31/03/2026
साल 1857 के पवित्र रमज़ान माह के 16वें रोज़े के दिन 🌙, मुग़ल सम्राट बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र 👑 लाल क़िले के एक झरोखे में बैठे हुए क़ुरान की तिलावत 📖 कर रहे थे,
तभी अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के भारतीय सैनिक ⚔️ उनके पास पहुँचे और उन्हें हिंदुस्तान के बादशाह के रूप में अंग्रेज़ हुकूमत के खिलाफ बग़वात 🔥 का नेतृत्व करने गुज़ारिश की।
उन सैनिको की मुख्य शिकायत नई लॉन्च हुई एनफील्ड राइफल 🔫 थी।
राइफल के कारतूसों को ढक्कन को जिस कागज का बनाया गया था, उसके ख़ोल को सख्त बनाने के लिए उस पर चरबी 🧈 का लेप लगाया जाता था, ताकि परिवहन के दौरान वे फटे नहीं। लेकिन इसका मतलब यह भी था कि जब सैनिकों को उपयोग के लिए इसे फाड़ना पड़ता था, तो उन्हें अपने दांतो 😬 का इस्तेमाल करना पड़ता था।
कहा जाता है कि कारतूसों के यह खोल 🧾 गाय 🐄 और पिग 🐖 की चर्बी के बने होते थे, जो हिंदू 🕉️ और मुस्लिम ☪️ दोनों के लिए अपमानजनक था।
सैनिको ने गुहार लगाते हुए कहा 🙏 "हे बादशाह सलामत, महरबानी करके अपना हाथ हमारे सिर पर रखें और हमारे साथ इंसाफ़ करें ⚖️। अंग्रेज हुकूमत ने हमें गायों और पिग की चर्बी लगे कारतूस दांतों से काटने के लिए कहा था। उन्होंने हमारे, हिंदुओं और मुसलमानों के विश्वास को समान रूप से भ्रष्ट कर दिया है।"
इन सैनिकों में से अधिकांश हिंदू धर्म के थे 🕉️ और उन्होंने मुगल सम्राट की सहायता और आशीर्वाद के लिए मेरठ छावनी 🏇 से कूच किया था। वह लोग बहादुर शाह ज़फ़र को क्रांति का लीडर घोषित कर चुके थे 🚩।
बहादुर शाह ज़फ़र 👑 ने उन सैनिको की बात मानते हुए 1857 की क्रांति 🔥 की कमान संभाली और इसका उन्हें बहुत भयंकर अंजाम भी भुगतना पड़ा 😔। शायद ही इतनी बड़ी कुर्बानी किसी राजे रजवाड़े ने दी हो। गदर के बाद बहादुर को क़ैद कर रंगून ले जाया गया 🚢 जहां उनके दोनों बेटों के सर तन से जुदा ⚔️ करके उनके सामने थाल में सजा कर पेश कर दिये गए 😢 और यहीं बहादुर शाह ज़फ़र की मौत हुई 🪦।
जो बेवकूफ़ लोग कहते हैं मुगल भारत को लूट कर ले गए थे 🤔 उनको जाकर देखना चाहिए कि भारत की आज़ादी 🇮🇳 के लिए अपना सब कुछ लुटा कर एक बादशाह रंगून में दफ़्न है।
तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 🇮🇳 अखंड भारत के आखिरी बादशाह की क़ब्र पर ख़िराज ए अक़ीदत पेश करते हुए 🙏।
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