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25/07/2026

#भारतविमर्श

08/07/2026

#भारतविमर्श
जरा सोचो .......

उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा,लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे
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अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर हो या नालन्दा विश्वविद्यालय को आग की भेट चढ़ाने वाले बख्तियार खिलजी दोनो ने प्राचीन ज्ञान को नष्ट करने का बर्बर कार्य किया परन्तु इतिहास में इसे छोटी घटना बना कर भुला दिया गया, क्यों ??

तैमूर, नादिर, गौरी, गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बर्बर हत्यारो को विजेता के रूप में हमे इतिहास की किताबो में परोसा गया , क्यो ?

अल-तकिय्या (धार्मिक झूठ ) में लिप्त अपने इन पैशाचिक गुणों के कारण इन्होंने अपने अंदर एक ऐसी कला विकसित की जिससे इन्होंने केवल समस्त जनसामान्य को ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिरो को भी अब तक भ्रमित करके रखा है। ये घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद ... स्वयं को जुल्म का शिकार (विक्टिम) प्रदर्शित करने में माहिर है।

इनकी यह कला है ...झूठा नैरेटिव गढ़ने की ..

इन्होंने अपनी इस कला से ... उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया ... वरन् उल्टे सभी धार्मिक जनों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया। उनकी यही कुटिलता के जाल में समस्त हिन्दूसमाज फंस कर रह गया है।

जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक ही खलीफाई सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों, या गंगा-जमुनी तहज़ीब ओढ़े .... मौन समर्थन करके ... ताकत पकड़ने तक के इन्तेज़ार में खड़े हुए है, उनसे बचाव कैसे ??

जरा देखिये और सोचिये ... अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं ... पर कभी भी .... इस्लाम को दुनिया में ज़लील करने वाले आतंकवाद के खिलाफ सरकार पर दबाव नहीं बनाते ... क्योंकि यही बर्बरता उनकी उनकी शिकारी-लुटेरी सभ्यता की आत्मा है, वजूद का अहम हिस्सा‌ है ।

-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।

-उन्होंने 1946 में लगभग 100% पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद ... सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया ... कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया ... जबकि संविधान विभाजन (1947) के तीन वर्ष बाद 1950 में लागू हुआ था।

-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में ... खिलाफत आंदोलन में भाग लिया ... पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा कि भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।जबकि वे अंग्रेजों से सत्ता हथियाकर ... भारत में खलीफाई सल्तनत बनाने के लिए लड़े थे ।

-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक ... वे अंग्रेजों की गोदी में खेलते रहे ... लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक ... सावरकर के माथे पर लगा दी गयी ।

-संसार में नब्बे प्रतिशत आतंकवादी घटनाएं अंजाम देने व जिम्मेवारी लेने के बावजूद भी ... सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि ... आतंकवाद का कोई धर्म नहीं ... लेकिन कोर्ट में निर्दोष साबित हुए ... साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से ... *हिंदू आतंकवाद* का नैरेटिव गढ़ देते हैं।

-बछडाचोर अखलाक व एक चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन.. चंदन गुप्ता और निरीह ... भरत यादव , अंकित शर्मा जैसे अनेको की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।

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07/07/2026

07/07/2026

05/07/2026

आपके लड़के की उम्र है १५ या २० साल। इस उम्र में उसको साल में पाँच छह बार जींस पैंट या टीशर्ट ख़रीदने की आदत होती है। वो जाकर ख़रीद लेता हैं। ख़रीदने के बाद पहनता है और घूमने या खेलने या कोचिंग करने निकल पड़ता है।

वहाँ उसको मिलते हैं उसके एक दो मुस्लिम दोस्त भी। वहाँ पर देखते ही तारीफ़ होती है किं ये टीशर्ट तो एकदम ग़ज़बे लग रहा है। कितने में लिये?
सही है यार।

इसके बाद वह मुस्लिम दोस्त बताता है....अरे एक मेरा दोस्त का या भाई का अमुक जगह पर मार्केट में एक दुकान है। वहाँ एकदम लेटेस्ट और ज़बरदस्त क्वालिटी के कपड़े या जूते मिलेंगे। इतने कम में तो सोच भी नहीं सकते हो।

