दुनिया रुठे चाहे रब ना रुठे

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 #कबीरसागर_का_सरलार्थPart8प्रश्न :- धर्मदास जी ने पूछा कि क्या श्री विष्णु जी और शंकर जी की पूजा करनी चाहिए?उत्तर :- (जि...
22/06/2021

#कबीरसागर_का_सरलार्थPart8

प्रश्न :- धर्मदास जी ने पूछा कि क्या श्री विष्णु जी और शंकर जी की पूजा करनी चाहिए?

उत्तर :- (जिन्दा बाबा का) :- नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न (धर्मदास जी का) :- कृपया गीता से प्रमाणित कीजिए।
उत्तर :- श्री मद्भगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15, 20 से 23 तथा गीता अध्याय 9 श्लोक 23-24, गीता अध्याय 17 श्लोक 1 से 6 में प्रमाण है कि जो व्यक्ति रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शिव की भक्ति करते हैं, वे राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूर्ख मुझे भी नहीं भजते। (यह प्रमाण गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 में है। फिर गीता अध्याय 7 के ही श्लोक 20 से 23 तथा गीता अध्याय 9 श्लोक 23-24 में यही कहा है और क्षर पुरुष, अक्षर पुरुष तथा परम अक्षर पुरुष गीता अध्याय 15 श्लोक 16-17 में जिनका वर्णन है), को छोड़कर श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु तथा श्री शिव जी अन्य देवताओं में गिने जाते हैं। इन दोनों अध्यायों (गीता अध्याय 7 तथा अध्याय 9 में) में ऊपर लिखे श्लोकां में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि जो साधक जिस भी उद्देश्य को लेकर अन्य देवताओं को भजते हैं, वे भगवान समझकर भजते हैं। उन देवताओं को मैंने कुछ शक्ति प्रदान कर रखी है। देवताओं के भजने वालों को मेरे द्वारा किए विधान से कुछ लाभ मिलता है। परन्तु उन अल्प बुद्धिवालों का वह फल नाशवान होता है। देवताओं को पूजने वाले देवताओं के लोक में जाते हैं। मेरे पुजारी मुझे प्राप्त होते हैं।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में कहा है कि शास्त्रविधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं अर्थात् जिन देवताओं पितरों, यक्षों, भैरों-भूतों की भक्ति करते हैं और मनकल्पित मन्त्रों का जाप करते हैं, उनको न तो कोई सुख होता है, न कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा न उनकी गति अर्थात् मोक्ष होता है। इससे तेरे लिए हे अर्जुन! कर्तव्य (जो भक्ति करनी चाहिए) और अकर्त्तव्य (जो भक्ति न करनी चाहिए) की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण हैं। गीता अध्याय 17 श्लोक 1 में अर्जुन ने पूछा कि हे कृष्ण! (क्योंकि अर्जुन मान रहा था कि श्री कृष्ण ही ज्ञान सुना रहा है, परन्तु श्री कृष्ण के शरीर में प्रेत की तरह प्रवेश करके काल (ब्रह्म) ज्ञान बोल रहा था जो पहले प्रमाणित किया जा चुका है)। जो व्यक्ति शास्त्रविधि को त्यागकर अन्य देवताओं आदि की पूजा करते हैं, वे स्वभाव में कैसे होते हैं? गीता ज्ञान दाता ने उत्तर दिया कि सात्विक व्यक्ति देवताओं का पूजन करते हैं। राजसी व्यक्ति यक्षों व राक्षसों की पूजा तथा तामसी व्यक्ति प्रेत आदि की पूजा करते हैं। ये सब शास्त्राविधि रहित कर्म हैं। फिर गीता अध्याय 17 श्लोक 5-6 में कहा है कि जो मनुष्य शास्त्रविधि से रहित केवल मनकल्पित घोर तप को तपते हैं, वे दम्भी (अभिमानी) हैं और शरीर के कमलों में विराजमान शक्तियों को तथा मुझे भी क्रश करने वाले राक्षस स्वभाव के अज्ञानी जान।
सूक्ष्मवेद में भी परमेश्वर जी ने कहा है कि :-
‘‘कबीर, माई मसानी सेढ़ शीतला भैरव भूत हनुमंत। परमात्मा से न्यारा रहै, जो इनको पूजंत।।
राम भजै तो राम मिलै, देव भजै सो देव। भूत भजै सो भूत भवै, सुनो सकल सुर भेव।।‘‘
स्पष्ट हुआ कि श्री ब्रह्मा जी (रजगुण), श्री विष्णु जी (सत्गुण) तथा श्री शिवजी (तमगुण) की पूजा (भक्ति) नहीं करनी चाहिए तथा इसके साथ-साथ भूतों, पितरों की पूजा, (श्राद्ध कर्म, तेरहवीं, पिण्डोदक क्रिया, सब प्रेत पूजा होती है) भैरव तथा हनुमान जी की पूजा भी नहीं करनी चाहिए।
धर्मदास को प्रभु ने सुनाया, गीता शास्त्र से प्रत्यक्ष प्रमाण देखकर धर्मदास की आँखें खुली की खुली रह गई। जैसे किसी को सदमा लग गया हो। झूठ कह नहीं सकता, स्वीकार करने से लिए अभी वक्त लगेगा। जिन्दा रुपधारी परमेश्वर ने धर्मदास को सम्बोधित करते हुए कहा कि हे वैष्णव महात्मा! कौन-सी दुनिया में चले गये, लौट आओ। मानो धर्मदास नींद से जागा हो। सावधान होकर कहा, कुछ नहीं-कुछ नहीं। कृप्या और ज्ञान सुनाओ ताकि मेरा भ्रम दूर हो सके। परमेश्वर कबीर जी ने सृष्टि की रचना धर्मदास जी को सुनाई, कृपया पढ़ें इसी पुस्तक के पृष्ठ 603 पर।
सृष्टि रचना सुनकर धर्मदास जी को ऐसा लगा मानो पागल हो जाऊँगा क्योंकि जो ज्ञान आजतक हिन्दू धर्मगुरुओं, ऋषियों, महर्षियों-सन्तां से सुना था, वह निराधार तथा अप्रमाणित लग रहा था। जिन्दा बाबा हिन्दू सद्ग्रन्थों से ही प्रमाणित कर रहे थे। शंका का कोई स्थान नहीं था। मन-मन में सोच रहा था कि कहीं मैं पागल तो नहीं हो जाऊँगा?

