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एक समृद्ध ज्योतिषी ग्रहों से अच्छा फल कैसे लें, इसके बारे भलीभांति ज्ञान होना ज़रूरी है मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ लाल किताब करत...
24/12/2024

एक समृद्ध ज्योतिषी ग्रहों से अच्छा फल कैसे लें, इसके बारे भलीभांति ज्ञान होना ज़रूरी है मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ लाल किताब करता हूं ! इसलिए मेरा यह मानना है कि कुदरत ने या भगवान ने इन्सान के लिये कोई भी ग्रह बुरा फल देने वाला या अशुभ फल देने वाला नहीं बनाया,
कि वो ग्रह जाए और किसी भी जातक या व्यक्ति को बुरा या अशुभ फल देना शुरू कर दे यह सब हम अपने कर्मो के द्वारा ही उस ग्रह को बुरा या अशुभ फल देने के लिये मज़बूर करते हैं ! या ऐसा भी कह सकते हैं कि हम अपने कर्मो द्वारा किसी भी ग्रह के बुरे या अच्छे फल को ख़ुद प्रभावित करते हैं

किस ग्रह के लिये और किस भाव में वो ग्रह मौजूद है और उसके लिये क्या करना चाहिये कि वो ग्रह हमें या उस व्यक्ति को शुभ फल दे इसके बारे लाल किताब में स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं और उनको समझना किसी भी आम व्यक्ति के लिए भी कोई मुश्किल कार्य नहीं है ! आप इसे परहेज़ के तौर पर भी ले सकते हैं या ऐसा भी कह सकते हैं कि अमुक भाव में अमुक ग्रह होने से जातक को क्या करना है और क्या नहीं करना चाहिये ?
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Transcript

30/04/2022

इंसान बंधा खुद लेख से अपने, लेख बिधाता कलम से हो
कलम चले खुद कर्म पे अपने, झगडा अक्ल न क़िस्मत हो

मुझे आज बहुत बड़ी खुशी का अनुभव हो रहा है कि ज्योतिषगुरु विनीत नागपाल जी द्वारा इल्म सामुद्रिक की लाल किताब 1952 का हिंदी लिपियांत्रण करके साल 2015 में डिजिटल रूप में समाज को अर्पित करने का प्रयास किया है । इस महान विद्या से मेरा बहुत पुराना रिश्ता है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस किताब के रचियता पंडित रूप चंद जोशी जी के आशीर्वाद से इसे आमजन तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

पंडित जी द्वारा अपने संपूर्ण जीवन में पांच उर्दू ग्रंथ रचे गए। ये पांचों आज के समय में ज़्योतिष समाज के लिए एक प्रकाश स्तम्भ का काम कर रहे हैं। मैं समझता हूं इस पर एक बहुत बड़े शोध कार्य की जरूरत है, और ये शोध कार्य तब ही संभव हो सकता जब ये पांचों ग्रंथ सभी के पास हिंदी भाषा में उपलब्ध हो सकें ।

ज्योतिष गुरु नागपाल जी के मन में बहुत लम्बे समय से ये धारणा बनी हुई थी की इस ग्रंथ का विशुद्ध हिंदी लिपियांत्रण होना चाहिए और हर पाठक तक बाआसानी पहुंचना चाहिए। इस बड़े काम को अपनी लगन और मेहनत से सार्थक करने का बीड़ा उठाया गया था। यह कार्य ज्योतिष गुरु नागपाल जी द्वारा साल-2015 में लाल किताब इल्म सामुद्रिक के दो उर्दू ग्रन्थ लाल किताब 1952 और लाल किताब के अरमान 1940 का काम बहुत पहले ही पूरा कर लिया गया था। अब इसको हार्ड कवर बुक के रूप में सब के लिए करवाया जा रहा है।

26/04/2022

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23/04/2022
30-03-2022 को एक पोस्ट प्रदर्शित की गई थी जिसमें एक व्यक्ति के चेहरे पर पाए जाने वाले 100 तिलों के बारे में के बारे में ...
04/04/2022