अब आपके लड़के की आँखें चमक उठेंगी, उम्र ही ऐसी है, जितने नये कपड़े और जूते मिल जायें....कम पड़ते हैं। वह आज ही कपड़े ख़रीद कर पहना है लेकिन एक दो दिन में ही उस अमुक दुकान में जाएगा।

वहाँ जाते ही आपका नाम बता कर आपस में ये लोग इशारे कर लेते हैं। आपके लड़के को एकदम से सस्ते में जींस पेंट शर्ट जूते चप्पल आदि मिल जाएँगे और आपके लड़के को ऐसा लगेगा कि जैसे इस कोचिंग वाले दोस्त ने उसके ऊपर बहुत बड़ा एहसान कर दिया है।
जो मुस्लिम दोस्त आपके लड़के को ले गया था, उससे दोस्ती बढ़ेगी, दिन रात msg और कॉल पर बातें या मिलना जुलना ज्यादा बढ़ जाएगा। वह किसी भी चीज की ख़रीदारी के लिए सस्ते में दुकान बताएगा।

आपको पता नहीं चलेगा कि आपका ये हिंदू बेटा कब और कैसे अपने धर्म से विमुख होकर इस्लाम से प्रभावित हो गया है। उसको हिंदू दोस्तों से ज़्यादा मुस्लिम दोस्त बहुत अच्छे लगने लगेंगे क्योंकि कोई सस्ते में पैंट दे रहा है कोई चप्पल दे रहा है तो कोई १०० की जगह २५ में ही मोबाइल रिपेयर करके दे दे रहा है।

एकदम same सिचुएशन आपकी बेटी के साथ भी होता है , आपका ही लड़का नये नये चीजों को दिखा कर अपनी बहन को कहता है कि मेरा एक अब्दुल, आफ़ताब, साहिल दोस्त है जिसके वजह से इतने सस्ते में ये सारी चीजें मिली है।

और बेटी को तो १०० का माल २५ में नहीं बल्कि मुफ़्त में ....'गिफ्ट; के तौर पर दिया जाता है। वह बेटी मोबाइल, घागरा, पर्स आदि लेते लेते एक दिन रेस्टोरेंट में मुफ़्त का खाना खाने भी पहुँच जाती है जहां एक प्लेट की क़ीमत २ हज़ार से ३ हज़ार भी होता है एकदम शाही अन्दाज़ में भोजन हो जाता है और आपकी बेटी ऐसे लाइफ स्टाइल की मुरीद हो जाती है।
लड़कियों को ऐसी लाइफस्टाइल का बहुत ज़्यादा शौक़ होता है। बाद का हाल तो पता ही है अब वो बेटी अपने बाप को बुरा आदमी समझ सकती है लेकिन मुस्लिम दोस्तों को नहीं।

ये जो कई तरह से, महीनता के साथ आपकी ज़िंदगी में घुसते हैं ना, इसकी खबर आपको लगती ही नहीं है। आपको पता तब चलता है जब वो लोग पूरे खेल का परिणाम हासिल कर लेते हैं।

बचने का उपाय कोई बाहर वाला तो आकर नहीं दे सकता .....पर आप घर में बेटे बेटियों को पहले तो खर्च और दिखावा करने की आदत पर ढंग से समझाइए। उसको बताइए कि अच्छा स्वास्थ्य से बढ़ कर कोई सुंदरता नहीं होती।
दूसरा उस क़ौम के दुकान से कितना भी सस्ता मिले तो आप ले लो लेकिन किसी दोस्त के माध्यम से वहाँ मत पहुँचो। किसी के कहने पर मत जाओ। इसमें bheemte भी अपनी भूमिका निभाते हैं और आपको मुस्लिम दुकान का पता बतायेंगे। वैसे तो मजबूरी ना हो जाये तब तक ऐसे दुकान का रुख़ ही मत करो।
कल ही मुझे एक सिम कार्ड लेना था, दुकान गया तो देखा टोपी वाला लड़का तो अब काउंटर तक चला ही गया था तो बस rate पूछा और फिर लौट गया।