क्रमशः .............
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सत साहेबअब नहीं होगा बाप पर बेटी का बोझसंत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर17 मिनट में गुरुवाणी से सम्पन्न हुआ दहेजमुक्त ...
22/06/2021

सत साहेब
अब नहीं होगा बाप पर बेटी का बोझ
संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर

17 मिनट में गुरुवाणी से सम्पन्न हुआ दहेजमुक्त अंतरजातीय विवाह "आज के आधुनिक युग में एक अद्वितीय पहल"
कोलारस
आज के आधुनिक युग में देखा जाए तो मानव समाज का एक धड़ा ऐसा है जो सिर्फ ताम-झाम व दिखावटी चमक के लिए रुपये को पानी की तरह बहाकर बर्बाद कर देता है, तो वहीं दूसरी ओर संत रामपाल जी महाराज के अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान की विचारधारा से प्रेरित होकर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों द्वारा बेहद सादगीपूर्ण, बिना किसी लेनदेन अर्थात दान-दहेज के पूर्णतः दहेज मुक्त विवाह “रमैनी” सम्पन्न किये जाते हैं।

ऐसा ही एक अद्वितीय विवाह आज सम्पन्न हुआ, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्राम अमरपुर तहसील कोलारस जिला शिवपुरी निवासी संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी पूरन सिंह जी ने अपनी पुत्री अंजलि का पूर्णताः दहेज मुक्त अंतरजातीय विवाह संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी गांधीनगर भोपाल निवासी अर्जुन नवलानी जी के पुत्र हरीश नवलानी के साथ सम्पन्न किया।

इस अद्वितीय अंतरजातीय दहेज मुक्त विवाह को जिसने भी देखा या इस विवाह के बारे में सुना उसने अपनी जुबां से इस अद्वितीय विवाह की खूब तारीफ बयां की।

