19/07/2026
केवटी जलप्रपात और भैरव बाबा की कड़ाही
कल रीवा के केवटी जलप्रपात गया था। सावन में झरने की गर्जना और चारों ओर की हरियाली मन मोह लेती है, लेकिन वहां भैरव बाबा के मंदिर के पास एक दृश्य ने मेरा ध्यान खींच लिया - उमस भरी गर्मी में कई महिलाएं भारी साड़ियों में लकड़ी के चूल्हे पर पूड़ियां तल रही थीं। पता चला कि यह सदियों पुरानी "कड़ाही चढ़ाने" की परंपरा है। भैरव बाबा क्षेत्रपाल हैं - स्थान के रक्षक देवता। लोग उनसे मन्नत मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर पूरा परिवार मंदिर आकर वहीं ताजा पूड़ी-हलवा बनाकर भोग लगाता है, फिर वही प्रसाद सबमें बंटता है।
सोचने वाली बात यह है कि जो गर्मी हमें असहनीय लगती है, वह उनके लिए श्रद्धा का हिस्सा है। मन्नत की कड़ाही में पसीना और परिश्रम ही तो अर्पण की सच्चाई है - जैसे कांवड़िये नंगे पैर सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं। चेहरों पर थकान नहीं, मन्नत पूरी होने का संतोष और उत्सव की खुशी थी। शायद हम एसी वालों ने वह अनुभव खो दिया है जहां अर्थ से जुड़ा कठिन परिश्रम भी आनंद बन जाता है।
हर हर महादेव! जय भैरव बाबा!
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