06/06/2026
*कुर्सी पर ढोए जा रहे मरीज, फिर भी सड़क का इंतजार कर रहा काथला*
*आज़ादी के 79 साल बाद भी विकास की राह देख रहा गांव, आधे रास्ते में अटका सड़क निर्माण*
आनी (कुल्लू)एन नेगी!
एक ओर सरकारें गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत बखनाओ के अंतर्गत आने वाला गांव काथला आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है और चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है, तो ग्रामीणों को उसे कुर्सी पर बैठाकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
हाल ही में सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की हकीकत बयां करती हैं, जिनमें ग्रामीण एक मरीज को कुर्सी पर उठाकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों से ले जाते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उन वादों की भी याद दिलाता है जो हर चुनाव में गांव के लोगों से किए जाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार काथला सड़क लगभग 15 से 20 वर्ष पहले स्वीकृति और प्रस्तावों की प्रक्रिया में लाई गई थी। करीब एक वर्ष पूर्व सड़क निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन मात्र आधा किलोमीटर निर्माण के बाद कार्य बंद कर दिया गया। तब से मशीनें भी नहीं लौटीं और न ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सका।
सड़क न होने के कारण गांव के लोग आज भी राशन, निर्माण सामग्री, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामान पीठ पर ढोने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, विद्यार्थियों और मरीजों को झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया जाता है, आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव फिर उपेक्षा का शिकार हो जाता है। लोगों को वर्तमान सरकार और जनप्रतिनिधियों से बड़ी उम्मीदें थीं, मगर आज तक सड़क निर्माण कार्य को गति नहीं मिल पाई है।
समस्त ग्रामवासियों ने प्रदेश सरकार, प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि काथला सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल पुनः शुरू किया जाए, ताकि गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े।
"जब मरीजों को आज भी कुर्सियों पर ढोना पड़ रहा है, तब विकास के दावों का मूल्यांकन भी इन्हीं तस्वीरों से होना चाहिए।"