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Hidden Bihar की खूबसूरती, झरनों से लेकर किलों तक — सब कुछ हमारी नजर से।
🎥 Drone shots | 📍Rohtas-Kaimur

YouTube | Instagram | Facebook पर जुड़ें In Bihar many districts sitting in the lap of nature,Rohtas Kaimur is one of those districts.But due to lack of proper travel arrangements, the tourist places here have not developed much. There are many tourist places in Bihar, some are developed and some are not.Due to the dual attitude of the government, some districts do not develop much.There are many such video creators like Green Life Bihar page who make videos on all these things and show them to the people, The purpose of all of us is to know our state too, get acquainted with the beautiful place of our district.

सासाराम का ये झरना जितना खूबसूरत है… यहाँ तक पहुँचना उतना ही आसान नहीं। बारिश के मौसम में मेहवा झरना देखने के लिए इतनी भ...
27/09/2026

सासाराम का ये झरना जितना खूबसूरत है… यहाँ तक पहुँचना उतना ही आसान नहीं।
बारिश के मौसम में मेहवा झरना देखने के लिए इतनी भीड़ पहुंचती है कि देखकर लगता है जैसे कोई बड़ा tourist spot हो।

लेकिन असली कहानी रास्ते की है…

यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको पक्की सड़क और आरामदायक रास्ते की उम्मीद छोड़नी पड़ती है। बारिश के बाद की कच्ची, कीचड़ भरी राह से गुजरते हुए कपड़े, जूते और पूरा शरीर मिट्टी से सन जाता है।

कई लोग इसी मुश्किल रास्ते की वजह से वापस लौट जाते हैं… और जो आगे बढ़ते हैं, उनके सामने कुछ देर बाद यही नज़ारा आता है—पहाड़ से गिरता पानी, चारों तरफ हरियाली और नीचे उमड़ी लोगों की भीड़। 🌿

शायद यही वजह है कि बिहार के इन झरनों की खूबसूरती सिर्फ तस्वीर में नहीं, उसे देखने तक पहुँचने के सफर में भी छिपी है।

🔄 यह 360° तस्वीर है—चारों तरफ घुमाकर देखिए, मेहवा झरने का पूरा नज़ारा एक साथ।

📍 मेहवा झरना, सासाराम, रोहतास, बिहार

जिस किले को कभी दुश्मनों के लिए अभेद्य बनाया गया था… आज वही किला धीरे-धीरे खुद अपने समय के आगे हार रहा है। कैमूर की पहाड...
27/09/2026

जिस किले को कभी दुश्मनों के लिए अभेद्य बनाया गया था… आज वही किला धीरे-धीरे खुद अपने समय के आगे हार रहा है।

कैमूर की पहाड़ियों में करीब 800 फीट की ऊंचाई पर बना शेरगढ़ सिर्फ एक पुराना किला नहीं है। इसका प्राचीन नाम भुरकुंडा बताया जाता है और यहां कभी खरवार राजाओं का निवास था। बाद में इसका संबंध शेर शाह सूरी के दौर से जुड़ा। किले के भीतर आज भी रानी पोखरा, गार्ड्स हॉल, भूमिगत कुआं, जनाना महल और कई भूमिगत कक्षों के अवशेष मौजूद हैं।

लेकिन आज तस्वीर कुछ और कहानी कहती है।

400 साल से ज्यादा समय से उपेक्षित पड़ा यह किला अब जगह-जगह टूट रहा है। इसकी प्राचीरें और बुर्ज लगातार कमजोर हो रहे हैं और किले के कई हिस्से जंगल और समय के बीच खोते जा रहे हैं। बिहार पर्यटन के विवरण में भी शेरगढ़ की खराब हालत और इसके संरक्षण की तत्काल जरूरत का उल्लेख है।

सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शेरगढ़ कितना पुराना है… सवाल यह है कि हम इसे और कितने साल बचा पाएंगे?

