15/05/2024
श्री राधे राधे
चलो मन ! श्री वृंदावन धाम।
जहँ विहरत नागरि अरु नागर, कुंजनि आठों याम।
भूख लगे तो रसिकन जूठनि, खाइ लहिय विश्राम।
प्यास लगे तो तरणि - तनूजा, तट पिवु सलिल ललाम।
नींद लगे तो जाइ सोइ रहु, लतन - कुंज अभिराम।
ब्रज की रेनु रेनु लखि चिन्मय, तन्मय रहु अविराम।
पै *‘कृपालु’* मन ! जनि यह भूलिय, भाव रहे निष्काम।।
*भावार्थ:*- हे मन ! तू दिव्य चिन्मय वृन्दावन-धाम में चल, जहाँ लाड़िली और लाल विविध कुंजों में आठों याम विहार किया करते हैं। यदि तुझे भूख लगे तो महापुरुषों की जूठन खाकर सुखी होना। जब प्यास लगे, यमुना का निर्मल जल पी लिया करना। जब सोने की इच्छा हो तब स्वाभाविक बने हुए लताओं के कुंज घरों में सो जाया करना। अरे मन ! ब्रज के प्रत्येक कण-कण में चिन्मय-स्वरूप देखते हुए सदा ही तन्मय रहा करना।
किन्तु यह न भूलना कि इन सब में तेरा भाव निष्काम ही रहे।
श्री राधे राधे 🌹 भरतपुर राजस्थान में श्री बांके बिहारी जी के श्रृंगार दर्शन 15/05/24🌹 अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