Shivendra Mehta

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Shivendra Mehta जब मन अशांत हो और भीतर रिक्तता महसूस हो, तब अध्यात्म अनिवार्य हो जाता है।
Spirituality beyond religion — a journey towards inner peace, balance & truth.

🌼🌿 ज्ञान-योगयुक्त ईश्वर की भक्ति करो 🌿🌼परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी:हम बचपन से ईश्वर का ...
25/10/2026

🌼🌿 ज्ञान-योगयुक्त ईश्वर की भक्ति करो 🌿🌼
परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी:

हम बचपन से ईश्वर का नाम लेते हैं, लेकिन क्या हमने कभी यह जानने का प्रयास किया कि ईश्वर का वास्तविक स्वरूप क्या है और उसे कैसे जाना जा सकता है?

जिस प्रकार किसी वस्तु की पहचान उसके अनुकूल साधन से होती है, उसी प्रकार परमात्मा की पहचान केवल बाहरी इन्द्रियों से नहीं हो सकती। इसके लिए अपने चेतन स्वरूप को जानना और सद्गुरु से प्राप्त योगयुक्ति के अनुसार साधना करना आवश्यक है।

सच्ची भक्ति केवल विश्वास या शब्दों तक सीमित नहीं है। भक्ति में भक्त, भगवान और भक्ति—तीनों का संबंध है। सेवा में सेवक, सेव्य और सेवा का भाव है। जब साधना के द्वारा जीव परमात्मा से मिलने की दिशा में बढ़ता है, तभी भक्ति अपने वास्तविक उद्देश्य की ओर ले जाती है।

ईश्वर को जानने चलो, मन को करो पवित्र।
सद्गुरु की युक्ति से खुले, अंतर का शुभ चित्र॥

ईश्वर की प्राप्ति के लिए मन को निर्मल बनाना, सद्गुरु के मार्गदर्शन में साधना करना और अपने वास्तविक स्वरूप को जानने का प्रयास करना आवश्यक है।

ईश्वर का नाम जानना और ईश्वर को जानना अलग-अलग बातें हैं। सच्ची भक्ति में श्रद्धा के साथ सही ज्ञान, सदाचार और नियमित साधना का समन्वय होना चाहिए।

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

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🌼🌿 मन की देखभाल भी जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।हमें अपने शरीर और संसार की देखभाल के साथ अपने मन की भी द...
24/10/2026

🌼🌿 मन की देखभाल भी जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।

हमें अपने शरीर और संसार की देखभाल के साथ अपने मन की भी देखभाल करनी पड़ती है। मन बड़ा नाटकबाज है—कभी छोटी-सी बात को पहाड़ बना देता है, कभी उचित को अनुचित और अनुचित को उचित ठहराने लगता है। कभी बीती बातों में उलझाता है, तो कभी भविष्य की आशंकाओं से भयभीत करता है।

यदि मन को विवेक का मार्गदर्शन न मिले, तो वह हमें ऐसे विचारों और इच्छाओं के पीछे दौड़ा सकता है, जिनका परिणाम बाद में पछतावा बनता है। इसलिए मन में उठने वाली हर बात को सच मान लेना बुद्धिमानी नहीं; उसे विवेक की कसौटी पर परखना आवश्यक है।

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की शिक्षा है कि सदाचार, संयम और नियमित साधना के द्वारा मन को निर्मल एवं स्थिर बनाने का प्रयास करना चाहिए।

दोहा—
मन की हर लहर पर मत कर, अपने विवेक का त्याग।
संयम से जो मन रखे, जीवन में हो अनुराग॥

गूढ़ बात यह है कि मन हमारा साधन बने, स्वामी नहीं। मन में विचार उठना स्वाभाविक है, लेकिन हर विचार के अनुसार चलना आवश्यक नहीं। मन को दबाने से अधिक जरूरी है उसे समझना, उसकी प्रवृत्तियों को पहचानना और विवेकपूर्वक सही दिशा देना।

याद रखिए, जिसने अपने मन को समझना और सँभालना सीख लिया, उसने जीवन की अनेक उलझनों को सुलझाने की कुंजी पा ली।
Shivendra Kumar Mehta

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24/10/2026

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24/10/2026
🌼🌿 मन की शांति का रहस्य—बीते कल को स्वीकारें, आने वाले कल के लिए सजग रहें और आज को पूरी तरह जिएँ।मनुष्य का बहुत-सा दुःख ...
23/10/2026

🌼🌿 मन की शांति का रहस्य—बीते कल को स्वीकारें, आने वाले कल के लिए सजग रहें और आज को पूरी तरह जिएँ।

मनुष्य का बहुत-सा दुःख परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उन विचारों से पैदा होता है जिनमें वह बार-बार उलझा रहता है। बीती हुई घटनाओं को बदलने की चिंता और भविष्य में अनहोनी की आशंका वर्तमान की शांति छीन लेती है।

अतीत अनुभव है, उससे सीखिए; भविष्य संभावना है, उसके लिए प्रयास कीजिए—लेकिन दोनों के कारण वर्तमान को व्यर्थ मत गँवाइए। जो बीत गया, उसे विवेक से स्वीकारना और जो सामने है, उसे धैर्य से निभाना ही जीवन जीने की कला है।

सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की शिक्षा है कि मन को बाहरी विषयों में भटकने देने के बजाय सदाचार, संयम और नियमित साधना से अंतर्मुखी बनाना चाहिए। मन की स्थिरता ही सच्ची शांति की दिशा खोलती है।

दोहा—
बीते से शिक्षा ग्रहण, आगे का कर ध्यान।
वर्तमान में स्थिर रह, यही शांति की खान॥

गूढ़ बात तो यह है कि शांति का अर्थ समस्याओं का समाप्त हो जाना नहीं, बल्कि समस्याओं के बीच भी विवेक और धैर्य बनाए रखना है। समय को हम रोक नहीं सकते, पर अपने मन को व्यर्थ की चिंता में बहने से बचा सकते हैं।

इसलिए अतीत पर पछताने के बजाय सीखें, भविष्य से डरने के बजाय तैयारी करें और वर्तमान में अपने कर्तव्य निभाते हुए मन की शांति सँभालें। जीवन कल में नहीं, आज में है—और शांति इसी क्षण से आरंभ होती है।

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

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— Shivendra Mehta

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