आगे बढ़ा तो एक हिंदू लड़के का दुकान दिख गया। मराठी करके का था। वहीं से सिम कार्ड लिया एयरटेल का २५० रुपया में। अरे यार इतना तो कर ही सकते हो। चार कदम आगे एक हिंदू दुकान भी है, हमें सिर्फ़ मन में निश्चय करके लौटने की प्रवृत्ति डालनी होगी।
साला मैं तो दिमाग़ में यह भी सोच रहा था कि फ़ेसबुक पर बॉयकॉट लिखता हूँ या पढ़ता हूँ तो यह बॉयकॉट करूँगा कब? अगले दिन से? अगले महीने से? .....या ये सोचूँ कि एक सामान ले लेता हूँ, क्या ही हो जाएगा और अगले बार से नहीं ख़रीदूँगा।।।। यही तो होता है इनके दुकान के सामने पहुँचने पर मनःस्थिति।
पर नहीं मैंने बस rate पूछा और वापिस बाइक स्टार्ट करके आगे निकल गया।

बाक़ी आप सब समझदार है, कैसे क्या करना है, घर में बेटे बेटियों को कैसे सम्भालना है, वह ख़ुद के विवेक से निर्णय लीजिए।

05/07/2026

यदि #मोमिन #भारत में ना होता -
1) कम से कम हमारी जनसँख्या 35 करोड़ कम होती
2) अनपढ़ लोग कम होते
3) जेलें कम होती
4) देश में दो कानूनों की जरूरत नही पड़ती
5) दिन में 5 बार मस्जिदों से चिल्लाने की आवाज़ नही बर्दाश्त करनी पड़ती
6) बुर्कों में घुमते भूत-प्रेत नही मिलते
7) मांसाहार कम होते
8) दंगे फसाद, बम, आतंकवाद, वोट बैंक पॉलिटिक्स-सब कम या खत्म
9) ज़्यादा लोग टैक्स देते, ज़्यादा विकास होता
10) सैनिकों को पत्थर नही खाने पड़ते
11) हमारे देवी-देवताओं, मंदिरों का अपमान ना हुआ होता।
12) हमें भी अपने स्तर से गिर, जवाब ना देना पड़ता
13) जय भीम जय मीम की कोई गुंजाईश नही
14) मीडिया के असुर ना होते
सबसे ज़रूरी
देश का बंटवारा ना हुआ होता
कुछ रह गया हो तो बताइए ....

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21/06/2026

गीता तुम्हें लड़ना सिखाती है, पलायन करना नहीं!
श्रीमद्भगवद्गीता हमें जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं, बल्कि उनका साहसपूर्वक सामना करना सिखाती है। अर्जुन की तरह जब जीवन में भ्रम और कठिनाइयाँ आएँ, तब गीता का ज्ञान हमें सही मार्ग दिखाता है। कर्म करो, संघर्ष करो और धर्म के मार्ग पर अडिग रहो। 🚩📖🔱


