12/09/2026
ये रामपाल की किताब "जीने की राह" में पेज नंबर 37 पर लिखा हुआ है।और ये सोच 100% गलत, घटिया और समाज को पीछे ले जाने वाली है।
1. ये वेद विरुद्ध बात है
रामपाल कहता हैं वेदों की बात करता हूँ, पर वेद तो इसके उलटा कहता है।
वेदों में स्त्री के श्रृंगार को अपशगुन नहीं, शुभ माना है।
ऋग्वेद कहता है - स्त्री ही घर की शोभा है। अथर्ववेद में नववधू के सोलह श्रृंगार को समृद्धि और लक्ष्मी का प्रतीक कहा है।
अगर सजना पाप होता तो माता सीता, माता राधा श्रृंगार क्यों करतीं?
शास्त्रों में कहा है - "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः" - जहाँ नारी का सम्मान होता है वहीं देवता बसते हैं। जहाँ नारी के कपड़ों से उसकी नियत तय हो, वहाँ देवता तो क्या, इंसानियत भी नहीं बसती।
2. ये मानसिकता आदर्श नहीं, बीमार मानसिकता है
लिखा है - "उनका उद्देश्य स्पष्ट है कि अपने पति के अतिरिक्त अन्य पुरुषों को आकर्षित करना।"
मतलब लेखक खुद ही हर औरत के मन की बात जान गया? ये कौन सा दिव्य ज्ञान है?
ये वही गंदी सोच है जो कहती है कि अगर लड़की के साथ कुछ गलत हुआ तो उसके कपड़ों की वजह से हुआ।
एक पुरुष अगर अच्छा दिखने के लिए जिम जाता है, बढ़िया शर्ट पहनता है, परफ्यूम लगाता है, तो क्या वो भी सारी औरतों को आकर्षित करने के लिए करता है? नहीं। उसे अच्छा लगता है इसलिए करता है। वही अधिकार औरत को क्यों नहीं?
श्रृंगार का मतलब आत्मविश्वास है, चरित्रहीनता नहीं।
3. ये बहू-बेटी वाली परिभाषा ही गुलाम बनाने वाली है
"अच्छी बहू-बेटी के लक्षण नहीं हैं" - अच्छी बहू-बेटी की परिभाषा कौन तय करेगा? जो घर में कैद रहे, सजना बंद कर दे, गली में निकलना बंद कर दे वही अच्छी?
एक अच्छी बहू-बेटी वो है जो पढ़ती-लिखती है, कमाती है, घर संभालती है, सच बोलती है।
उसके कपड़ों से उसके संस्कार नहीं, लिखने वाले के संस्कार पता चलते हैं।
4. इस किताब में ऐसी ही और भी बातें हैं
जीने की राह में यही नहीं, ऐसी बहुत सी बातें लिखी हैं जो आज के कानून और संविधान के खिलाफ हैं। जो किताब औरत को ये सिखाए कि तू सजेगी तो तेरा मन दोषी है, वो जीने की राह नहीं, जीने पर रोक है।
धर्म वो है जो आपको स्वतंत्र बनाए, डराए नहीं। जो ग्रंथ आपको ये सिखाए कि आधी आबादी पर शक करो, वो धर्म ग्रंथ नहीं हो सकता, वो बस एक आदमी की अपनी कुंठा है जो किताब बनकर बिक रही है।
इसलिए इस पन्ने को फाड़ कर फेंक दो, ये ज्ञान नहीं, अज्ञान है। सभ्य समाज में ये किताब जीने की राह नहीं बल्कि मरने की राह हैं।
रामपाल अव्वल दर्जे का कुंठित व्यक्ति है जिसके स्त्री समाज के प्रति बहुत ही निकृष्ट सोच है।
#अज्ञानी_रामपाल #ॐ
Mahent Shukrai Nath Yogi कर्म से ब्राह्मण अमन Mamta Saran
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