है कि यदि यही काम किसी डे-केयर, आया या देखभाल करने वाले कर्मचारी द्वारा किया जाए तो उसे मेहनत और रोजगार माना जाता है, लेकिन जब वही जिम्मेदारी घर का कोई सदस्य निभाता है, तो उसे अक्सर 'कुछ नहीं करता' कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

बच्चे की देखभाल केवल समय देना नहीं है; इसमें धैर्य, जागरूकता, त्याग, रातों की नींद, भावनात्मक उपलब्धता और निरंतर जिम्मेदारी शामिल होती है। इसलिए इस श्रम को सम्मान मिलना चाहिए, चाहे वह माँ करे, पिता करे या परिवार का कोई अन्य सदस्य।

किसी भी समाज की परिपक्वता इस बात से भी आँकी जा सकती है कि वह देखभाल और पालन-पोषण जैसे अदृश्य श्रम को कितना सम्मान देता है। यही श्रम आने वाली पीढ़ी के व्यक्तित्व का निर्माण करता है।

25/07/2026

आज का अनुभव 👇
**सूर्पणखा केवल एक पात्र नहीं, बल्कि मानव मन की एक प्रवृत्ति का प्रतीक भी है।**

वह हमें यह संकेत देती है कि जब मनुष्य अपनी इच्छाओं और कामनाओं की पूर्ति के लिए किसी के पास जाता है, तो अक्सर वह अपने सबसे आकर्षक, विनम्र और सुंदर रूप को प्रस्तुत करता है। लेकिन जब उसकी कामना पूरी नहीं होती, तो वही व्यक्ति अपना वास्तविक चेहरा प्रकट कर देता है—जो क्रोध, अहंकार, प्रतिशोध और कटुता से भरा हुआ हो सकता है।

इस दृष्टि से सूर्पणखा हमें आत्मचिंतन का संदेश देती है कि यदि हमारी विनम्रता केवल स्वार्थ की पूर्ति तक सीमित है, तो वह वास्तविक सद्गुण नहीं, बल्कि एक मुखौटा है। सच्चा चरित्र वही है जो इच्छा पूरी होने पर भी और असफल होने पर भी समान रूप से संयम, मर्यादा और विवेक बनाए रखे।

Address

Madhepura
852128

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Rohit sir m posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share