इतिहास को सिर्फ किताबों में सुरक्षित रखकर इतिहास नहीं बचता।
कभी-कभी उसे बचाने के लिए टूटती हुई दीवारों तक समय पर पहुँचना पड़ता है।

🔄 यह 360° दृश्य है—चारों तरफ घुमाकर देखिए शेरगढ़ को।
आज जो दीवारें दिखाई दे रही हैं, जरूरी नहीं कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसी रूप में दिखाई दें।

📍 शेरगढ़ किला, रोहतास, बिहार

भभुआ से अधौरा जाने वाला यह रास्ता… कैमूर की पहाड़ियों में पहुंचते ही बिल्कुल बदल जाता है। घने जंगलों के बीच पहाड़ को काट...
25/09/2026

भभुआ से अधौरा जाने वाला यह रास्ता… कैमूर की पहाड़ियों में पहुंचते ही बिल्कुल बदल जाता है।

घने जंगलों के बीच पहाड़ को काटकर बनी ये घुमावदार सड़क हनुमान घाटी से होकर गुजरती है। एक तरफ गहरी हरियाली और दूसरी तरफ चट्टानों से घिरी घाटी—और सड़क ऐसे घूमती है, जैसे पहाड़ के साथ-साथ अपना रास्ता खुद बना रही हो।

अधौरा खुद कैमूर पठार पर करीब 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और पूरा इलाका अपने पहाड़ों और जंगलों के लिए जाना जाता है।

लेकिन जमीन से गुजरते हुए शायद इस रास्ते की असली खूबसूरती इतनी आसानी से दिखाई नहीं देती…

इस 360° दृश्य में ऊपर से देखिए हनुमान घाटी को—एक तरफ जंगल, बीच में पहाड़ों के बीच से गुजरती सड़क और दूर तक फैला कैमूर। 🔄❤️

📍 हनुमान घाटी, भभुआ–अधौरा मार्ग, कैमूर, बिहार

एक प्राकृतिक गुफा के भीतर विराजमान माँ तारा चंडी… और इस जगह का इतिहास सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है। 🙏सासाराम की कैमूर पह...
25/09/2026

एक प्राकृतिक गुफा के भीतर विराजमान माँ तारा चंडी… और इस जगह का इतिहास सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है। 🙏

सासाराम की कैमूर पहाड़ियों में स्थित माँ ताराचंडी मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में बना है। यहाँ मौजूद माँ तारा की प्रतिमा और मंदिर परिसर की कुछ प्राचीन प्रतिमाओं को गुप्त काल के अंतिम चरण या परवर्ती गुप्त काल से जोड़ा गया है।

और सबसे दिलचस्प बात—यहाँ 12वीं सदी के खरवार वंश के राजा महानायक प्रताप धवलदेव के समय का एक शिलालेख भी मौजूद है। यानी इस स्थान की पहचान सदियों पहले भी स्थापित थी।

आज जब आप इस जगह को देखते हैं, तो सामने सिर्फ एक मंदिर नहीं होता… एक प्राकृतिक गुफा, प्राचीन प्रतिमाएँ और सदियों पुराना इतिहास—सब एक ही जगह दिखाई देता है।

🔄 यह 360° तस्वीर है। चारों तरफ घुमाकर देखिए और माँ ताराचंडी धाम को उसी तरह महसूस कीजिए, जैसे आप खुद यहाँ खड़े हों।

📍 माँ ताराचंडी धाम, सासाराम, रोहतास, बिहार

तेलहर कुंड जाने वाले रास्ते पर एक ऐसा झरना भी है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं… कैमूर की पहाड़ियों की खासिय...
24/09/2026

तेलहर कुंड जाने वाले रास्ते पर एक ऐसा झरना भी है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं…

कैमूर की पहाड़ियों की खासियत ही यही है—एक जगह देखने निकलो तो रास्ते में दूसरी अनदेखी जगह सामने आ जाती है।

तेलहर कुंड की ओर जाते हुए, एक गाँव के पास चट्टानों के बीच से निकलता यह छोटा-सा झरना मिला। न कोई बड़ा बोर्ड, न कोई पर्यटन स्थल जैसा शोर… बस पहाड़, पानी और आसपास की हरियाली।