30-03-2022 को एक पोस्ट प्रदर्शित की गई थी जिसमें एक व्यक्ति के चेहरे पर पाए जाने वाले 100 तिलों के बारे में के बारे में बताया गया था और पिछली पोस्ट में यह बता यह भी बताया गया था कि जरूरी नहीं कि यह 100 तिल सभी के सभी के चेहरे पर पाए जाएं। इनमें से कुछ एक दो तीन या चार या पांच की संख्या में तिल व्यक्ति के चेहरे पर पाए जा सकते हैं। इस पिछली पोस्ट का लिंक नीचे दिया जा रहा है:-

आज इसी श्रृंखला में हम एक चेहरे पर पाए जाने वाले तिलों के बारे में सबसे पहले शनि की रेखा पर जो माथे पर कहीं गई है सबसे ऊपर बालों के करीब मौजूद शनि की रेखा पर पांच दिल पाए जाते हैं।

आज हम इन्हीं 5 तिलों के बारे बताने का प्रयास करेंगे।

आपको इस पोस्ट के साथ चेहरे के चित्र पर शनि की रेखा माथे पर किस स्थान पर होती है ये भी बताने का प्रयास किया जा रहा है।

आज हम इस पोस्ट में शनि से संबंधित पांच तिलों के बारे में के बारे में बात करेंगे जहां पर शनि की रेखा दिखाई गई है जहां पर संख्या नंबर एक लिखा गया है
व्यक्ति चेहरे पर माथे पर शनि रेखा के दाईं और रेखा के ऊपर अथवा उस रेखा के नीचे यदि किसी व्यक्ति के चेहरे पर इस जगह तिल का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति के ज़िस्म पर उत्तर तिल यानि जवाबी तिल भी उस व्यक्ति के ज़िस्म पर पाया जाता है और ये जवाबी तिल उसके वक्ष स्थल के दाईं और भी होगा।

अब यदि यह तिल लाल रंग में पाया जाये तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धि यानि शार्प माइंड का मालिक होता है।
ऐसे व्यक्ति में व्यवसाय करने की क्षमता भी ग़ज़ब की होगी,ऐसी ख़ासियत का धनी होने के कारण ऐसा व्यक्ति धन कमाने में सक्षम होता है।

लेकिन इसके विपरीत यदि इस जगह पर पाए जाने वाले तिल का रंग काला हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक अधिक बोलने वाली प्रवृति का मालिक होगा, अत्यंत चालाक यानि अपने काम को निकलवाने के लिए चालाकी को इस्तेमाल करने वाला होगा। ऐसा जातक व्यापार करने में पारंगत होगा।

यदि इस जगह पर पाया जाने वाला तिल किसी स्त्री के माथे पर पर हो तो इस प्रकार की औरत वह स्त्री ज्ञानवान गुणों से भरपूर धन से भरपूर लंबी उम्र की मालिक होती है ऐसी स्त्री को अपने विवाह के उपरांत खुदगर्ज यानी वह लोग जो स्वार्थी हूं अपना स्वार्थ सिद्ध करने में निपुण हों, कलंकिनी यानी कि करैक्टर लेस औरतों से दूरी बनाए रखना फायदेमंद साबित होगा, यदि वह ऐसा नहीं करती तो इस प्रकार की स्त्रियां उसके लिए हानि पहुँचाने का सबब बन सकती हैं।

तिल संख्या नंबर 2 के बारे में बात करते हैं शनि रेखा के दाई और से दूसरे नंबर पर पाए जाने वाले तिल के अनुसार यदि यह तिल लाल रंग का हो तो पुरुष स्त्रियों से विशेष प्रेम रखने वाला होता है तथा अपने प्रत्येक कार्य को बड़ी सरलता से चित्र कर लेता है सरलता से कर लेता है।

इसके विपरीत यदि इस तिल का रंग काला हो तो ऐसा व्यक्ति किसी औरत के प्रेम में पढ़कर मानहानि तथा अपयश को प्राप्त करता है उसे प्राय सभी कामों में असफलता का सामना भी करना पड़ता है ।

