24/01/2026
पिछले वर्ष अगस्त–सितंबर में चले राजस्व महा अभियान की अधूरी कड़ियों को अब जमीन पर पूरा करने की तैयारी है। उस दौरान शिविर लगाकर किसानों से लिए गए लाखों आवेदनों के अंतिम निबटारे के लिए सरकार एक बार फिर पंचायत स्तर पर महा अभियान शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत 26 जनवरी से होगी, जहां पंचायतों में ही बैठकर आवेदनों पर फैसला लिया जाएगा और लंबित मामलों को आगे नहीं टाला जाएगा।
इस अभियान को लेकर उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि पंचायत शिविरों में विवादित मामलों का भी मौके पर ही निबटारा किया जाएगा। पिछली बार मिले कुल 46 लाख आवेदनों में से करीब 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हुए हैं। इन मामलों के निष्पादन से न सिर्फ रैयतों के भूमि अभिलेख दुरुस्त होंगे, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी सहूलियत मिलेगी। साथ ही विभाग को भविष्य के भूमि सर्वेक्षण में भी आसानी होगी।
उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की मंशा साफ है—31 मार्च तक सभी प्राप्त आवेदनों का निबटारा हर हाल में कर दिया जाएगा। इसके लिए मामलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। अविवादित मामलों का निष्पादन जिला मुख्यालय स्तर पर किया जाएगा, जबकि विवादित मामलों की सुनवाई पंचायत स्तर पर लगने वाले शिविरों में होगी।
इसी के साथ जमीन की मापी को लेकर चल रहा महा अभियान भी समानांतर जारी रहेगा। दोनों अभियानों के बीच तालमेल बनाए रखने की जिम्मेदारी सीधे अंचल अधिकारियों (सीओ) को दी गई है, ताकि न तो मापी का काम प्रभावित हो और न ही आवेदन निबटारे की प्रक्रिया में देरी हो।
महा अभियान को सफल बनाने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारी तेज कर दी गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने इस संबंध में प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पिछला अभियान डिजिटल जमाबंदी में मौजूद त्रुटियों के सुधार, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारा नामांतरण को आसान बनाने के उद्देश्य से चलाया गया था—और अब उन्हीं आवेदनों को अंतिम रूप देना प्राथमिकता है।
निर्देशों के अनुसार, पंचायत शिविरों में पिछले अभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों की जिलावार, अंचलवार और हल्कावार ऑनलाइन प्रविष्टि अनिवार्य होगी, ताकि रिकॉर्ड में कोई अस्पष्टता न रहे और जवाबदेही तय की जा सके।
शिविरों में परिमार्जन से जुड़े लगभग 40 लाख मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी आवेदनों को पहले विवादित और अविवादित श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। अविवादित मामलों का निष्पादन जिला स्तर पर होगा, जबकि विवादित मामलों में मौके पर सुनवाई, अभिलेखों का सत्यापन और तत्काल आदेश पारित करने की व्यवस्था रहेगी।
इसके लिए शिविरों में सरकारी लैपटॉप, दक्ष कंप्यूटर सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे। एक ही परिवार या एक ही खाताधारी से जुड़े मामलों का एकसाथ निबटारा किया जाएगा, ताकि लोगों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े।
सरकार ने पूरी प्रक्रिया के लिए समय-सीमा भी तय कर दी है। नोटिस जारी करने से लेकर सुनवाई, अभिलेख प्रस्तुत करने और सकारण आदेश पारित करने तक की पूरी कार्रवाई अधिकतम 45 दिनों में पूरी करनी होगी। प्रशासन का दावा है कि इस अभियान के जरिए न सिर्फ पुराने आवेदनों का बोझ कम होगा, बल्कि भूमि रिकॉर्ड को लेकर रैयतों की वर्षों पुरानी परेशानियों को भी स्थायी समाधान मिलेगा।
VIJAY KUMAR SINHA