14/04/2026
बिहार में नीतीश राज खत्म, बीजेपी के सम्राट चौधरी नये सीएम....👇
लंबे इंतजार के बाद बिहार में बीजेपी को अपना मुख्यमंत्री बनाने में कामयाबी मिली. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बतौर सीएम बीजेपी के सम्राट चौधरी के नाम की घोषणा हो गई. बिहार में दो दशक बाद अंतत: नीतीश युग खत्म हुआ.
बिहार के इतिहास में पहली बार सत्ता की कमान बीजेपी को मिली है, जो कि अब तक छोटे साझेदार की भूमिका में थी. इसके उलट अब जेडीयू सहयोगी की भूमिका में होगी.
लंबे इंतजार के बाद बिहार में बीजेपी को अपना मुख्यमंत्री बनाने में कामयाबी मिली. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बतौर सीएम बीजेपी के सम्राट चौधरी के नाम की घोषणा हो गई. बिहार में दो दशक बाद अंतत: नीतीश युग खत्म हुआ.
बिहार के पटना में पिछली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर उपस्थित बीजेपी और जेडीयू के शीर्ष नेता
बिहार के इतिहास में पहली बार सत्ता की कमान बीजेपी को मिली है, जो कि अब तक छोटे साझेदार की भूमिका में थी. इसके उलट अब जेडीयू सहयोगी की भूमिका में होगी
पर्यवेक्षक बनाए गए केंद्रीय कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में बीजेपी विधानमंडल दल ने सम्राट चौधरी को अपना नया नेता चुना. बुधवार को लोकभवन में सम्राट के शपथ ग्रहण करते ही बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. 2025 में विधानसभा के लिए मुंगेर जिले के तारापुर से निर्वाचित बीजेपी नेता सम्राट चौधरी नीतीश मंत्रिमंडल में उप-मुख्यमंत्री और गृहमंत्री रहे हैं. उनके पिता भी कद्दावर राजनेता थे. बिहार में सत्ता परिवर्तन की पटकथा उस दिन ही लिख दी गई थी जब नीतीश राज्यसभा के लिए चुन लिए गए. सीएम रहते राज्यसभा का सदस्य बनने वाले वे पहले नेता होंगे.
करीब 20 साल तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे. इस्तीफा सौंपने के पहले नीतीश ने सबसे पहले डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और फिर अपने कैबिनेट की आखिरी बैठक की. इस बैठक में उन्होंने कहा, ‘2005 में मैं सरकार में आया, जहां तक मुझसे जो हो सका वह मैंने किया. नई सरकार को मेरा मार्गदर्शन मिलता रहेगा.' उन्होंने बिहार के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया. इस बैठक में माहौल भावुक रहा. दो-तीन मंत्री रोते हुए भी देखे गए. अपने मन-मिजाज से राजनीति करने वाले नीतीश की धमक राष्ट्रीय राजनीति में भी बनी रही. पक्ष-विपक्ष, दोनों को ही वे स्वीकार्य रहे. उन्होंने राज्य में कानून का राज स्थापित किया तथा गवर्नेंस को नई दशा-दिशा दी. इसलिए उन्हें सुशासन बाबू की संज्ञा दी गई.
राज्यपाल सैयद अता हसनैन को त्यागपत्र सौंपने के बाद नीतीश ने एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बिहार में 24 नवंबर, 2005 को पहली बार एनडीए सरकार की कमान संभालने के बाद से आज तक अपनी सरकार द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा की तथा आगे भी अच्छा काम होने व बिहार के बहुत आगे बढ़ने की उम्मीद जाहिर की है. नीतीश कुमार राज्य के छठे ऐसे नेता बन गए हैं, जो बिहार विधानमंडल (विधानसभा-विधान परिषद) तथा संसद (लोकसभा-राज्यसभा) के दोनों सदनों के सदस्य होंगे.