25/10/2026
🌼🌿 ज्ञान-योगयुक्त ईश्वर की भक्ति करो 🌿🌼
परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी:
हम बचपन से ईश्वर का नाम लेते हैं, लेकिन क्या हमने कभी यह जानने का प्रयास किया कि ईश्वर का वास्तविक स्वरूप क्या है और उसे कैसे जाना जा सकता है?
जिस प्रकार किसी वस्तु की पहचान उसके अनुकूल साधन से होती है, उसी प्रकार परमात्मा की पहचान केवल बाहरी इन्द्रियों से नहीं हो सकती। इसके लिए अपने चेतन स्वरूप को जानना और सद्गुरु से प्राप्त योगयुक्ति के अनुसार साधना करना आवश्यक है।
सच्ची भक्ति केवल विश्वास या शब्दों तक सीमित नहीं है। भक्ति में भक्त, भगवान और भक्ति—तीनों का संबंध है। सेवा में सेवक, सेव्य और सेवा का भाव है। जब साधना के द्वारा जीव परमात्मा से मिलने की दिशा में बढ़ता है, तभी भक्ति अपने वास्तविक उद्देश्य की ओर ले जाती है।
ईश्वर को जानने चलो, मन को करो पवित्र।
सद्गुरु की युक्ति से खुले, अंतर का शुभ चित्र॥
ईश्वर की प्राप्ति के लिए मन को निर्मल बनाना, सद्गुरु के मार्गदर्शन में साधना करना और अपने वास्तविक स्वरूप को जानने का प्रयास करना आवश्यक है।
ईश्वर का नाम जानना और ईश्वर को जानना अलग-अलग बातें हैं। सच्ची भक्ति में श्रद्धा के साथ सही ज्ञान, सदाचार और नियमित साधना का समन्वय होना चाहिए।
🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर
❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖
— Shivendra Mehta
🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏
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