14/02/2026
कैराना शहर की गलियों में आज भी एक ऐसा घर खड़ा है…
जो सिर्फ ईंट और पत्थरों से नहीं बना,
बल्कि 35 साल की सेवा, संघर्ष और समर्पण की कहानी कहता है।
यह वही घर है…
जहाँ से लोगों की आवाज़ उठी,
जहाँ से न्याय की बातें हुईं,
जहाँ से विकास की नींव रखी गई।
हम बात कर रहे हैं बशीर अहमद साहब की…
जो 35 साल तक अध्यक्ष रहे।
आज वो हमारे बीच नहीं हैं,
लेकिन उनकी सोच… उनका संघर्ष…
और उनका लोगों के लिए प्यार…
आज भी इस घर की दीवारों में महसूस होता है।
समय बदला… दौर बदला…
लेकिन यह घर आज भी वैसा ही है,
जैसा बड़ों ने बनाया था —
सादगी, ईमानदारी और इज्जत का प्रतीक।
और अब…
इस विरासत को संभाल रहे हैं उनके भतीजे — शमीम अहमद।
शमीम अहमद ने सिर्फ नाम नहीं संभाला,
बल्कि उस भरोसे को जिंदा रखा है
जो कैराना की जनता ने इस घराने पर किया था।
जहाँ से बड़े-बड़े नेता निकले,
वहीं से एक बार फिर
उजाले की नई रोशनी जली है।
अध्यक्ष पद पर खड़े होकर
शमीम अहमद ने यह साबित किया है
कि विरासत सिर्फ नाम से नहीं,
काम से आगे बढ़ती है।
यह सिर्फ एक घर नहीं…
यह कैराना की राजनीति का इतिहास है।
यह सेवा की मिसाल है।
और यह भरोसे की पहचान है।
बशीर अहमद साहब भले आज हमारे बीच नहीं हैं,
लेकिन उनकी यादें…
उनकी दी हुई सीख…
और उनका बनाया हुआ रास्ता…
आज भी इस घर से होकर गुजरता है।
कैराना की जनता देख रही है…
इतिहास फिर खुद को दोहराने के लिए तैयार है।