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जब दवा काम नहीं आती है,तब माँ की दुआ काम आती है।हर गली, हर शहर, हर देश-विदेश देखा,लेकिन मां तेरे जैसा प्यार कहीं नहीं दे...
14/05/2023

जब दवा काम नहीं आती है,
तब माँ की दुआ काम आती है।
हर गली, हर शहर, हर देश-विदेश देखा,
लेकिन मां तेरे जैसा प्यार कहीं नहीं देखा।
जो सब पर कृपा करे उसे ईश्वर कहते है,
जो ईश्वर को भी जन्म दें उसे मां कहते है।
मां कहती नहीं लेकिन सब कुछ समझती है,
दिल की और जुबां की दोनों भाषा समझती है।
और अंत में
ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमान कहते हैं और इस जहाँ में जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते है.. 👩‍🍼👩‍👦❤️

13/05/2023
13/05/2023

प्रसंग १३७ श्री अष्टावक्र गीता - एक मात्र अद्वैत स्वरूप, अव्यय, शान्त, चैतन्य रूप, निर्मल (शुद्ध) तुझमें कहां जन्म, कैसे कर्म, कहां अहंकार अर्थात् इन सबका तो प्रश्न ही नहीं उठता। – अष्टावक्र जी जनक से फिर कहते हैं कि आत्मा तो शुद्ध है, उसमें किसी प्रकार का कोई विकार नहीं है। यह अविनाशी है, शांत है, इसमें लहरें नहीं उठतीं तथा यह चेतना मात्र आकाश के समान सब जगह है सदैव स्थित रहने वाली है इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु, इसमें न तो कार्य है और न ही अभिमान । हे जनक! तू आत्मा है इस कारण ये सभी गुण तेरे ही गुण हैं। ये समस्त दोष चित्त, देह, अभिमान के हैं, जिनसे तू अलग है। अपने को आत्म स्वरूप जान लेने से इनका आभास नहीं होता। क्रमश:🕉️🕉️🕉️🙏

08/05/2020

साजिश देखिए अब गायत्री पीठ के प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या के खिलाफ एक नाबालिक बच्ची ने बलात्कार का केस दर्ज करवाया है

मजे की बात यह कि उस बच्ची ने यह लिखा है कि बलात्कार में उनकी पत्नी ने अपने पति की मदद किया

और सबसे आश्चर्य यह कि वह लड़की अब 28 साल की हो चुकी है और पूरे 10 साल बाद उसे याद आया कि उसके साथ बलात्कार हुआ था

अब भला कौन सी ऐसी भारतीय पत्नी होगी जो बलात्कार के केस में अपने पति की मदद करेगी ?

अब धीरे-धीरे यह वामपंथी, चर्च यह मिशनरी यह इस्लामिक संगठन एक-एक करके हिंदू संतों और संन्यासियों को ठिकाने लगाएंगे

30/04/2020

संसार को दोष मत दो ! अपने मन को समझो।
मन ही तुम्हारा असली संसार है।

लेकिन मन की तो हम चिंता नहीं करते, मन को तो लिए फिरते है, मन को तो सजाते है, संसार को गालियां देते है।

संसार जिसने तुम्हारा कुछ भी बिगाड़ा नहीं।
यह वृक्षों का संसार, यह चांद - तारों का संसार, ये आकाश में सूरज ये बदलियां, इसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा ?

यह विराट की अदभुत लीला, इसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा ?
इसको गाली देते हो, कहते हो, यह सब माया।

और भीतर तुम्हारे जो माया का मूल स्रोत है, तुम्हारी कल्पनाओं का जाल, तुम्हारी आकांक्षाओं का जाल, तुम्हारी तृष्णाओं का अनंत - अनंत फैलाव, उसको गटके बैठे हो।
उसको उगलो, उसको थूको, वही है भूल।
मैं तुम्हारे मन को संसार कहता हूं

30/04/2020

जो अभी नहीं सुधरा !

उसके लिए भगवान की क्या तैयारी होगी ,
सोचो जरा 🤔

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