Shivendra

Shivendra जब मन अशांत हो और भीतर रिक्तता महसूस हो, तब अध्यात्म अनिवार्य हो जाता है।
Spirituality beyond religion — a journey towards inner peace, balance & truth.

18/05/2026

🌼🌿 धर्म से ही सच्चा वैराग्य होता है। 🌿🌼परमाराध्य संत सद्गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि मनुष्य-जीवन...
18/05/2026

🌼🌿 धर्म से ही सच्चा वैराग्य होता है। 🌿🌼

परमाराध्य संत सद्गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि मनुष्य-जीवन केवल खाने, कमाने और विषय-भोग में डूबे रहने के लिए नहीं मिला है। यह शरीर ईश्वर-प्राप्ति, आत्मकल्याण और भवसागर से पार होने का दुर्लभ साधन है।

संसार में जितना भी मोह, माया, लोभ, क्रोध और आसक्ति दिखाई देती है, उसका कारण धर्म से दूर होना है। जब मनुष्य सत्संग नहीं करता, संतों की वाणी नहीं सुनता और ध्यान-भजन में मन नहीं लगाता, तब उसका मन विषयों में फँस जाता है। विषयों में फँसा मन कभी शांति नहीं पाता।

गुरुदेव कहते हैं—
“ज्ञान से मुक्ति, योग से ज्ञान और धर्म से वैराग्य होता है।”

धर्म का अर्थ केवल बाहरी चिह्न या आडंबर नहीं है। सच्चा धर्म वह है, जो मनुष्य के भीतर विवेक, दया, सत्य, संयम और ईश्वर-प्रेम जगाए। जब धर्म हृदय में उतरता है, तब मनुष्य की आसक्ति धीरे-धीरे संसार से हटकर परमात्मा की ओर होने लगती है। यही वैराग्य है।

वैराग्य का अर्थ घर-परिवार छोड़ देना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए भी मन को संसार की माया में न डुबोना है। जैसे कमल जल में रहकर भी जल से ऊपर रहता है, वैसे ही धर्मयुक्त मनुष्य संसार में रहकर भी भीतर से परमात्मा में स्थित रहता है।

गुरुदेव की वाणी हमें प्रेरित करती है कि नित्य सत्संग करें, नाम-जप करें, ध्यानाभ्यास करें और अपने जीवन को पवित्र बनाएं। क्योंकि बिना धर्म के वैराग्य नहीं, बिना वैराग्य के ज्ञान नहीं और बिना ज्ञान के आत्मकल्याण संभव नहीं।

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏


#महर्षिमेहीं #संतमत #सत्संग #वैराग्य #भजन #ध्यान

18/05/2026
🌼🌿 सच्चा ज्ञानी वही है जो कटुता में भी करुणा बनाए रखे 🌿🌼दुनिया में ऐसे लोग बहुत मिल जाएंगेजो सम्मान मिलने पर प्रेम दिखात...
17/05/2026

🌼🌿 सच्चा ज्ञानी वही है जो कटुता में भी करुणा बनाए रखे 🌿🌼

दुनिया में ऐसे लोग बहुत मिल जाएंगे
जो सम्मान मिलने पर प्रेम दिखाते हैं,
लेकिन वास्तव में महान वही होता है
जो अपमान मिलने पर भी
अपने संस्कार, धैर्य और शुभभावना को नहीं छोड़ता।

अपमान का उत्तर अपमान से देना आसान है,
परंतु मौन, क्षमा और आशीर्वाद से उत्तर देना
उच्च आत्मबल और गहरी आध्यात्मिकता का परिचय है।

जिस व्यक्ति का मन भीतर से शांत होता है,
उसे दूसरों के कटु शब्द, कार्य विचलित नहीं करते।
वह जानता है कि —
दूसरों का व्यवहार उनके संस्कार बताते हैं,
और हमारी प्रतिक्रिया हमारे संस्कार।

दोहा ✨
अपमानों की आग में, जो धैर्य दीप जलाय।
वही पुरुष ज्ञानी बने, जग उसको सिर नवाय।।

कटु वचन सुनकर भी जो, दे आशीष महान।
उसके निर्मल हृदय में, बसते हैं भगवान।।

जीवन में हर परिस्थिति
हमें यह अवसर देती है कि
हम अपने भीतर के क्रोध को बढ़ाएँ या अपनी चेतना को ऊँचा उठाएँ।

🍁 इसलिए —
यदि कोई आपका अपमान करे,
आपके विपरीत कार्य करे,
तो पहले स्वयं को संभालिए।
क्योंकि प्रतिक्रिया क्षणिक होती है,
लेकिन संस्कार जीवनभर का पहचान बनते हैं।
🌿 OneTruth
-Shivendra Mehta


#सुविचार #ज्ञान #संस्कार #आत्मिकशांति #जीवनज्ञान #संतमत #प्रेरणा #धैर्य

🌺 आज परम श्रद्धेय परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के महापरिनिर्वाण दिवस पर कोटि-कोटि श्रद्धा-सुमन अ...
17/05/2026

🌺 आज परम श्रद्धेय परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के महापरिनिर्वाण दिवस पर कोटि-कोटि श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं। 🌺

सद्गुरुदेव का दिव्य जीवन केवल एक संत का जीवन नहीं था, बल्कि मानवता को अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला एक युग-प्रकाश था।
उन्होंने अपने तप, त्याग, साधना और अमृतमयी वाणी से करोड़ों जीवों को भक्ति, ध्यान, सत्य, अहिंसा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया।

महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज ने सिखाया कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है। संसार क्षणभंगुर है, पर आत्मा अमर है। इसलिए नाम-सुमिरन, ध्यान और सत्संग के द्वारा आत्मा को उसके मूल स्वरूप तक पहुँचाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।

