08/07/2026
#भारतविमर्श
जरा सोचो .......
उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा,लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे
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अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर हो या नालन्दा विश्वविद्यालय को आग की भेट चढ़ाने वाले बख्तियार खिलजी दोनो ने प्राचीन ज्ञान को नष्ट करने का बर्बर कार्य किया परन्तु इतिहास में इसे छोटी घटना बना कर भुला दिया गया, क्यों ??
तैमूर, नादिर, गौरी, गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बर्बर हत्यारो को विजेता के रूप में हमे इतिहास की किताबो में परोसा गया , क्यो ?
अल-तकिय्या (धार्मिक झूठ ) में लिप्त अपने इन पैशाचिक गुणों के कारण इन्होंने अपने अंदर एक ऐसी कला विकसित की जिससे इन्होंने केवल समस्त जनसामान्य को ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिरो को भी अब तक भ्रमित करके रखा है। ये घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद ... स्वयं को जुल्म का शिकार (विक्टिम) प्रदर्शित करने में माहिर है।
इनकी यह कला है ...झूठा नैरेटिव गढ़ने की ..
इन्होंने अपनी इस कला से ... उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया ... वरन् उल्टे सभी धार्मिक जनों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया। उनकी यही कुटिलता के जाल में समस्त हिन्दूसमाज फंस कर रह गया है।
जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक ही खलीफाई सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों, या गंगा-जमुनी तहज़ीब ओढ़े .... मौन समर्थन करके ... ताकत पकड़ने तक के इन्तेज़ार में खड़े हुए है, उनसे बचाव कैसे ??
जरा देखिये और सोचिये ... अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं ... पर कभी भी .... इस्लाम को दुनिया में ज़लील करने वाले आतंकवाद के खिलाफ सरकार पर दबाव नहीं बनाते ... क्योंकि यही बर्बरता उनकी उनकी शिकारी-लुटेरी सभ्यता की आत्मा है, वजूद का अहम हिस्सा है ।
-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।
-उन्होंने 1946 में लगभग 100% पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद ... सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया ... कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया ... जबकि संविधान विभाजन (1947) के तीन वर्ष बाद 1950 में लागू हुआ था।
-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में ... खिलाफत आंदोलन में भाग लिया ... पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा कि भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।जबकि वे अंग्रेजों से सत्ता हथियाकर ... भारत में खलीफाई सल्तनत बनाने के लिए लड़े थे ।
-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक ... वे अंग्रेजों की गोदी में खेलते रहे ... लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक ... सावरकर के माथे पर लगा दी गयी ।
-संसार में नब्बे प्रतिशत आतंकवादी घटनाएं अंजाम देने व जिम्मेवारी लेने के बावजूद भी ... सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि ... आतंकवाद का कोई धर्म नहीं ... लेकिन कोर्ट में निर्दोष साबित हुए ... साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से ... *हिंदू आतंकवाद* का नैरेटिव गढ़ देते हैं।
-बछडाचोर अखलाक व एक चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन.. चंदन गुप्ता और निरीह ... भरत यादव , अंकित शर्मा जैसे अनेको की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।
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