24/04/2026
आजादी की जिंदगी जीने की फिराक में घर गांव छोड़ कर आए थे,
ए जिंदगी हम तेरे शहर में आकर गुलाम बन गए....पास में पैसे का होना जरूरी होता है,मालूम था मुझे....पर सबकुछ जरूरत पैसा ही होता है...बड़ा देर से समझ आया मुझे।।
पैसे का होना इतना जरूरी है ना मेरे भाई कि जैसे जीने के लिए सांसों का....अगर आपके पास पैसा होगा तो आपके पास सबकुछ होगा...प्यार,इज्जत,रिश्ते, शौहरत सबकुछ खरीदा जा सकता और सबकुछ बिकता भी है...प्यार को बिकते हुए और खरीदते हुए मैंने देखा है... रिश्तों की तो क्या ही बात करोगे यार...खून के रिश्तों को भी आपस में खून करते हुए देखा है इस इस दौलत के चक्कर में...इज्जत की बात करूं तो जब आपके पास किसी भी चीज की कमी ही नहीं होगी तो....हमें क्या फर्क पड़ता है कि कौन क्या करता है...अगर बात हम तक आई तो पूछ भी लेंगे कि हां भाई बता तुझे मुझसे क्या दिक्कत है... मैंने जब तेरा कुछ बुरा किया ही नहीं तो तू मेरे बारे में बुरा क्यों सोचता और बोलता है.... शौहरत की तो बात ही क्या यार वो तो बनी ही बिकने के लिए है।।