प्राचीन काल से मानव समाज पर लगे दहेज़ प्रथा नामक कलंक से मिलेगा छुटकारा।
फिजूलखर्ची पर लगेगा विराम
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का सपना होगा साकार।
आज की युवा पीढ़ी के लिए दहेज मुक्त विवाह हैं एक अद्भुत प्रेरणा स्त्रोत।
दहेज़ मुक्त विवाहों (रमैनी) से बाल विवाह व पारिवारिक झगड़ों पर लगेगा अंकुश।
संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयाई अपने गुरुदेव (संत रामपाल जी महाराज जी) के वचनों का पालन करते हुए एक ऐसा विवाह (रमैनी) मानव समाज के सामने पेश कर रहे हैं जो सचमुच में देखने व प्रेरणा लेने के योग्य है। इन दहेज़ मुक्त विवाह ‘रमैनी’ में किसी भी प्रकार का दिखावा जैसे- न डीजे, न बैंड, न बारात, न भात, न मंडप, न फेरे इत्यादि देखने को नहीं मिलते हैं अपितु अपने गुरुदेव परम् संत रामपाल जी महाराज जी के मुख से उच्चरित “17 मिनट की वाणी (जिसे दूसरे शब्दों में रमैणी कहा जाता है )”, को साक्षी मानकर जीवन भर एक दूसरे का सुख-दुख में साथ देने, प्रेम पूर्वक रहने व किसी भी प्रकार की बुराई (जैसे- चोरी- जारी, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, बेईमानी, ठगी) न करने का वचन लेते हैं।

गोता मारूं स्वर्ग में, जा पैठू पाताल । गरीबदास ढूंढ़त फिरूं, हीरे मानिक लाल ।।कबीर, भक्ति बीज विनशै नहीं, आय पड़ो सो झोल...
19/06/2021

गोता मारूं स्वर्ग में, जा पैठू पाताल । गरीबदास ढूंढ़त फिरूं, हीरे मानिक लाल ।।
कबीर, भक्ति बीज विनशै नहीं, आय पड़ो सो झोल । जे कंचन बिष्टा पड़े, घटै न ताका मोल ।।
भावार्थ :- कबीर परमेश्वर जी ने संत गरीबदास जी को बताया कि मैं अपनी अच्छी आत्माओं को खोजता फिरता हूँ। स्वर्ग, पथ्वी तथा पाताल लोक में कहीं भी मिले, मैं वहीं पहुँच जाता हूँ। उनको पुनः भक्ति की प्रेरणा करता हूँ। मनुष्य जन्म के भूले उद्देश्य की याद दिलाकर भक्ति करने को कहता हूँ। वे अच्छी आत्माएँ पूर्व के किसी जन्म में मेरी शरण में आई होती हैं, परंतु पुनः जन्म में कोई संत न मिलने के कारण वे भक्ति न करके या तो धन संग्रह करने में व्यस्त हो जाती हैं या बुराईयों में फँसकर शराब, माँस खाने-पीने में जीवन नष्ट कर देती हैं या फिर अपराधी बनकर जनता के लिए दुःखदाई बनकर बेमौत मारी जाती हैं। उनको उस दलदल से निकालने के लिए मैं कोई न कोई कारण बनाता हूँ। वे आत्माएँ त्त्वज्ञान के अभाव से बुराईयों रूपी कीचड़ में गिर तो जाती हैं, परंतु जैसे कंचन (स्वर्ण यानि Gold) टट्टी में गिर जाए तो उसका मूल्य कम नहीं होता टट्टी (बिष्टा) से निकालकर साफ कर ले। उसी मोल बिकता है | इसी प्रकार जो जीव मानव शरीर में एक बार मेरी (कबीर परमेश्वर जी की) शरण में किसी जन्म मे आ जाता है। प्रथम, तीनों मंत्रों में से कोई भी प्राप्त कर लेता है किसी कारण से नाम खंडित हो जाता है, मत्यु हो जाती है तो उसको मैं भी कोई उपदेशी रह जाता है तो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में उन्हीं की भक्ति से मैं बिना नाम लिए, बिना धर्म-कर्म किए आपत्ति आने पर अनोखी लीला करके रक्षा करता हूँ। उसको फिर भक्ति पर लगाता हूँ। उनमें परमात्मा के प्रति आस्था बनाए रखता हूँ।

#दुनिया_रुठे_चाहे_रब_ना_रुठे

#सद्भभक्ति

#यथार्थ_कबीर_पंथ
#पूर्ण_परमात्मा
#तत्वदर्शी_संत

24 June 2021

Sat sahib ji 🙏🙏

🌹" गुरु  का  आदेश "🌹    एक शिष्य था समर्थ गुरु  जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लग...
19/06/2021

