19/12/2025
दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला अरावली आज गंभीर खतरे में है!
सुप्रीम कोर्ट की नई 100 मीटर ऊंचाई वाली परिभाषा के बाद अरावली का लगभग 90% हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर किया जा सकता है, यह फैसला नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है।अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं है, यही हमारी जल सुरक्षा, जैव विविधता और जलवायु संकट के खिलाफ सबसे मजबूत कवच है। इसे कमजोर करना मतलब सूखा, प्रदूषण और तबाही को खुला न्योता देना। अगर आज चुप रहे, तो कल पीने का पानी, साफ हवा और हरियाली सिर्फ याद बनकर रह जाएगी। अब समय है सरकार और सिस्टम से जवाब मांगने का अरावली बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा!...आवाज़ बुलंद करो, यह लड़ाई पर्यावरण की नहीं, अस्तित्व की है।
100 मीटर री नई परिभाषा रा नाम पर अरावली ने कागजां सूं मिटायो जावै है। राजस्थान री लगभगी 90% पहाड़ियां अब कानूनी सरंक्षण सूं बाहर हो जासी। इयां पहाड़ियां ही पानी रोके है, भूजल भरे है अर रेगिस्तान ने आगे बढ़ण सूं रोके है। इयो केवळ पर्यावरण रो सवाल कोनी, इयो आपां रा पानी, खेती अर आपां बालकां रा भविष्य रो सवाल है। यहां राजनीति छोड़ दो...पहले देश, हवा और पानी बचाओ देश बचेगा तो...राजनीति बाद में भी हो जाएगी, राजनीति करने के लिए बहुत समय है...अब चुप नहीं हल्ला बोलना पड़ेगा...अपने और अपनों के जीवन के लिए जमीन पर उतरना पड़ेगा|
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