शायद कैमूर की असली खूबसूरती इन्हीं जगहों में छिपी है—जहाँ किसी नक्शे पर बड़ा नाम नहीं, लेकिन सामने पहुँचकर लगता है कि जगह किसी से कम नहीं।

और यही वजह है कि कैमूर को सिर्फ तेलहर कुंड या किसी एक झरने से नहीं समझा जा सकता। इन पहाड़ियों में ऐसे कई छोटे-बड़े जलस्रोत और प्राकृतिक दृश्य बिखरे हुए हैं।

📍 तेलहर कुंड जाने वाले रास्ते में, कैमूर, बिहार

जिस आदमी ने पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया… उसे बड़े-बड़े राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिले।नाम था दशरथ मांझी।गहलौर के एक साधारण म...
22/09/2026

जिस आदमी ने पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया… उसे बड़े-बड़े राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिले।

नाम था दशरथ मांझी।
गहलौर के एक साधारण मजदूर ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उस पहाड़ को काटना शुरू किया, जिसने गांव और अस्पताल के बीच रास्ता रोक रखा था। हाथ में सिर्फ हथौड़ा और छेनी थी… और सामने पूरा पहाड़।

लगातार 22 साल मेहनत के बाद उन्होंने करीब 360 फीट लंबा और 30 फीट चौड़ा रास्ता बना दिया। इससे अत्री और वजीरगंज के बीच की दूरी लगभग 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई।

उनके काम को देशभर में पहचान मिली और उन्हें “Mountain Man” कहा गया। बिहार सरकार ने 2006 में उनका नाम Padma Shri के लिए प्रस्तावित भी किया था, लेकिन उन्हें Padma Shri प्रदान नहीं किया गया। बाद में उनके सम्मान में 26 दिसंबर 2016 को India Post ने डाक टिकट जारी किया।

और आज भी उनके लिए Bharat Ratna की मांग उठती रही है—2023 में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से भी यह मांग रखी थी।

लेकिन शायद दशरथ मांझी की सबसे बड़ी पहचान किसी पुरस्कार का नाम नहीं है…

वह रास्ता है, जो आज भी उसी पहाड़ के बीच मौजूद है।

कभी-कभी किसी इंसान की बनाई हुई चीज़ ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बन जाती है।
और दशरथ मांझी ने अपने पीछे कोई महल नहीं छोड़ा , उन्होंने लोगों के लिए एक रास्ता छोड़ा। ❤️

📍 दशरथ मांझी द्वार, गहलौर, गया, बिहार

बिहार की खूबसूरती दिखाते हुए कभी-कभी एक सवाल अंदर से चुभता है—क्या हम सच में अपने मेहमानों के लिए सुरक्षित जगह बना पाए ह...
22/09/2026

बिहार की खूबसूरती दिखाते हुए कभी-कभी एक सवाल अंदर से चुभता है—क्या हम सच में अपने मेहमानों के लिए सुरक्षित जगह बना पाए हैं?

मैं सासाराम और रोहतास की पहाड़ियों, जंगलों, झरनों और उन अनदेखी जगहों की तस्वीरें दुनिया तक पहुँचाता हूँ। लोग मेरी वीडियो देखकर यहाँ घूमने आते हैं। लेकिन जब ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, तो खुशी से ज्यादा शर्म महसूस होती है।

जमुई में 19 सितंबर को दो नाबालिगों को रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की घटना सामने आई। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू हुई।

लेकिन मेरे लिए सवाल सिर्फ जमुई का नहीं है।

सासाराम–रोहतास में भी न जाने कितने लड़के-लड़कियों ने ऐसी रोक-टोक, डर और Moral Policing चुपचाप झेली होगी। शायद हर घटना कैमरे में रिकॉर्ड नहीं होती, हर पीड़ित आवाज़ नहीं उठाता और हर कहानी वायरल नहीं होती।

बिहार की खूबसूरती दिखाना मेरा काम है।
लेकिन ऐसा बिहार देखना मेरी इच्छा है, जहाँ किसी लड़की को किसी खूबसूरत जगह पर जाने से पहले यह न सोचना पड़े कि वहाँ के लोग उसके साथ क्या करेंगे।