🌹" गुरु का आदेश "🌹

एक शिष्य था समर्थ गुरु जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लगा।
*समर्थ गुरु की जय ! भिक्षां देहि....*
*समर्थ गुरु की जय ! भिक्षा देहि....*
एक घर के भीतर से जोर से दरवाजा खुला और एक बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाला तान्त्रिक बाहर निकला और चिल्लाते हुए बोला - मेरे दरवाजे पर आकर किसी दूसरे का गुणगान करता है, कौन है ये समर्थ??
शिष्य ने गर्व से कहा-- *मेरे गुरु समर्थ ... जो सर्व समर्थ है।*
तांत्रिक ने सुना तो क्रोध में आकर बोला कि इतना दुःसाहस कि मेरे दरवाजे पर आकर किसी और का गुणगान करे .. तो देखता हूँ कितना सामर्थ्य है तेरे गुरु में !
*मेरा श्राप है कि तू कल का उगता सूरज नहीं देख पाएगा अर्थात् तेरी मृत्यु हो जाएगी।*
शिष्य ने सुना तो देखता ही रह गया और आस-पास के भी गांव वाले कहने लगे कि इस तांत्रिक का दिया हुआ श्राप कभी भी व्यर्थ नही जाता.. बेचारा युवावस्था में ही अपनी जान गवां बैठा....
शिष्य उदास चेहरा लिए वापस आश्रम की ओर चल दिया और सोचते-सोचते जा रहा था कि आज मेरा अंतिम दिन है, लगता है मेरा समय खत्म हो गया है।
आश्रम में जैसे ही पहुँचा। गुरु जी हँसते हुए बोले -- *ले आया भिक्षा?*
बेचार शिष्य क्या बोले---!


गुरुदेव हँसते हुए बोले कि भिक्षा ले आया।
*शिष्य--* जी गुरुदेव! भिक्षा में मैं अपनी मौत ले आया हूँ ! और सारी घटना सुना दी और एक कोने में चुप-चाप बैठ गया।
गुरुदेव बोले अच्छा चल भोजन कर ले।
*शिष्य--* गुरुदेव! आप भोजन करने की बात कर रहे है और यहाँ मेरा प्राण सूख रहा है। भोजन तो दूर एक दाना भी मुँह में न जा पाएगा।
*गुरुदेव बोले---* अभी तो पूरी रात बाकी है अभी से चिंता क्यों कर रहा है, चल ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा। और यह कहकर गुरुदेव भोजन करने चले गए।
फिर सोने की बारी आई तब गुरुदेव शिष्य को बुलाकर आदेश किया - *हमारे चरण दबा दे!*
शिष्य मायूस होकर बोला! जी गुरुदेव जो कुछ क्षण बचे है जीवन के, वे क्षण मैं आपकी सेवा कर ही प्राण त्याग करूँ यही अच्छा होगा और फिर गुरुदेव के चरण दबाने की सेवा शुरू की।
*गुरुदेव बोले--* चाहे जो भी हो जाय चरण छोड़ कर कहीं मत जाना ।
*शिष्य--* जी गुरुदेव कहीं नहीं जाऊँगा।
*गुरुदेव ने अपने शब्दों को तीन बार दोहराया कि *चरण मत छोड़ना, चाहे जो हो जाए।*
यह कह कर गुरुदेव सो गए।
शिष्य पूरी भावना से चरण दबाने लगा।
रात्रि का पहला पहर बीतने को था अब तांत्रिक अपनी श्राप को पूरा करने के लिए एक देवी को भेजा जो धन से सोने-चांदी से, हीरे-मोती से भरी थाली हाथ में लिए थी।
शिष्य चरण दबा रहा था। तभी दरवाजे पर वो देवी प्रकट हुई और कहने लगी - कि इधर आओ और ये थाली ले लो। शिष्य बोला-- जी मुझे लेने में कोई परेशानी नहीं है लेकिन क्षमा करें! मैं वहाँ पर आकर नहीं ले सकता। अगर आपको देना ही है तो यहाँ पर आकर रख दीजिए।
तो वह देवी कहने लगी कि-- नही !! नही!! तुम्हे यहाँ आना होगा। देखो कितना सारा माल है। शिष्य बोला-- नहीं। अगर देना है तो यहीं आकर रख दो।
*तांत्रिक ने अपना पहला पासा असफल देख दूसरा पासा फेंका रात्रि का दूसरा पहर बीतने को था तब तांत्रिक ने भेजा....*