इसके बाद आगे यह कहा गया है कि यदि ऐसा लाल रंग का तिल किसी स्त्री के ललाट पर इसी जगह पर मौजूद हो तो ऐसी स्त्री हो तो ऐसी स्त्री सदैव दुखी बनी रहती है, और उसकी इच्छाएं पूर्ण नहीं हो पाती, लेकिन इसके विपरीत यदि इस तिल का रंग काला हो तो उसे इस उपरोक्त कहे अनुसार से भी ज्यादा कष्ट भोगना पड़ता है ।

अब तिल संख्या नंबर 3 के बारे में जानते हैं ये तिल शनि रेखा के मध्य में पाया जाता है, इस तिल से संबंधित जवाबी तिल भी पाया जाता है और इस जवाबी तिल के पाए जाने का स्थान पेट में मध्य भाग में मौजूद होना कहा गया है।

ये तीसरे नंबर का पाया जाने वाला तिल चाहे लाल रंग का हो चाहे काले रंग का पुरुष और औरत को एक जैसा प्रभाव देता है इस तिल के मौजूद होने पर ऐसा पुरुष या स्त्री डरपोक प्रवृति के होते हैं।

अब तिल संख्या नंबर चार व पांच के बारे में जानने का प्रयास करते हैं, ये चार नंबर वाला दिल शनि रेखा के बाए तरफ़ के हिस्से में स्थित होता है और इस तिल का भी जवाबी तिल पीठ के की बाईं तरफ़ पाया जाता है, ये चौथे नंबर का तिल चाहे लाल रंग में पाया जाए चाहे काले रंग में, ये तिल पुरुष और स्त्री दोनों पर एक समान असर देने वाला कहा गया है, ऐसे तिल वाला पुरुष या स्त्री यात्रा से प्रेम करने वाला होता है, और ये प्राय: देखने में आया है कि ऐसा व्यक्ति लंबी लंबी यात्राएं करता है ।

बाकि के तिलों के बारे में जानने के लिए हमारे साथ बने रहें

समय के गर्भ में बहुत सी विधाएं छुपी हुई हैं और हैं और भारत के इतिहास में इनकी बहुतायत पाई जाती है। हमारे भारतीय ऋषि-मुनि...
30/03/2022

समय के गर्भ में बहुत सी विधाएं छुपी हुई हैं और हैं और भारत के इतिहास में इनकी बहुतायत पाई जाती है। हमारे भारतीय ऋषि-मुनियों ने अपने अद्भुत ज्ञान के बल पर बहुत सी विधाओं पर बड़े विस्तार से इन सूत्रों को एक लयबद्ध माला के रूप में पिरो कर ग्रन्थों के रूप में सदा के लिए आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए स्थापित करके अपनी उस अथाह सोच को जन कल्याण के लिए परिभाषित भी किया है, जो जनकल्याण के लिए सदा तत्पर रहती है।

इन्ही विधाओं में से एक विधा है शरीर लक्षण
यानि आप के आपके शरीर पर मौजूद निशान, आपके हाव-भाव, भाव-भंगिमा, चाल-ढाल, चेहरे पर बालों को रखने या दिखाने का ढंग, तिल, मस्सा, ललाट पर लकीरें इत्यादि के विषय में बड़ी संजीदगी से लिखा गया है। आज इन्ही में से एक तिल चिन्ह पर आज की पोस्ट में बताने का प्रयास किया जा रहा है।

किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर पाए जाने वाले तिल पर विचार करके उसके बारे में बताया जा सकता है। चेहरे पर अलग-अलग स्थानों पर 100 के करीब तिलों के बारे में हमारे प्राचीन ग्रन्थों में बताया गया है।

सबसे पहले हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि तिल के कितने रूप होते हैं तिल दो प्रकार के कहे गए हैं।

