Uttarakhand Special

Uttarakhand Special #पहाड़ी
(1)

18/04/2026

आज हर किसी को आरक्षण चाहिए तो जब सबको आरक्षण चाहिए आखिर एक आप आदमी जाएगा कहा ।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, OBC,आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिला आरक्षण, दिव्यांग आरक्षण, पूर्व सैनिक आरक्षण, खेल कोटा, स्वतंत्रता सेनानी कोटा, तथा राज्य/क्षेत्र आधारित (पिछड़ा क्षेत्र) आरक्षण।

अगर आरक्षण होना चाहिए तो सिर्फ और सिर्फ दिव्यांग आरक्षण .




Bharatiya Janata Party (BJP)

12/04/2026

Jay shree ram

25/03/2026

Kedarnath Yatra Map

जय बद्री विशाल l
18/03/2026

जय बद्री विशाल l

18/03/2026
19/02/2026
26/01/2026
25/01/2026

UGC Bill क्या है?
UGC Bill यानी University Grants Commission Bill एक प्रस्तावित कानून है, जिसका मकसद भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली (कॉलेज–यूनिवर्सिटी) में बड़े बदलाव करना है।
इस बिल के ज़रिए मौजूदा UGC Act, 1956 को बदला/हटाया जाना प्रस्तावित है।
🎯 UGC Bill का मुख्य उद्देश्य
शिक्षा व्यवस्था को ज़्यादा स्वायत्त (Autonomous) बनाना
क्वालिटी एजुकेशन पर फोकस
राजनीतिक दखल कम करना
यूनिवर्सिटीज़ को बेहतर और वैश्विक स्तर का बनाना
🧩 UGC Bill की प्रमुख बातें
1️⃣ नई संस्था का गठन
UGC की जगह एक नई बॉडी बनाने का प्रस्ताव है, जो:
यूनिवर्सिटी खोलने
डिग्री देने
नियम बनाने
क्वालिटी कंट्रोल
सब कुछ देखेगी।
2️⃣ यूनिवर्सिटी को ज़्यादा आज़ादी
यूनिवर्सिटी खुद कोर्स, फीस और ढांचा तय कर सकेगी
सरकार का सीधा हस्तक्षेप कम होगा
3️⃣ डिग्री देने का अधिकार
सिर्फ मान्यता प्राप्त संस्थान ही डिग्री दे सकेंगे
फर्जी कॉलेजों पर सख्ती होगी
4️⃣ शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़ोर
फैकल्टी, सिलेबस और रिसर्च की नियमित समीक्षा
अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से शिक्षा
⚠️ विवाद और विरोध क्यों?
कुछ लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि:
इससे राज्यों का अधिकार कम हो सकता है
शिक्षा का निजीकरण बढ़ने का डर
फीस बढ़ने की आशंका
केंद्र सरकार का कंट्रोल ज़्यादा हो सकता है
🧠 छात्रों के लिए क्या असर?
✅ अच्छी शिक्षा और नए मौके
❌ लेकिन फीस और बराबरी को लेकर चिंता

23/01/2026

जय मां नंदा देवी।
इतिहास- लोक जागर, पांवड़े, गीत , वर्तमान तक अक्षुण्ण परंपराओं पर आधारित
गढ़ नरेश अजयपाल पर कुरुड की नंदा का दोष लगने से उन्होंने वचन दिया कि में कुरुड में विराजमान नंदा को अपनी अधिष्ठात्री भगवती मानता हूं और हर बारह साल में हेमकुंड तक यात्रा कराऊंगा । कालांतर में उनके वंशजों ने कंसुआ के राजपरिवार जो कि गढ़वाल नरेश के अधीन थे उनको मार्ग की दुर्गमता को देखते हुए ये जिम्मेदारी दी । भगवती की हर साल लोकजात होती रही लेकिन बारह वर्षों की बड़ी जात के लिए कुंवर कुरुड में तिथि निश्चित करने गौड़ पुजारियों पे जाते थे । उनके साथ उनके राजपुरोहित नौटी के नौटियाल , अन्य दरबारी भी होते, या उससे भी पूर्व चांदपुर गढ़ में ये कार्यक्रम होता था। फिर भगवती कुरुड से जन्माष्टमी को उठती फिर नंदकेसरी में कंसुआ से राजा बधान की नंदा को चौसिंगया और छत्र भेंट करता वहां पर अन्य डोलियां भी भगवती को मिलती। वहां से बधान की नंदा कि अगवाई में यात्रा वाण फिर लाटू की अगवाई में होमकुंड पहुंचती।

लेकिन 1987 में एक अलग इतिहास की रिपोर्ट बना कर सरकार को भेजी गई । जिसमें नौटी को भी यात्रा में अंकित किया गया और उसे राजजात का(बड़ी जात का नाम बदल के) प्रथम पड़ाव बनाया गया। फिर एक NGO राजजात समिति के नाम से रजिस्टर्ड की गई जो इसका संचालन देखेगी । उस NGO में सरकार का बजट आता, वो अन्य कई स्रोतों से फंडिंग प्राप्त करती। वो रिपोर्ट किस मनसा से किस स्रोत से तथ्य लेकर बनाई गई ये समझना चाहिए।

बहरहाल नौटी के नौटियाल कुंवरों के राजपुरोहित थे जो उनके हर काम में सलाह देते। लेकिन नंदा देवी के पुजारी तबसे लेके आज तक गौड़ हैं जो कुरुड में हैं। 1987 के बाद जब सरकारी बजट आना शुरू हुआ आम प्रचार प्रसार में बड़ी जात का रूप बदला जो राजजात कहलाने लगी और उसका मार्ग नौटी से शुरू होने लगा। इसमें कुरुड की भगवती की बात सरकारी दस्तावेजों में जगह नहीं बना पाई क्योंकि वहां के लोग तब इतने शिक्षित भी नहीं थे।

अब जब सब जगह शिक्षित लोग हैं और सोशल मीडिया है तो सरकारी इतिहास पे पुनर्विचार करके उसको सुधारना चाहिए। और कुरुड से हो रही बड़ी जात को पुनः उसी रूप में संचालित करना चाहिए। बाकि राजतंत्र तो 1947 में भारत छोड़ चुका है। लोकतंत्र में पुरानी परंपराओं को चलने की जिम्मेदारी आम लोगों की होनी चाहिए या जनता की चुनी सरकार की। कोई किसी का वंशज है ये उन्हें एकाधिकार नहीं देता कि जब चाहे बड़ी जात कराए जब चाहे उसे स्थगित कर दे। साथ ही NGO की बात तभी सर्वमान्य होगी जब हर गांव के प्रधान को उसका सदस्य बनाया जाए और उनकी राय ली जाए।

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