शिष्य समर्थ गुरु जी के चरण दबाने की सेवा कर रहा था तब रात्रि का दूसरा पहर बीता और तांत्रिक ने इस बार उस शिष्य की माँ का रूप बनाकर एक नारी को भेजा।
शिष्य गुरु के चरण दबा रहा था तभी दरवाजे पर आवाज आई -- बेटा! तुम कैसे हो?
शिष्य ने अपनी माँ को देखा तो सोचने लगा अच्छा हुआ जो माँ के दर्शन हो गए, मरते वक्त माँ से भी मिल ले।
वह औरत जो माँ के रूप को धारण किये हुए थी बोली - आओ बेटा गले से लगा लो! बहुत दिन हो गए तुमसे मिले।
शिष्य बोला-- क्षमा करना मां! लेकिन मैं वहाँ नहीं आ सकता क्योंकि अभी गुरुचरण की सेवा कर रहा हूँ। मुझे भी आपसे गले लगना है इसलिए आप यहीं आ कर बैठ जाओ।
फिर उस औरत ने देखा कि चाल काम नहीं आ रहा है तो वापिस चली गई।
रात्रि का तीसरा पहर बीता और इस बार तांत्रिक ने यमदूत रूप वाला राक्षस भेजा।
राक्षस पहुँच कर उस शिष्य से बोला कि चल तुझे लेने आया हूँ तेरी मृत्यु आ गई है। उठ और चल...।
शिष्य भी झल्लाकर बोला-- काल हो या महाकाल मैं नहीं आने वाला ! अगर मेरी मृत्यु आई है तो यहीं आकर मेरे प्राण ले लो,लेकिन मैं गुरु के चरण नही छोडूंगा!
फिर राक्षस भी उसका दृढ़ निश्चय देख कर वापिस चला गया।
सुबह हुई चिड़ियां अपनी घोंसले से निकलकर चहचहाने लगी। सूरज भी उदय हो गया।
गुरुदेव जी नींद से उठे और शिष्य से पूछा कि - सुबह हो गई क्या ?
शिष्य बोला-- जी! गुरुदेव सुबह हो गई।
गुरुदेव - अरे! तुम्हारी तो मृत्यु होने वाली थी न, तुमने ही तो कहा था कि तांत्रिक का श्राप कभी व्यर्थ नही जाता। लेकिन तुम तो जीवित हो...!! गुरुदेव ने मुस्कराते हुए ऐसा बोला।
शिष्य भी सोचते हुए कहने लगा - जी गुरुदेव, लग तो रहा है कि जीवित ही हूँ। अब शिष्य को समझ में आई कि गुरुदेव ने क्यों कहा था कि --- *चाहे जो भी हो जाए चरण मत छोड़ना।* शिष्य गुरुदेव के चरण पकड़कर खूब रोने लगा । बार बार मन ही मन यही सोच रहा था - *जिसके सिर पर आप जैसे गुरु का हाथ हो तो उसे काल भी कुछ नहीं कर सकता है।
*मतलब कि गुरु की आज्ञा पर जो शिष्य चलता है उससे तो स्वयं मौत भी आने से एक बार नहीं अनेक बार सोचती है।*
*करता करै न कर सके, गुरु करे सो होय।
तीन-लोक,नौ खण्ड में गुरु से बड़ा न कोय।।*

पूर्ण सद्गुरु में ही सामर्थ्य है कि वो प्रकृति के नियम को बदल सकते है जो ईश्वर भी नहीं बदल सकते, क्योंकि ईश्वर भी प्रकृति के नियम से बंधे होते है लेकिन पूर्ण सद्गुरु नहीं।

#सद्भभक्ति ी

#पूर्ण_परमात्मा
#तत्वदर्शी_संत
#दुनिया_रुठे_चाहे_रब_ना_रुठे
24 June 2021
#यथार्थ_कबीर_पंथ
सत साहेब जी। 🙏🙏🙏

🙏🙏🌺🌿🥀🌿🌹🥀🌺🌿🙏🙏कबीर ' राम रटत निर्धन भला , टूटी घर की छान !!          वह सुंदर महल किस काम के , जहा भक्ति नहीं भगवान !! कबी...
13/06/2021

🙏🙏🌺🌿🥀🌿🌹🥀🌺🌿🙏🙏
कबीर ' राम रटत निर्धन भला , टूटी घर की छान !!
वह सुंदर महल किस काम के , जहा भक्ति नहीं भगवान !!