🔸𝐒𝐡𝐚𝐫𝐞🔸
🪀

18/06/2026

विख्यात वामपंथी कवि धूमिल ने लिखा था *हिजड़ों ने भाषण दिए लिंग-बोध पर, वेश्याओं में कविता पढ़ी आत्म-शोध पर* धूमिल की प्रासंगिकता उन्हीं के लोग बनाये हुए हैं।
असल मे दोष इनका नहीं है। इस देश की प्रजा प्रधानमंत्री को मंदिर में पूजा करते देखने की आदी नहीं है। *इस देश ने एडविना माउंटबेटन की कमर में हाथ डाल कर नाचते प्रधानमंत्री को देखा है। इस देश ने मजारों पर चादर चढ़ाते प्रधानमंत्री को देखा है। यह जनता प्रधानमंत्री को पार्टी अध्यक्ष के सामने नतमस्तक होते देखती आयी है,* फिर मंदिर में भगवान के समक्ष नतमस्तक प्रधानमंत्री को लोग कैसे सहन करें ?
बिहार के एक बिना अखबार के पत्रकार मंदिर से निकल कर सूर्य को प्रणाम करते प्रधानमंत्री का उपहास उड़ा रहे हैं। एक महान लेखक जिनका सबसे बड़ा प्रशंसक भी उनकी चार किताबों का नाम नहीं जानता, प्रधानमंत्री के भगवा चादर की आलोचना कर रहे हैं। *एक कवियित्री जो अपनी कविता से अधिक मंच पर चढ़ने के पूर्व सवा घण्टे तक मेकप करने के लिए जानी जाती हैं, प्रधानमंत्री के पहाड़ी परिधान की आलोचना कर रही हैं। भारत के इतिहास में आलोचना कभी इतनी निर्लज्ज नहीं रही, ना ही बुद्धिजीविता इतनी लज्जाहीन हुई कि गांधीवाद के स्वघोषित योद्धा भी बंगाल की हिंसा के लिए ममता बनर्जी का समर्थन करें।*
क्या कोई व्यक्ति इतना हताश हो सकता है कि किसी की पूजा की आलोचना करे? क्या इस देश का प्रधानमंत्री अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर की आराधना भी नहीं कर सकता? क्या बनाना चाहते हैं देश को आप? सेक्युलरिज्म की यही परिभाषा गढ़ी है आपने? एक हिन्दू नेता का टोपी पहनना उतना ही बड़ा ढोंग है, जितना किसी ईसाई का तिलक लगाना। लेकिन जो लोग इस ढोंग को भी बर्दाश्त कर लेते हैं, उनसे भी प्रधानमंत्री की शिव आराधना बर्दाश्त नहीं हो रही। संविधान की प्रस्तावना में वर्णित "धर्म, आस्था और विश्वास की स्वतंत्रता" का यही मूल्य है आपकी दृष्टि में?
व्यक्ति विरोध में अंधे हो चुके मूर्खों की यह टुकड़ी चाह कर भी नहीं समझ पा रही कि *मोदी एक व्यक्ति भर हैं,आज नहीं तो कल हार जाएंगा कल कोई और था, कल कोई और आएगा। देश न इंदिरा पर रुका था, न मोदी पर रुकेगा।*
समय को इस बूढ़े से जो करवाना था वह करा चुका। मोदी ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है। *मोदी ने ईसाई पति की बौद्ध पत्नी श्रीमती प्रियंका वाड्रा (गांधी) से महाकाल मंदिर में रुद्राभिषेक करवाया है। मोदी ने राहुल गांधी को हिन्दू बनवाया है।* मोदी ने रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले के पुत्र से राममंदिर का चक्कर लगवाया है। अब मोदी के बाद वही आएगा जो मोदी से भी बड़ा मोदी हो।

