Indian Tribal Culture

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"Bhagoria was started by the king of the Bhogor princely state of Jhabua district."भगौरिया पर्व : झाबुआ अंचल के राजा कसू...
01/02/2026

"Bhagoria was started by the king of the Bhogor princely state of Jhabua district."

भगौरिया पर्व : झाबुआ अंचल के राजा कसूमर डामोर ने भगौरिया पर्व की शुरुआत राजधानी भगोर में की। इस उत्सव को सन् 1009 में प्रारंभ किया था और प्रति वर्ष मनाने से राजा कसूमर डामोर ने भगौर से भगौरिया नामांकरण किया। राजा कसूमर डामोर भगौरिया उत्सव के संस्थापक थे।

राजा कसूमर डामोर अपने परिवार के साथ एक उत्सव मनाने भगोर के मैदानी क्षेत्र में भील प्रजा समूह के साथ जाया करते थे।

यह लगभग सन् 1009 के आसपास की बात है। जब भील प्रजा भगोर में चारों दिशा के गाँव से चलकर यह पर्व हर्षउल्लास के साथ मनाने आया करते थे।

जिसमें सभी भील लोग उत्साह से भाग लेते थे। खासकर युवक-युवतियाँ आकर्षक परिधान सोना-चाँदी के गहनों से लदी होती थी और सजधज कर उत्सव का आनंद उठाती थी।

हर गाँव के भील युवक अपने गाँव का बड़ासा मांदल, थाली बजाने लाया करते थे। मांदल की थाप पर भी युवक-युवतियाँ बाहों में बाहे डालकर आमने-सामने नाचगान प्रस्तुत किया करते थे।

हजारों की संख्या में भौल युवक अपना प्रिय वाद्य बांसुरी की सुरीली आवाज में बजाकर वातावरण को मोहक बना देते थे।

भील लोग आकर्षक वेशभूषा के साथ मांदल, थाल, बांसुरी, गोफन, फालिया और तीर कमान के साथ बड़ी संख्या में उपस्थित होते थे।

भील युवक भीली शैली में सफेद रंग की धोती को लपेट कर पहनते थे। उपर काले रंग की बड़ी (झुलडी) एवं सिर पर सफेद रंग का बड़ा सा साफा पहन कर आते थे। साफे में कलगी और गोफन बन्धी होती थी। भील महिला रंगीन घाघरा गेलका पहनकर गले में हासली पैरो र बाड़ों में चाँदी के कड़े, चुडीयाँ विशेष आकर्षण का केंद्र होती मील

थो। समां भील जन मांदल की ताप पर झूम झूम के नृत्य करते थे। आज भी भगोरिया पर्व बड़ी धूमधाम हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

भीलों का भगोरिया च आने वाला है आप सभी को बधाई।

1 जनवरी 1948 - खरसावां गोलीकांड यह कोई तारीख़ नहीं, आदिवासियों के खून से लिखा इतिहास है निहत्थे आदिवासियों पर गोलियाँ चल...
01/01/2026

1 जनवरी 1948 - खरसावां गोलीकांड यह कोई तारीख़ नहीं, आदिवासियों के खून से लिखा इतिहास है

निहत्थे आदिवासियों पर गोलियाँ चलाई गईं। महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग - किसी को नहीं छोड़ा गया। हज़ारों शहीद हुए, लेकिन सच को दबा दिया गया। देश आज़ाद हुआ, पर आदिवासी नहीं।।

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