कबीरा ' सब जग निर्धना ,,धनवंता ना कोई
धनवंता सोइ जानिए , जिस पर राम नाम धन होय।।

🌹बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की जय🥀
🙏🌹🌹 सत साहेब जी 🌺🌹🙏

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शासकीय जिला अस्पताल दुर्ग में Spiritual Leader Saint Rampal Ji के शिष्यों द्वारा 50 यूनिट ...
13/06/2021

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शासकीय जिला अस्पताल दुर्ग में Spiritual Leader Saint Rampal Ji के शिष्यों द्वारा 50 यूनिट से ज़्यादा रक्तदान किया गया। संत रामपाल जी के शिष्य समाज सेवा के कार्यों में सदा बढ़चढ़ कर सहयोग देते हैं।

जगतगुरु Spiritual Leader Saint Rampal Ji के आशीर्वाद से बुद्धेश्वर स्थित नामदान केंद्र लखनऊ में दो रमैणियां संपन्न हुईं ...
12/06/2021

जगतगुरु Spiritual Leader Saint Rampal Ji के आशीर्वाद से बुद्धेश्वर स्थित नामदान केंद्र लखनऊ में दो रमैणियां संपन्न हुईं । जिनमें दिनेश संग अंजलि व सोनू संग शालिनी का विवाह हुआ। रमैणी ,विवाह का उद्देश्य समाज से लेनदेन की कुप्रथा जिसे दहेज कहते हैं को सदा के लिए समाप्त करना है।

परमेश्वर कबीर जी ने कबीर सागर अध्याय ‘‘कबीर बानी‘‘ पृष्ठ 136 तथा 137 पर कहा है कि बारहवां (12वां) पंथ संत गरीबदास जी द्व...
12/06/2021

परमेश्वर कबीर जी ने कबीर सागर अध्याय ‘‘कबीर बानी‘‘ पृष्ठ 136 तथा 137 पर कहा है कि बारहवां (12वां) पंथ संत गरीबदास जी द्वारा चलाया जाएगा।

संवत् सतरह सौ पचहत्तर (1775) होई। जा दिन प्रेम प्रकटै जग सोई।।
साखि हमारी ले जीव समझावै। असंख्यों जन्म ठौर नहीं पावै।।
बारहवें पंथ प्रगट हो बानी। शब्द हमारे की निर्णय ठानी।।
अस्थिर घर का मर्म ना पावैं। ये बारा (बारह) पंथ हमही को ध्यावैं।।
बारहवें पंथ हम ही चलि आवैं। सब पंथ मिटा एक पंथ चलावैं।।

भावार्थ:- परमेश्वर कबीर जी ने स्पष्ट कर दिया है कि 12वें (बारहवें) पंथ तक के अनुयाई मेरी महिमा की साखी जो मैंने (परमेश्वर कबीर जी ने) स्वयं कही है जो कबीर सागर, कबीर साखी, कबीर बीजक, कबीर शब्दावली आदि-आदि ग्रन्थों में लिखी हैं। उनको तथा जो मेरी कृपा से गरीबदास जी द्वारा कही गई वाणी के गूढ़ रहस्यों को ठीक से न समझकर स्वयं गलत निर्णय करके अपने अनुयाईयों को समझाया करेंगें, परंतु सत्य से परिचित न होकर असँख्यों जन्म स्थाई घर अर्थात् सनातन परम धाम (सत्यलोक) को प्राप्त नहीं कर सकेंगे। फिर मैं (परमेश्वर कबीर जी) उस गरीबदास वाले पंथ में आऊँगा जो कलयुग में पाँच हजार पाँच सौ पाँच वर्ष पूरे होने पर यथार्थ सत कबीर पंथ चलाया जाएगा। उस समय तत्त्वज्ञान पर घर-घर में चर्चा चलेगी। तत्त्वज्ञान को समझकर सर्व संसार के मनुष्य मेरी भक्ति करेंगे। सब अच्छे आचरण वाले बनकर शांतिपूर्वक रहा करेंगे। इससे सिद्ध है कि तेरहवां पंथ जो यथार्थ कबीर पंथ है, वह अब मुझ दास (रामपाल दास) द्वारा चलाया जा रहा है। कृपा परमेश्वर कबीर जी की है। जब परमेश्वर कबीर जी ‘‘तोताद्रि‘‘ स्थान पर ब्राह्मणों के भण्डारे में भैंसे से वेद-मंत्रा बुलवा सकते हैं तो वे स्वयं भी बोल सकते थे। समर्थ की समर्थता इसी में है कि वे जिससे चाहें, अपनी महिमा का परिचय दिला सकते हैं। शायद इसीलिए परमेश्वर कबीर जी ने अपनी कृपा से मुझ दास (रामपाल दास) से यह 13वां (तेरहवां) पंथ चलवाया है।