बिहार को छोड़ना नहीं है।
बिहार की सोच बदलनी है।

क्योंकि जिस दिन यहाँ आने वाली लड़की को खूबसूरती दिखेगी, डर नहीं उस दिन बिहार की तस्वीर सच में बदली होगी।

जिस मांझर कुंड को देखने के लिए हजारों लोग आते हैं… उसकी शुरुआत आखिर होती कहाँ से है? बहुत कम लोग इस जगह तक पहुँचते हैं। ...
21/09/2026

जिस मांझर कुंड को देखने के लिए हजारों लोग आते हैं… उसकी शुरुआत आखिर होती कहाँ से है?

बहुत कम लोग इस जगह तक पहुँचते हैं। यह वही पहाड़ी हिस्सा है जहाँ से बहता हुआ पानी आगे जाकर मांझर कुंड जलप्रपात का रूप लेता है। पहाड़ों के बीच चट्टानों पर बहती यह धारा आगे कई मोड़ लेते हुए उस प्रसिद्ध कुंड तक पहुँचती है।

यानी जिसे हम नीचे जाकर एक खूबसूरत झरने के रूप में देखते हैं, उसकी कहानी यहाँ से शुरू होती है।

और इस जगह की सबसे खास बात यही है यह कोई सजाया हुआ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि कैमूर की पहाड़ियों के बीच प्रकृति का अपना बनाया हुआ रास्ता है।

🔄 यह 360° तस्वीर है। चारों तरफ घुमाकर देखिए मांझर कुंड के उस हिस्से को, जहाँ से इसकी जलधारा अपनी यात्रा शुरू करती है।

📍 मांझर कुंड का उद्गम क्षेत्र, कैमूर पहाड़ियाँ, रोहतास, बिहार

21/09/2026

Pahad par chadhte hue ye rasta khud ek nazara hai… ⛰️🌿
Day 24 | The Other Side of Bihar

Maa Mundeshwari pahadi par jaate waqt ye ghumaavdar rasta upar se kuch alag hi dikhta hai. Neeche ghana jungle, beech se nikalta hua road aur har turn ke saath badalta pahad ka view… bas drone se dekhte rehne ka mann karta hai. ❤️

Isi pahadi ki choti par Maa Mundeshwari Mandir hai, jo lagbhag 600 feet ki Piwara pahadi par sthit hai. Lekin aaj ki video mein mandir se zyada us tak pahunchne wale is khoobsurat raste ko dikhana tha. ⛰️

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शेरगढ़ का यह मुख्य द्वार… कभी एक विशाल पहाड़ी दुर्ग में प्रवेश का रास्ता हुआ करता था। कैमूर की पहाड़ियों में करीब 800 फी...
21/09/2026

शेरगढ़ का यह मुख्य द्वार… कभी एक विशाल पहाड़ी दुर्ग में प्रवेश का रास्ता हुआ करता था।

कैमूर की पहाड़ियों में करीब 800 फीट की ऊंचाई पर बना शेरगढ़ अपने इतिहास और रहस्यमयी संरचनाओं के लिए जाना जाता है। कभी इसका नाम भुरकुंडा बताया जाता है और किले के भीतर आज भी पुराने महल, जलाशय और भूमिगत संरचनाओं के अवशेष मिलते हैं।

लेकिन आज इस ऐतिहासिक धरोहर की हालत देखकर एक सवाल जरूर उठता है—क्या आने वाली पीढ़ियां इसे इसी रूप में देख पाएंगी?

समय, बारिश और लगातार होती टूट-फूट ने इसकी दीवारों और संरचनाओं को कमजोर किया है। अगर समय रहते वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और रखरखाव नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में इसका काफी हिस्सा हमेशा के लिए खो सकता है।

इस 360° तस्वीर में चारों तरफ घूमकर देखिए—यह सिर्फ एक किले का दरवाजा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे मिटती जा रही हमारी विरासत का एक हिस्सा है।

📍 शेरगढ़ किला, रोहतास, बिहार

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