Organic terrace garden -JMP".

Organic terrace garden -JMP". जहर मुक्त प्राकृतिक(organic)शुद्ध सात्विक भोजन करो । organic terrace garden(jmp)

*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जिसको एक बार लगा देने के बाद अगले 60 साल तक फसल ले सकते हैं। *बांस की खेत...
26/03/2023

*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जिसको एक बार लगा देने के बाद अगले 60 साल तक फसल ले सकते हैं।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जिसको एक बार लगा देने के बाद हर बार पैदावार कुछ न कुछ बढ़कर मिलेगा।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जिसमें अलग से कोई रखरखाव पानी या खाद की आवश्यकता नहीं होती है।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जो प्रति एकड़ प्रतिवर्ष ₹200000 से ₹500000 तक का लाभ दे सकता है।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जो ऊसर बंजर जलभराव या किसी भी प्रकार का जमीन जिसमें और कोई फसल नहीं हो सकता है वहां बांस की खेती किया जा सकता है।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जो किसानों को कर्ज से उबारकर सम्मान पूर्वक जीने का अवसर दे सकता है।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जो पूरे दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से बचा सकता है।
*बांस की खेती इस पृथ्वी पर एकलौता ऐसी खेती है* जिससे कपड़ा भी बनाया जा सकता है कागज भी बनाया जा सकता है चम्मच प्लेट थाली और गिलास भी बनाया जा सकता है इससे घर भी बनाया जा सकता है सोफा भी बनाया जा सकता है बेड भी बनाया जा सकता है डायनिंग टेबल भी बनाया जा सकता है।
*और आने वाले दिनों में एथेनॉल प्रोडक्शन के क्षेत्र में बांस दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन लाकर दुनिया के अर्थ गणित को बदलने में पूरी तरह सक्षम है।*

03/03/2023

नर्सरी पौधों की सुरक्षित रिपार्टिंग

लोकल नर्सरी अथवा आनलाइन पौधे अनेकों बार हमारे यहां लगाने पर जीवित नहीं रह पाते। मैं स्वयं अनेकों पौधों को खो चुका हूं। पौधे नर्सरी में अन्य राज्यों से ट्रांसपोर्ट अथवा कोरियर से आते हैं। रास्ते में पौधों की जड़ डिस्टर्ब न हो इस हेतु मिट्टी कड़क रहती है। पौधों को प्लास्टिक की थैली में से निकालकर वैसे ही गमलों में लगा देने से ही समस्या निर्मित होती है। नर्सरी की कड़क मिट्टी में पानी ठीक से नहीं पहुंच पाता, जड़ों को फैलने हेतु मिट्टी नरम होना आवश्यक है।
1- नर्सरी से पौधे लगाने के 2-3 दिन तक उन पौधों को पानी डालकर अपने अन्य पौधों के साथ रख दें । जिससे आपके यहां के वातावरण के अभ्यस्त हो जाय ।
2- दो तीन दिन बाद रिपार्टिंग करने हेतु प्लास्टिक बेग या नर्सरी पाट अलग कर पौधे को मिट्टी सहित 10-15 मिनट के लिए पानी में रख दें। पौधे की संपूर्ण मिट्टी पानी में डूब जाए ।
3- रिपार्टिंग वाले गमले को खाद मिट्टी के मिक्सचर से आधा भरकर तैयार रखें।
4- पानी में से पौधा निकालकर अधिकतम मिट्टी हटा देवे। ऐसा करने से जड़ खुल जाएगी, स्पष्ट दिखने लगेगी। बहुत थोड़ी मिट्टी पौधे में रहेगी , जो कि ढीली भी हो जाएगी।
5- आधे मिट्टी से भरे गमले में तुरंत पौधे को लगाकर खाद-मिट्टी के मिक्सचर से भर देवें।
6- पौधे में पानी देकर 15 दिन छाया में रखें। डायरेक्ट सनलाइट नहीं लगे ।
7- नित्य निरीक्षण करने पर जब भी मिट्टी सूखी लगे तो थोड़ा थोड़ा पानी देते रहे।

02/01/2023

1 जनवरी 2023 से अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष आरंभ हो गया ... अनाज तो सुना था ये मोटा अनाज क्या नया बवाल आ गया ? तो अनाज दो भागो में बांटा गया है। सामान्य अनाज जिसमे गेहूं चावल आता है । मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, सावा, कोदो, चीना, कुटकी जैसे अनाज आते है।

तो बात कुछ यूं है की हम मोटे अनाज वाले ही थे । ज्यादा नहीं, आज से सिर्फ 50-60 साल पहले हमारा खान पान बिल्कुल अलग था । हमारे भोजन का एक बड़ा हिस्सा मोटा अनाज होता था और हम मोटा अनाज खाने वाले लोग थे ।

हरित क्रांति के आने से हमारी थाली में गेहूं और चावल घुसते चले गए और मोटा अनाज दूर होता चला गया और इतना दूर हो गया की पूरी दो पीढ़ी के बहुत से लोगो ने तो बहुत से मोटे अनाजों का नाम भी नही सुना होगा देखने की बात तो बहुत दूर की है।

हर क्षेत्र के अपने अपने मोटे अनाज है कहीं ज्वार तो कहीं बाजरा कहीं रागी तो कहीं सांवा लेकिन उगाए सब जगह जाते थे। बढ़ती सिंचाई सुविधा, उर्वरक, दवाइयों ने मोटे अनाजों की खेती को आर्थिक रूप से लाभप्रद नही रखा और वो चलन से बाहर हो गए।

लेकिन सब परिवर्तनशील है मोटे अनाजों का दौर फिर से आया और गरीबों की थाली का भोजन बढ़िया पैकेट में बंद होकर ऑर्गेनिक के नाम से मॉल और बड़े किराना स्टोर पर प्रीमियम कीमतों पर बिकने लगा। भूले बिसरे मोटे अनाजों के दिन फिर गए ।

आज पूरी दुनिया उसी भुला दिए गए मोटे अनाजों की तरफ वापस लौट रही है। कल से विश्व मोटा अनाज वर्ष आरंभ हो जायेगा। तो प्रण लीजिए अपने अनाज उपभोग का 25 प्रतिशत भाग मोटा अनाज खायेंगे वो कुछ भी हो सकता है आपकी पसंद, बजट और उपलब्धता के आधार पर। आप उपभोग करेंगे बाजार में मांग बढ़ेगी मांग बढ़ेगी तो उत्पादन बढ़ेगा और लोग इसकी खेती की तरफ अग्रसर होंगे । जो कहीं न कहीं चावल और गेहूं की एकतरफा खेती से कृषि को परिवर्तित करने में सहायक होंगे।

किसानों से भी अनुरोध रहेगा थोड़ा थोड़ा मोटा अनाज अवश्य लगाएं ये गेहूं और चावल की तुलना में बहुत पौष्टिक होते है बेचने के लिए न सही खुद खाने के लिए जरूर लगाएं।

सभी को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष आरंभ होने की बहुत बहुत शुभकामनाए !

30/12/2022

मेरी छोटी सी नर्सरी
किसी भी एक प्लांट को पहचान कर कॉमेंट में नाम लिखो

27/12/2022

प्रकृति को बचाने के लिए
हमें अपनी प्रवृत्ति सुधारनी होगी..।।

Address

Bahadurgarh

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Organic terrace garden -JMP". posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category