आज भले ही सद्गुरुदेव का स्थूल शरीर हमारे बीच नहीं है, किन्तु उनकी वाणी, उनका उपदेश, उनका प्रेम और उनकी आध्यात्मिक चेतना आज भी लाखों साधकों के हृदय में जीवित है और सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी।

🙏 इस पावन महापरिनिर्वाण दिवस पर आइए, हम सभी उनके बताए मार्ग पर चलने, अपने जीवन को पवित्र बनाने और मानवता, प्रेम, सेवा एवं साधना को अपनाने का संकल्प लें।

“गुरु शरीर से दूर हो सकते हैं,
किन्तु उनके उपदेश और कृपा कभी दूर नहीं होते।”

🌼 शत-शत नमन!
🌼 कोटि-कोटि प्रणाम!
- शिवेन्द्र कुमार मेहता, गुरुग्राम

🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏


#महर्षिमेहीं #महापरिनिर्वाणदिवस #सद्गुरु #महर्षिमेहींपरमहंस #संतमत #सत्संग #भजन #आत्मज्ञान #गुरुकृपा

🌼🌿 कोई भी व्यक्ति आपका उतना ही नुकसान कर सकता है,जितना आप अपनी कमजोरियों, असावधानियों और नकारात्मकताओं के लिए स्थान छोड़...
16/05/2026

🌼🌿 कोई भी व्यक्ति आपका उतना ही नुकसान कर सकता है,
जितना आप अपनी कमजोरियों, असावधानियों और नकारात्मकताओं के लिए स्थान छोड़ देते हैं। 🌿🌼

जीवन में बाहरी शत्रु से अधिक खतरनाक भीतर की कमजोरी होती है।

संतों ने कहा है कि मजबूत दीवारों वाले घर में आँधी का प्रभाव कम होता है।
ठीक वैसे ही, जिसका मन सत्य, धैर्य, विवेक और आत्मबल से दृढ़ हो जाता है, उसे परिस्थितियाँ आसानी से तोड़ नहीं पातीं।

इसका अर्थ यह नहीं कि संसार में बुरे लोग नहीं हैं,
बल्कि यह कि सजगता, समझदारी और आत्मबल से हम बहुत-से नुकसान से स्वयं को बचा सकते हैं।

✨ इसलिए दूसरों को दोष देने से अधिक आवश्यक है—
अपने भीतर शक्ति, विवेक और संयम का निर्माण करना।
क्योंकि जब भीतर प्रकाश जागता है,
तो बाहर का अंधकार स्वतः कमजोर पड़ जाता है।

दोहा —
“मन यदि दृढ़, विवेकमय, टूटे नहीं विचार।
तूफानों की क्या बिसात, कि दिखाए हार॥”


#जीवन #आत्मबल #संतमत #प्रेरणा #विवेक #सकारात्मकता

🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की अमृतवाणी 🌺मनुष्य जीवन केवल विषय-भोग, धन-संग्रह और संसार की दौड...
16/05/2026

🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की अमृतवाणी 🌺

मनुष्य जीवन केवल विषय-भोग, धन-संग्रह और संसार की दौड़ में खो जाने के लिए नहीं मिला है। यह दुर्लभ मानव देह आत्मकल्याण, भजन और परमात्मा की प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन है।
सद्गुरुदेव महाराज समझाते हैं कि संसार के असंख्य शब्दों, आकर्षणों और विषयों में उलझा मन कभी शांति नहीं पा सकता। इसलिए अनेक को छोड़कर “एक” को पकड़ो — उस नाम को, उस शब्द को, जो आत्मा को परमात्मा की ओर खींच ले जाए।

रामनाम, शिवनाम, कृष्णनाम — नाम अनेक हो सकते हैं, पर लक्ष्य एक ही है — परमात्मा।
जब मन संसार से हटकर ईश्वर-स्मरण में लगने लगता है, तब भीतर की अशांति शांत होने लगती है और आत्मा को सच्चे आनंद का अनुभव होने लगता है।

संतमत का यही सार है—
“तन काम में, मन राम में।”
अर्थात् संसार के आवश्यक कार्य करते हुए भी भीतर प्रभु-स्मरण निरंतर चलता रहे। यही सच्चा मानस-ध्यान है, यही जीवन को सफल बनाने का मार्ग है।

सद्गुरुदेव महाराज कहते हैं कि पाँच विषयों के आकर्षण से ऊपर उठकर नाम-जप, दृष्टियोग और नादानुसंधान का अभ्यास करो। यही साधना जीव को भवसागर से पार कर सकती है।

✨ जब मन ईश्वर के नाम में रम जाता है, तब संसार के दुःख, भय और मोह स्वतः कमजोर पड़ने लगते हैं।
✨ भजन केवल शब्द नहीं, आत्मा की यात्रा है।
✨ जिसने भीतर के “शब्द” को पकड़ लिया, उसने जीवन का सच्चा सहारा पा लिया।

🙏 प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन कुछ समय भजन, सुमिरन और आत्मचिंतन के लिए निकालना चाहिए और इस दुर्लभ मानव जीवन को सफल बनाना चाहिए। यही प्रार्थना है हमारी।🙏

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏


#महर्षिमेहीं #संतमत #महर्षिमेहींपरमहंस #भजन #सुमिरन #रामनाम #आत्मज्ञान #सत्संग #मानसध्यान

15/05/2026

Address

DLF City
Gurugram
122009

Telephone

+911244066612

Website

http://www.facebook.com/DeliteLuxuryHomes, http://www.deliteproperties.in/

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shivendra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Shivendra:

Share