Irfan khan

Irfan khan सोशल मीडिया प्रभारी बाड़मेर जिला/AIMIM RAJASTHAN

इमरान खान / शेर खान को अध्यापक भर्ती परीक्षा 2025 में पूरे राजस्थान में 17वीं रैंक के साथ शानदार चयन होने पर हार्दिक मुब...
11/06/2026

इमरान खान / शेर खान को अध्यापक भर्ती परीक्षा 2025 में पूरे राजस्थान में 17वीं रैंक के साथ शानदार चयन होने पर हार्दिक मुबारकबाद।

यह कामयाबी आपकी मेहनत, लगन और काबिलियत का बेहतरीन नतीजा है। अल्लाह तआला आपको और भी बुलंदियाँ, कामयाबियाँ और इज़्ज़त अता फरमाए तथा आपके इल्म और खिदमत में बरकत नसीब फरमाए। आमीन।

बहुत-बहुत मुबारक हो! आपकी यह उपलब्धि पूरे परिवार, समाज और क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। अल्लाह तआला आपको हमेशा कामयाबी और तरक्की की राह पर कायम रखे। आमीन।

Imran Khan

11/06/2026

बांग्लादेशी बताकर किया था डिटेन वारिस पठान कि कामयाब नुमाइंदगी से सभी रिहा किया गया

🎉 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! 🎂अल्लाह तआला आपको लंबी उम्र, अच्छी सेहत, खुशियों से भरी ज़िंदगी और हर कदम पर कामयाबी अत...
10/06/2026

🎉 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! 🎂
अल्लाह तआला आपको लंबी उम्र, अच्छी सेहत, खुशियों से भरी ज़िंदगी और हर कदम पर कामयाबी अता फरमाए।
आपका हर दिन खुशियों, बरकतों और मुस्कुराहटों से रोशन रहे।

ग्राम पंचायत झलारिया

https://x.com/mr__irfu__04सभी भाई X पर फॉलो करे। 🙏
08/06/2026

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सोशल मीडिया प्रभारी बाड़मेर जिला (aimim)

राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। ...
08/06/2026

राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। तस्वीरें साफ़ बयां करती हैं कि यहां की हकीकत सरकारी दावों से कितनी अलग है। कहीं सड़कें टूटकर खंडहर बन चुकी हैं, तो कहीं पेयजल और पशुओं के पानी के लिए बने टांके सूखे और जर्जर पड़े हैं। कई स्थानों पर बिजली व्यवस्था भी बदहाल दिखाई देती है।

भीषण गर्मी के इस दौर में जब आमजन और बेजुबान पशुओं को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत है, तब पानी के स्रोत सूखे पड़े हैं। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। टूटी सड़कों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है और आपातकालीन स्थिति में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तस्वीरों में दिखाई दे रहे जर्जर जल ढांचे, सूखी खेलियां और खराब सड़कें यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर विकास के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे? क्या शिव विधानसभा के ग्रामीणों को अच्छी सड़क, पर्याप्त पानी और बेहतर बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पाने का अधिकार नहीं है?

आज जरूरत है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन केवल कागजी दावों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर उतरकर इन समस्याओं का स्थायी समाधान करें। शिव विधानसभा के लोगों की मांग कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि उनका बुनियादी हक है। जब तक गांवों में पानी, सड़क और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तब तक विकास के दावे अधूरे ही माने जाएंगे।

#शिव_विधानसभा

06/06/2026

Aimim जिला अध्यक्ष शफी जमील काशमी साहब

06/06/2026
बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा क्षेत्र का गांव सुकालिया/बिजराड़ आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहा है। एक ओर ...
05/06/2026

बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा क्षेत्र का गांव सुकालिया/बिजराड़ आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहा है। एक ओर भीषण गर्मी में तापमान 50 डिग्री के करीब पहुंच रहा है, तो दूसरी ओर गांव के लोग और बेजुबान पशु पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति केवल एक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां करती है।

गांव में लगा बोर लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन उसकी मरम्मत के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह है कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के लिए बनाई गई पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं और जल स्रोत वीरान नजर आ रहे हैं। ऐसे हालात में पशुपालकों के सामने अपने पशुधन को बचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

