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 #नमो_बुद्धा💐🙏
26/07/2026

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shyuney_hu_. जीवन मिला—यही सबसे बड़ी गलतफ़हमी है— अज्ञात अज्ञानीहम कहते हैं—"जीवन मिला है।"यही सबसे बड़ी गलतफ़हमी है।"मि...
26/07/2026

shyuney_hu_. जीवन मिला—यही सबसे बड़ी गलतफ़हमी है

— अज्ञात अज्ञानी

हम कहते हैं—"जीवन मिला है।"
यही सबसे बड़ी गलतफ़हमी है।

"मिलना" वहाँ होता है जहाँ देने वाला और लेने वाला दो हों।

धन मिल सकता है।
घर मिल सकता है।
साधन मिल सकते हैं।

पर जीवन नहीं मिलता।

जीवन कोई वस्तु नहीं, जिसे किसी ने हमें दिया हो। जीवन स्वयं अस्तित्व की लीला है। हम उसी लीला का एक क्षणिक प्रकट रूप हैं।

समस्या तब शुरू होती है जब बुद्धि कहती है—"मैं हूँ।"

यहीं से एक केंद्र बनता है। यही केंद्र स्मृति, अहंकार और पहचान का निर्माण करता है। फिर यही "मैं" जन्म और मृत्यु का अनुभव करता है।

मृत्यु के बाद क्या होता है?

मृत्यु के बाद कुछ नष्ट नहीं होता। अस्तित्व में कुछ भी पूर्णतः नष्ट नहीं होता। जो खंडित होकर प्रकट हुआ था, वह पुनः समग्र में विलीन हो जाता है। फिर उसी समग्र से नए रूप प्रकट होते हैं।

इसलिए मृत्यु अंत नहीं, विलय है।

मोक्ष मृत्यु के बाद नहीं होता।

मोक्ष तब होता है जब यह भ्रम टूट जाता है कि "मैं एक स्वतंत्र सत्ता हूँ।"

जब यह स्पष्ट हो जाता है कि "मैं भी उसी लीला का एक क्षण हूँ, कोई अलग अस्तित्व नहीं," तब अहंकार का केंद्र टूट जाता है।

यही स्मृति का विघटन है।

यही मुक्ति है।

तब जीवन चलता रहता है, पर "मैं" का बोझ समाप्त हो जाता है।

तुम जीवन को नहीं जी रहे।

जीवन स्वयं अपने को तुम्हारे माध्यम से जी रहा है।

यही लीला है।

— अज्ञात अज्ञानी

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