30/03/2026
नीतीश कुमार अब मुख्य मंत्री कैसे हैं ?
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सुबह मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने MLC से इस्तीफा दिया. शाम से दिल्ली में सवाल तैरने लगा, नीतीश कुमार अब मुख्य मंत्री कैसे हैं ? संवैधानिक संकट की बात होने लगी. अब बात भारत के संविधान के आर्टिकल 164 की होने लगी.
निष्कर्ष ये कि अभी बड़ा झमेला होना तो नहीं चाहिए. लेकिन, नीतीश के इस्तीफे ने जिम्नास्टिक समस्या खड़ी कर दी है. ऐसा तो भारत का संविधान लिखने वालों ने भी नहीं सोचा होगा. बिहार में पहली बार हो रहा है.
अब संवैधानिक बहस को समझिए. भारत के संविधान का अनुच्छेद 164 कहता है, मुख्य मंत्री और मंत्री कोई भी भारतीय नागरिक उम्र सीमा की अहर्ता पूर्ण करने पर बन सकता है. फिर, शपथ के 6 महीने के भीतर उसे विधान सभा- विधान परिषद का सदस्य बनना होगा. ऐसा न होने पर, पद का त्याग करना होगा.
लेकिन, नीतीश कुमार के मामले में सब कुछ उल्टा हो गया. बिहार विधान परिषद के सदस्य होने के कारण वे मुख्य मंत्री थे. लेकिन, अब उन्होंने सदस्यता के इस पद को ही त्याग दिया. फिर, वे जिस सदन के सदस्य निर्वाचित हुए हैं, मतलब राज्य सभा, वहां के सदस्य राज्य में मुख्य मंत्री या मंत्री नहीं बन सकते.
तो, बहस इस बात को लेकर है कि जिस सदन का सदस्य होना तय समय सीमा में आवश्यक है, उसे ही त्याग आप मुख्य मंत्री कैसे हैं ? आपने परिषद की सदस्यता त्यागने के बाद मुख्य मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है. ऐसा करने पर राज्यपाल आपको तदर्थ व्यवस्था के तहत मुख्य मंत्री बने रहने को कह सकते थे. लेकिन, यह भी नहीं हुआ.
अब इस संवैधानिक बहस के बीच देश और बिहार के कानून के बड़े जानकारों का यह कहना है कि संविधान में ऐसी स्थिति का वर्णन नहीं है, क्योंकि यह कल्पना से परे था, इसलिए लाभ नीतीश कुमार को मिल सकता है.
लेकिन, पोलिटिकल पंडितों को मानना है कि अब नीतीश कुमार को अपने भविष्य का फैसला बहुत जल्द 10 अप्रैल के पहले लेना चाहिए. दो ही विकल्प हैं. पहला विकल्प, राज्य सभा की सदस्यता की शपथ के साथ नैतिक मूल्यों के तहत मुख्य मंत्री का पद तुरंत त्याग दें. और नहीं तो फिर दूसरा विकल्प ये कि राज्य सभा के निर्वाचन को ठुकराएं, शपथ के पहले या बाद में, आगे 6 महीने के भीतर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बन कर मुख्य मंत्री के रुप में बने रहें. बीच की स्थिति अब ठीक नहीं होगी.