एक शहद के समान लाल रंग वाले तिल

दूसरा वह काले काले रंग वाले तिल

आमतौर पर इंसान के चेहरे पर बाजू पर पीठ पर टांगों पर पेट पर शरीर के अन्य कई हिस्सों में पाए जाते हैं।

शहद के समान लाल रंग वाले तिल पर व्यक्ति को शुभ अवसर देने वाले माने गए हैं व काले रंग काले रंग के तिल किसी भी व्यक्ति को अशुभ असर देने वाले माने गए हैं। यह तिल चिन्ह किसी भी व्यक्ति के शरीर पर विभिन्न ग्रहों के प्रभाव के कारण ही प्रकट होते हैं। रंग के अतिरिक्त भी तिल के दो प्रकार मुख्य तौर पर हमारे भारतीय ऋषियों-मुनियों द्वारा बताए गए हैं ।
एक उत्तर वाले तिल और दूसरे बिना उत्तर वाले तिल उत्तर वाले तिल

अब इन दोनों प्रकार के तिलों को समझने का प्रयास करते हैं उत्तर प्रकार वाले तेल मुख के यानी कि इंसान के चेहरे पर जिस स्थान पर होते हैं, ठीक वैसा ही तिल व्यक्ति के शरीर के किसी अन्य अंग विशेष पर भी होता है या मौजूद पाया जाता है। बिना उत्तर वाले तिल शरीर के किसी भी भाग में हो सकते हैं और उनका कोई उत्तर वाला तिल शरीर के किसी अन्य भाग पर नहीं होता

तिलों के फल के संबंध में प्राचीन विद्वानों ने अलग अलग हो चुकी चुकी हो चुकी चुकी हैं यहां पर उन दोनों मतों को बताने का समझाने का प्रयास किया जा रहा है|

भारतीय मत के अनुसार मनुष्य के ललाट पर यानि चेहरे पर शनि की गुरु की मंगल की सूर्य की शुक्र की बुध तथा चंद्र की रेखाएं कही गई हैं इनमें से प्रत्येक रेखा पर पांच-पांच तिल माने गए हैं जिन का शुभ फल उनकी स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकता है या होता है जिन लोगों के चेहरे पर यानि ललाट में 7 रेखाएं रेखाएं स्पष्ट ना हो तो उनके ललाट पर स्थित तिलों पर विचार करते समय आप चित्र के अनुसार इन 7 रेखाओं की कल्पना करके इस चित्र में बताएं अनुसार ही किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मौजूद तिल वाले स्थान को निश्चित करके उसके प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त
करके ही फलादेश कर सकते हैं|

ललाट की रेखाओं के अतिरिक्त व्यक्ति के चेहरे पर दाएं और बाएं कपोल पर नेत्र पर नासिका पर कान पर मुख आदि स्थानों पर दिखाई कुछ दिल दिखाई देते हैं तो इस प्रकार चेहरे पर दिखाई देने वाले कुल तिलों की संख्या लगभग तकरीबन 100 मानी मानी गई है यहां पर आपको यह बता देना जरूरी समझा जा रहा है कि यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर इस चित्र में दिखाए गये तिलों के अनुसार सभी तिल ही मौजूद हों, बहुत से व्यक्ति के चेहरे पर एक भी तिल
नहीं पाया जाता और कुछ लोगों के चेहरे पर दो या तीन या चार या पांच की संख्या में तिल पाए जाते हैं|

चेहरे के तिलों का भाव यह नहीं है कि व्यक्ति के चेहरे पर हर जगह तिल पाया जाएगा इन 100 तिलों को चेहरे पर कहाँ कहाँ पर पाया जा सकता है वैसे ही चित्र में आपको दिखाने का प्रयास किया जा रहा है चेहरे पर पाए जाने वाले 100 तिलों के निशान आपको इस चित्र में दिखाए गए हैं

अगली पोस्ट में आपको चेहरे पर पाए जाने वाले तिलों के अलग अलग प्रभाव के बारे में बताने का प्रयास किया जायेगा

27/03/2022

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