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24 June 2021
आप सभी से विनम्र निवेदन है जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
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सच हो सपना अपना।दहेज मुक्त हो भारत अपना।💯💯💯💯💯%मृत्यु भोज करना और कराना दोनों ही गलत है।पूरी तरह से बंद होना चाहिए 💯💯💯% #...
11/06/2021

सच हो सपना अपना।
दहेज मुक्त हो भारत अपना।
💯💯💯💯💯%

मृत्यु भोज करना और कराना दोनों ही गलत है।
पूरी तरह से बंद होना चाहिए 💯💯💯%

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दहेज प्रथा और मृत्यु भोज दोनों को समाप्त करने में सभी आगे आए 🙏🙏


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24 June 2021

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11/06/2021

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संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित यह पुस्तक मानव समाज के लिए अनमोल तोहफा है ।
🙏अवश्य जानियें 🙏
1.ब्रह्मा, विष्णु, महेश के माता-पिता कौन है?
2. हमको जन्म देने व मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है?
3. हम सभी देवी-देवताओं की इतनी भक्ति करते है, फिर भी दुखी क्यों है?
4. ब्रह्मा, विष्णु, महेश किसकी भक्ति करते है?
5. परमात्मा साकार है या निराकार?
6. श्री कृष्ण जी काल नही थे! फिर गीता वाला काल कौन है?
7. पूर्ण परमात्मा कौन तथा कैसा है? कहाँ रहता है? कैसे मिलता है? किसने देखा है?
8.वर्तमान समय में प्रसिद्ध भविस्यवक्ताओ के अनुसार वह महान संत कौन है?
🙏अवश्य जानिये






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#तत्वदर्शी_संत

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24 June 2021

Sat sahib ji 🙏🙏

कबीर परमात्मा 600 साल पहले अपने निजलोक सतलोक से आकर नीरू और नीमा को पुत्र रूप में मिले। सतलोक गमन के समय कबीर जी ने मगहर...
09/06/2021

कबीर परमात्मा 600 साल पहले अपने निजलोक सतलोक से आकर नीरू और नीमा को पुत्र रूप में मिले। सतलोक गमन के समय कबीर जी ने मगहर से सशरीर सतलोक चले गए। मुस्लिमों और हिंदुओं को चादर में कबीर जी के शरीर की जगह सुगंधित फूल मिले जिन्हें उन दोनों ने आपस में बांट लिया। इसी उपलक्ष्य में 624वां कबीर प्रकट दिवस 24 जून, 2021 को मनाया जाएगा।

600 वर्ष पहले कबीर परमेश्वर ने भी यही ज्ञान बताया पर अशिक्षित होने के कारण हम समझ नहीं सके ।
अब दोबारा परमेश्वर ने यह समय चुना है भक्ति विधि बताने के लिए , जों शरण ग्रहण करेंगे वें जन्म मरण से छुटकारा पाएंगे बाकी यही 84 लाख योनियों में कष्ट उठाएंगे।।

#सद्भभक्ति


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24 जून 2021

सत साहेब जी 🙏🙏

  Sat saheb ji🙏🙏संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में बिना दहेज  के शादी। व्यर्थ खर्चा के बिना सिर्फ 17 minutes मे शादी 🙏🏻...
08/06/2021



Sat saheb ji🙏🙏
संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में बिना दहेज के शादी।
व्यर्थ खर्चा के बिना सिर्फ 17 minutes मे शादी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
💗💗💗 दहेज मुक्त विवाह🤗🤗🤗


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24 जून 2021

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