27/07/2026
कल मैं किसी फंक्शन में गया था, वहाँ मेरा बच्चा भी था और मेरे काफी रिश्तेदारों के बच्चे भी आए हुए थे। मेरे बच्चे ने ज़िद की, "पापा, सामने पार्क में झूले हैं, मुझे खिलाने ले चलो।" मैंने उससे कहा, "चलो।" तो साथ में रिश्तेदारों के बच्चों ने भी कहा, "हमें भी साथ ले चलो, हम भी झूले झूलेंगे।" मैंने कहा, "इसमें क्या दिक्कत है, सब के सब चलो, मुझे तो बच्चों के साथ खेलने में मज़ा आता है।" और मैं चला गया।
वहाँ कुल 5 बच्चे थे, जिनमें से मेरा बच्चा छोटा था, इसलिए मुझे उसका ज़्यादा ध्यान रखना पड़ रहा था—झूले खिलाना, नीचे उतारना और ऊपर चढ़ाना। बाकी सब बच्चे अपने आप ही झूले झूल रहे थे, उनका ध्यान रखने की ज़रूरत नहीं थी क्योंकि वे बड़े थे। मेरा बच्चा 3 साल का था और वे सब 7 से 8 साल के थे।
वहाँ एक झूला था जो गोल-गोल घूमता था, जिसमें सब बीच में खड़े हो जाते थे और मैं उसे पकड़कर घुमाता था। उसमें सब बच्चों को बहुत मज़ा आ रहा था और वे एन्जॉय कर रहे थे।
तभी मुझसे एक बच्चे ने एक ऐसा सवाल पूछा जो अभी तक मेरे दिल में मुझे तकलीफ दे रहा है। इसी सवाल की वजह से मैंने इतनी मेहनत करके यह पोस्ट लिखी है, और यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बल्कि सच्ची बात है, जो हुआ है वही बता रहा हूँ।
उस बच्चे ने मुझसे पूछा, "क्या आप उस छोटे बच्चे के पापा हो?" मैंने बोला, "हाँ बेटा।" तो उसने पता है क्या बोला? उसने कहा, "अंकल, हमारे पापा तो कभी हमारे साथ ऐसे नहीं खेलते, आप कितने अच्छे हो।"बस, यह इतनी सी एक लाइन मेरे दिल को छू गई और मैं चुप हो गया। फिर मैंने उसे समझाया कि बेटा, किसी के घर में पापा खेलते हैं तो किसी के घर में मम्मी। पर मेरे मन में यही सवाल उठ रहा था कि क्या आजकल लोगों के पास इतना समय भी नहीं रहा कि वे अपने बच्चे को सुबह एक घंटा और शाम को एक घंटा पार्क में ले जाकर उसके साथ खेलें और उससे बातें करें?देखिए, एक माँ सिर्फ बच्चे के साथ खेल सकती है, पर एक बाप उसे खेलते-खेलते हर चीज़ सिखाता है। क्योंकि बाप ने वह सब दुनियादारी देखी है, ठोकरें खाई हैं, इसलिए वह हर कदम पर बच्चे को कुछ न कुछ सिखाता है जिसे बच्चा हमेशा याद रखता है कि उसके लिए क्या बुरा है और क्या सही। जब पिता उसे समय देता है, तो बच्चा खुश रहता है...।
कृपया अपने बच्चे को समय दें...। ज़िंदगी में काम भी ज़रूरी है, पर अगर साथ में पत्नी, बच्चे और माँ-बाप हैं, तो उन्हें भी 15 से 20 मिनट का समय देना बेहद ज़रूरी है। माँ-बाप के पास तो अगर आप 15 मिनट भी बैठ जाएँगे, तो वे उतने में ही खुश हो जाएँगे।I