Shri chaitanya gaudiya math, guwahati

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द्वापरयुगीन प्राचीन दिव्य मंदिर " श्री पूंछरी का लौठा "  गिरिराज परिक्रमा , श्रीधाम गोवर्धन के आज के दिव्य दर्शन ।______...
23/04/2022

द्वापरयुगीन प्राचीन दिव्य मंदिर
" श्री पूंछरी का लौठा "
गिरिराज परिक्रमा , श्रीधाम गोवर्धन के आज के दिव्य दर्शन ।
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श्रीकृष्ण के श्रीलौठा जी नाम के एक मित्र थे । प्रभु श्रीकृष्ण ने द्वारिका जाते समय श्रीलौठा जी को अपने साथ चलने का अनुरोध किया । इसपर लौठाजी बोले- हे प्रिय मित्र ! मुझे ब्रज त्यागने की कोई इच्छा नहीं हैं । परन्तु तुम्हारे ब्रज त्यागने का मुझे अत्यन्त दु:ख हैं। अत: तुम्हारे पुन: ब्रजागमन होने तक मैं अन्न-जल छोड़कर प्राणों का त्याग यही कर दूंगा । जब तू यहाँ लौट आवेगा, तब मेरा नाम लौठा सार्थक होगा ।

श्रीकृष्ण ने कहा- सखा ! ठीक है मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि बिना अन्न-जल के तुम स्वस्थ और जीवित रहोगे। तभी से श्रीलौठाजी पूंछरी गांव में बिना खाये-पिये तपस्या कर रहे हैं ।

धनि-धनि पूंछरी के लौठा ,,
अन्न खाय न पानी पीवै ऐसेई पड़ौ सिलौठा ||

उन्हें विश्वास है कि श्रीकृष्णजी अवश्य यहाँ लौट कर आवेंगे । क्योंकि श्रीकृष्णजी स्वयं वचन दे गये हैं । इसलिये इस स्थान पर श्रीलौठाजी का मन्दिर प्रतिष्ठित है । श्री गोवर्धन का आकार एक मोर के सदृश है। श्रीराधाकुंड उनके जिहवा एवं कृष्ण कुण्ड चिवुक हैं । ललिता कुण्ड ललाट है । पूंछरी नाचते हुए मोर के पंखों-पूंछ के स्थान पर हैं । इसलिये इस गांव का नाम पूछँरी प्रसिद्ध हैं ।

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इसका दूसरा कारण यह है, कि श्रीगिरिराजजी की आकृति गौरुप है । आकृति में भी श्रीराधाकुण्ड उनके जिहवा एवं ललिताकुण्ड ललाट हैं एवं पूंछ पूंछरी में हैं । इस कारण से भी इस गांव का नाम पूँछरी कहते हैं । इस स्थान पर श्रीगिरिराजजी के चरण विराजित हैं । पूंछरी के लौठा की ऐसी भी एक पौराणिक मान्यता है कि जब सभी गोप गोपियाँ गोवर्धन की परिक्रमा नाचते गाते कर रहे थे , तभी एक मोटे तगडे गोप वही गिर गए , तभी पीछे से एक सखी ने कहा ... अरे सखी पूछ री कौ लौठा , अर्थात “कौन लुढक गया” इसलिए भी इसे पूंछरी का लौठा कहते है।

बृज की पौराणिक मान्यता है कि पूंछरी के लौठा के दर्शन किए बिना श्री गिरिराज जी की परिक्रमा का पूर्ण पुण्य प्राप्त नहीं होता । अतः श्री गिरिराज जी की परिक्रमा करते समय श्री पूंछरी के लौठा के दर्शन भी अवश्य ही करने चाहिए ।

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बृज रसिक पवन बृजवासी
Shri Dham Vrindavan
9058 000 701

श्री अभिराम ठाकुर जी की तिरोभाव  तिथि पर विशेष:🌼यह श्री नित्यानन्द जी के प्राण, द्वादश गोपालों में से एक 'श्रीदाम' सखा ह...
23/04/2022

श्री अभिराम ठाकुर जी की तिरोभाव तिथि पर विशेष:

🌼यह श्री नित्यानन्द जी के प्राण, द्वादश गोपालों में से एक 'श्रीदाम' सखा हैं।

🌼इनका श्रीपाट कृष्ण नगर में है, इनके निवास स्थान पर एक जो मन्दिर है, उस मन्दिर के द्वार पर एक बकुल का वृक्ष है। वह स्थान सिद्ध बकुलकुंज के नाम से जाना जाता है।

🌼श्री अभिराम ठाकुर जी का बहुत तेज प्रताप है, जिनको देखकर दुर्जन और पाखंडी सदा कांपते थे।

🌼ये नित्यानन्द जी के आवेश में सदा उन्मत रहते हैं, जिनकी मनोहर कृपा से सारा जगत परिचित है।

🌼श्री अभिराम ठाकुर जी का एक अद्भुत जयमंगल चाबुक था। इस चाबुक के द्वारा वे जिसको भी मारते थे, वही प्रेम में उन्मत हो जाता था।

🌼वे सर्वशास्त्रों के ज्ञाता व परम मनोहर थे। नृत्य, गीत और वाद्यों के बजाने में वह उपमा रहित विशारद थे।

🌼चैत्र कृष्णा-सप्तमी तिथि में अभिराम ठाकुर जी का तिरोभाव हुआ था, इसलिए इस तिथि में कृष्णनगर के महोत्सव में बहुत से लोगों का समागम होता है।

🙏🏻श्री अभिराम ठाकुर जी की जय🙏🏻

22/04/2022

​​​​​​​श्री चैतन्य गौड़ीय मठ की शाखाएं न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी हैं। श्री चैतन्य गौड़ीय मठ की ओर से सनातन .....

Today's Darshan...🙏🙏😇😇❤❤❤❤❤
22/04/2022

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🌷 श्रील प्रभुपाद उपदेशामृतसिंधु बिंदु 🌷प्रश्न - क्या भक्ति कलियुग का धर्म है ?उत्तर– कलियुग का ही क्यों , सार्वकालिक , स...
21/04/2022

🌷 श्रील प्रभुपाद उपदेशामृतसिंधु बिंदु 🌷

प्रश्न - क्या भक्ति कलियुग का धर्म है ?

उत्तर– कलियुग का ही क्यों , सार्वकालिक , सार्वत्रिक एवं सार्वजनीन धर्म ही भक्ति है । कर्म , ज्ञान और योगादि नैमित्तिक प्रस्तावित धर्ममात्र हैं । वह जीव की सहज वृत्ति नहीं है । भक्ति ही मुक्तपुरूषों का एकमात्र नित्य धर्म है और बद्धजीव अनर्थग्रस्त होकर जिन समस्त धर्म का पालन करते हैं , वे कर्म , ज्ञान , योग , तप एवं व्रत हैं ।

जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी ठाकुर 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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