*भारत बदल चुका प्रिये , अब तुम कम से कम अपना चश्मा तो बदल ही लो*

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18/06/2026

मानव इतिहास के 10 लाख सालों में एक ही समय पर इतना सारे महान वैज्ञानिक कैसे पैदा हो गए..न इससे पहले न इसके बाद कोई नया मौलिक सूत्र या नया नियम नहीं आया!!
--( ये सवाल बिलकुल बाजिब है । हमारे मनमें भी यह सवाल उठा था लेकिन आगेकी बात पढी तो किस्सा समज में आ गया ।)----
ऐसा लगता है जैसे उस समय ब्रिटिश, पड़ोसी व मित्र देशों में विज्ञान की लौटरी लग गई हो!! ये सवाल तो कोई हिन्दुस्तानी ही उठा सकता है... समझदार लोग अपने ऊपर गर्व करें ..बाकी पुरातन भारत का इतिहास पढ़े ...कुछ प्रारंभिक तथ्य प्रस्तुत है -
जिस समय न्यूटन के पूर्वज जंगली लोग थे, उस समय महर्षि भाष्कराचार्य ने पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पर एक पूरा ग्रन्थ रच डाला था किन्तु आज हमें सिखाया जाता है कि ब्रिटेन के उस वैज्ञानिक ने ये बनाया जरमनी के उस वैज्ञानिक ने वो बनाया ....
जबकि सच ये है कि भारत से चुरा कर ले जाए ग्रन्थ इन लोगो के हाथ लग गए थे ..और ये उन पर टूट पड़े थे ..हमारे विज्ञान में कोई पेटेंट कराने की जरूरत नहीं थी क्यूंकि तब ब्रहम्मांड के रहस्य हम ही जानते थे किन्तु चोर ने जब चोरी कर ली ...तो चोरी के माल को अपना बताने के लिए वो कागजी रजिस्ट्रेशन का सहारा लेने लगा ....
पिता भारत, मां भारती का कोमेन्ट
आप को अचरज हुआ लेकिन ये सच्चाई है । वो रेनेसां पिरियड था, युरोप में नव जागृति काल । प्रिन्टिंग टेक्नोलोजी और प्रिन्ट मिडिया आ जाने से सामान्य मानवी तक ज्ञान पहुंचने लगा । पढाई लिखाई पर ध्यान गया, बडे बडे पुस्तक छपने लगे, बडे बडे विचारक पैदा होने लगे, बुध्धिजीवियों के क्लब खूलने लगे । आज की तरह ऐसा नही होता था की मायकल दारू पी के दंगा करते थे । वो सब आपस में मिल के ज्ञान की, अपने नए विचार की, अपनी नयी खोज की बातें करते थे । नया ज्ञान था ना, तो उत्साह था । उस युग को ज्ञान का विस्फोट युग भी कहा जाता है । आज की दुनिया को जो भी अच्छा बूरा मिला उस समय का परिणाम है ।
भारत के विज्ञान के लिए इस तरह इतराना ठीक नही । उन लोगों के पूरखें भी सनातनी हिन्दु ही थे, हिन्दु ज्ञान उनकी लाइब्रेरी में पहले से ही मौजुद था, उन की युरोपिय भाषा में ही था सब । ग्रीस का हिन्दुत्व सायन्स पर ज्यादा भार देता था, भगवान कृष्ण का हिन्दुत्व था । द्वारिका डुबने से पहले भगवान के वारिस यादव सेना लेकर ग्रीस तक अश्वमेध का घोडा लेकर चले गए थे । भारत के धनपतियों ने इजराईल के धनपतियों की संगत में आकर सोने के सिक्कों के बल पर भारत के हिन्दुत्व को आसमान की सैर करने को भेज दिया, योग और जुठे चमत्कारों में डाल दिया । जब की जमीनी काम के लिए ग्रीस और युरोप के हिन्दुत्व को खतम करने के बाद धनपतियों के प्यादे इसाईयों ने हिन्दुओं का सायन्सवाला हिस्सा अपने पास रख लिया और बाकी बहुत सा ज्ञान एलेक्जांड्रिया लाईब्रेरी में था वो पूरी लायब्रेरी ही जला डाली ।
पता नही कब भारत के लोग आसमान से जमीन पर आएन्गे । अपना संभाल नही सके और दुसरे लोग करते हैं तो अपना होने का दावा ठोक देते हैं । वो भी सनातनी लोगों के वारिस है, धनपति राक्षसों ने उनकी आस्था बदल दी है और हिन्दुओं के दुश्मन बनाकर अपने पक्ष में कर लिए हैं ।
ये सत्य है उस नव जागृतिकाल में बडे बडे विज्ञानिक और विचारक पैदा हो गए थे लेकिन तुरंत ही धनपति राक्षस डर गए थे और हरकत में आ गए थे । अच्छे अच्छों को खरीद लिया और मिडिया को अपने कंट्रोल में कर लिया था । विज्ञानिकों को अपने नौकर बना कर अपने व्यापार हेतु खोजबीन करवाने लगे जो आज तक जारी है । बुध्धिजीवियों को खरीद कर हिन्दुत्व खतम करने के काम में लगा दिया ।
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दोनो की बात अपने अपने हिसाब से सही है । साला कुछ ही समय में इतने विज्ञानिक पैदा कैसे हो सकते थे !
महान विज्ञानिक निकोला टेस्ला प्रेरणा के लिए एक ग्रंथ हाथ में लेकर बैठा रहता था । वो कोइ इसाई का लिखा ग्रन्थ नही था, हिन्दु ग्रंथ था । हमारा हिन्दुत्व या उनका हिन्दुत्व कहने का कोइ मतलब नही है । हिन्दुत्व सनातन है और सर्वव्यापी था । आज उसका व्याप घटकर आधे भारत में भी नही रहा है ।
हिटलर का स्वस्तिक भी उसके पूरखों का था । उस के पूरखे इसाई बन गए थे वो उसका दुर्भाग्य था ।
हिन्दुस्थान वालों को समजना चाहिए कि चिजें भारत की ना कह कर हिन्दुत्व की है ऐसा मानना चाहिए । युरोप और मिडल इस्ट भी कभी हिन्दुओं का स्थान था । अगर आज भी नही संभले, जमीन पर नही आए तो ये व्यापारियों का दानव समाज हमारे बचे हुए हिन्दुंओं का स्थान भी छीन लेन्गे ।

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