04/08/2026
कांवड़ यात्रा: भक्ति की राह या नशे का जुलूस? कृपया लेख पढ़ने के बाद ही कमेंट करें। 🙏💐
सावन का महीना आते ही "बोल बम" के जयघोष से वातावरण गूंज उठता है। कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की आस्था, तप और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस यात्रा का उद्देश्य आत्मसंयम और श्रद्धा होना चाहिए था, वह कुछ लोगों के लिए नशे और सोशल मीडिया की दिखावेबाजी का मंच बनती जा रही है।
आज कुछ युवाओं ने भगवान शिव के वैराग्य और प्रतीकों को अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित कर लिया है। "शिव जी गांजा पीते थे" जैसी आधी-अधूरी और भ्रामक धारणाओं को ढाल बनाकर गांजा और चरस को "प्रसाद" घोषित कर दिया गया है। मानो धर्मग्रंथों का अध्ययन अब रीलों के 30 सेकंड में पूरा होने लगा हो। भक्ति कम, वायरल होने की होड़ ज्यादा दिखाई देती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सोशल मीडिया मंच X पर एक युवा पत्रकार से बातचीत में एक कांवड़िए ने खुलेआम गांजा-चरस खरीदने और यात्रा �