07/09/2023
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म पापी राजा कंस की मृत्यु के लिए हुआ था। वह वासुदेव और देवकी की 8वीं संतान थे, माता देवकी कंस की बहन थी और उनके जन्म से पहले यह भविष्वाणी हुई थी की उनकी बहन की आठवीं संतान उनकी मृत्यु का कारण बनेगी। अपनी मृत्यु को टालने के लिए कंस ने अपनी बहन और जीजा को बंदी बना लिया और उनकी हर संतान को मारने का निश्चय किया लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी मध्य रात्रि को जब भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब सभी पहरेदार सो गए और जेल के सभी दरवाज़े अपने आप खुल गए। पिता वासुदेव ने उन्हें टोकरी में रखा और तेज़ बारिश में निकल कर उन्हें माता यशोधा और नन्द के घर छोड़ आए। वहीं उनका पालन पोषण हुआ।
बचपन से ही उनके पास जादुई शक्तियाँ थी। आज मथुरा में जो गोवर्धन पर्वत है माना जाता है की उन्होंने उसे अपनी ऊँगली पर उठा लिया था। युवा होकर श्री कृष्ण ने अपने मामा कंस की हत्या की, द्वारका की स्थापना की और वहाँ के राजा बने। महाभारत में कौरवों के खेमें में द्वारका की सेना थी, भीष्म पितामाह, गुरु द्रोण, कर्ण जैसे महारथी थे और पांडवों के खेमें में केवल कृष्ण लेकिन उसके बावजूद माधव ने अपने पार्थ को हारने नहीं दिया।
भगवान होते हुए उन्होंने हर इंसानी रिश्ते को बड़ी ईमानदारी से निभाया। चाहे वो माता यशोधा और देवकी के पुत्र का हो, राधा के प्रेमी का, बलदाऊ और सुभद्रा के भाई का, रुक्मणि के पति का, अर्जुन, द्रौपदी और सुदामा के मित्र का। श्री कृष्ण ने दुनिया को प्रेम का पाठ सिखाया वह 16,108 पत्नियों के पति थे लेकिन आज भी उनकी पूजा राधा के साथ होती है। यह अपने आप में ही अद्भुत है।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
जिनके लिए एक राजकुमारी(मीरा) ने महलों का ऐशो आराम त्याग दिया उनकी भक्ति में कोई तो शक्ति ज़रूर होगी। यूँ ही नहीं हर साल हजारों लोग लड्डू गोपाल के जन्म के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से मथुरा पहुंचते हैं। यूँ ही भक्त पूरे दिन भूखे प्यासे रह कर रात के 12:00 बजे तक उनके जन्म का इंतेज़ार नहीं करते। यूँ ही नहीं कृष्णजन्माष्टमी को हर घर में इतनी ख़ुशी से मनाया जाता जैसे उनके ही घर में पुत्र का जन्म हुआ है। यह सब श्री कृष्ण के भक्तों का प्यार ही है जो उनसे यह सब करवाता है।
अंत में हम इतना ही कहना चाहेंगे की नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की और कृष्णजन्माष्टमी की शुभकामनाएं।