पानी की समस्या के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। गांव में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए बिजराड़ या अन्य दूरस्थ अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। एक बार अस्पताल जाने में लगभग 800 रुपये तक का खर्च आ जाता है, जो गरीब और मजदूर परिवारों के लिए बेहद भारी पड़ता है। कई बार आर्थिक मजबूरियों के कारण लोग समय पर इलाज तक नहीं करा पाते।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरहदी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकार नहीं है? वर्षों से समस्याएं उठाई जा रही हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले हैं। जब भीषण गर्मी में इंसान और बेजुबान पशु प्यास से जूझ रहे हों, तब जिम्मेदार विभागों की खामोशी चिंता और नाराजगी दोनों पैदा करती है।

प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे तत्काल प्रभाव से गांव के खराब पड़े बोर की मरम्मत करवाएं, नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करें, पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करें और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाएं। विकास का असली अर्थ तभी है जब उसकी रोशनी गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

बाड़मेर की तपती रेत पर जब तापमान 50 डिग्री के करीब पहुंच जाता है, तब पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि जिंदगी और मौत के बी...
05/06/2026

बाड़मेर की तपती रेत पर जब तापमान 50 डिग्री के करीब पहुंच जाता है, तब पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाता है। लेकिन शिव विधानसभा के गांव सुकालिया/बिजराड़ के हालात देखकर ऐसा लगता है जैसे यहां रहने वाले लोगों की प्यास और परेशानी किसी की प्राथमिकता ही नहीं है।

गांव का बोर लंबे समय से खराब पड़ा है। नतीजा यह है कि महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और बेजुबान पशु पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिन टंकियों में कभी पानी भरा रहता था, वहां आज सन्नाटा और सूखा पसरा हुआ है। पशु प्यासे हैं, लोग परेशान हैं और जिम्मेदार विभाग खामोश हैं।

दूसरी तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। गांव का कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे इलाज के लिए दूर बिजराड़ या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। एक गरीब मजदूर परिवार के लिए केवल आने-जाने में ₹800 तक खर्च होना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं। कई परिवार ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज तक नहीं करवा पाते।

सवाल यह है कि आखिर सरहदी गांवों के लोगों का कसूर क्या है? क्या उन्हें स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना उनका अधिकार नहीं है? क्या विकास केवल शहरों और बड़े कस्बों तक सीमित रहेगा? जब चुनाव आते हैं तो गांवों की याद आती है, लेकिन जब मूलभूत सुविधाओं की बात होती है तो वही गांव उपेक्षा का शिकार क्यों बन जाते हैं?

आज सुकालिया की पीड़ा सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम ग्रामीण इलाकों की हकीकत है जहां लोग अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि 50 डिग्री की भीषण गर्मी में इंसान और बेजुबान पशु पानी के लिए भटक रहे हों, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता का भी उदाहरण है।

प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को अब तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। खराब पड़े बोर की मरम्मत, पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।

सुकालिया के लोग दया नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। उन्हें भाषण नहीं, पानी चाहिए। उन्हें वादे नहीं, इलाज चाहिए। और सबसे बढ़कर उन्हें यह भरोसा चाहिए कि इस देश के विकास में उनका हिस्सा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी शहर में रहने वाले नागरिक का।

इरफान खान
सोशल मीडिया प्रभारी बाड़मेर जिला Aimim

Majlis Rajasthan Aimim Barmer Government of Rajasthan CMO Rajasthan

एक ओर सरकारें हर घर तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत सजन का पार (जिमाणीयो...
05/06/2026

एक ओर सरकारें हर घर तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत सजन का पार (जिमाणीयो का पांडा), बुडाणीयो का पांडा और बेहराणी की ढाणी आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रही हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गांव के लोगों की सबसे बड़ी चिंता पीने के पानी की व्यवस्था बन गई है।

जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद ग्रामीणों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए कई किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है। दिनभर की मेहनत के बाद भी कई परिवारों को जरूरत भर पानी नहीं मिल पाता।

पानी की इस विकट समस्या का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। गांव के बेजुबान पशु और पक्षी भी प्यास से बेहाल हैं। गांव के जल स्रोत सूख चुके हैं, पानी के होद और पशुओं की जल कूंड खाली पड़े हैं। ऐसे में पशुपालकों के सामने अपने पशुओं को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

यह स्थिति केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की हकीकत को भी उजागर करती है। जब भीषण गर्मी में लोगों को पीने का पानी न मिले, तो विकास के दावे अधूरे नजर आते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से पर्याप्त पानी की व्यवस्था की जाए तथा नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही पशुओं के लिए भी पानी की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि इस भीषण गर्मी में किसी को प्यास की मार न झेलनी पड़े।

पानी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। हर नागरिक को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

Faruk Nohary S K P Majlis Rajasthan Aimim Barmer

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