19/09/2025
******* अल्मोड़ा मैग्नेसाइट लिमिटेड बंद, सैकड़ों परिवार संकट में
स्थानीय पलायन तेज, सरकार व प्रशासन मौन **********
*******बागेश्वर********
कभी पहाड़ की अर्थव्यवस्था और रोजगार की रीढ़ कही जाने वाली अल्मोड़ा मैग्नेसाइट लिमिटेड कंपनी पिछले एक साल से बंद पड़ी है। 1971 में स्थापित यह कंपनी बागेश्वर जिले में खनन और प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय लोगों को लगभग 450 प्रत्यक्ष रोजगार और करीब 2,500 परिवारों की आजीविका से जोड़ती थी। कंपनी के बंद होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ ठप हो चुकी हैं और स्थानीय लोगों का पलायन तेज़ी से बढ़ रहा है।
******वेतन से वंचित कर्मचारी, टूटी उम्मीदें*******
कंपनी के कर्मचारी बीते एक वर्ष से बिना वेतन के गुज़ारा कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस संकट में उनकी कोई गलती नहीं है, लेकिन उन्हें और उनके परिवारों को इसकी सज़ा भुगतनी पड़ रही है।
एक कर्मचारी ने कहा – “हमने ईमानदारी से सालों तक काम किया, मगर अब अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। सरकार हमें बेसहारा छोड़ चुकी है।”
******खनन माफिया बनाम गरीब कर्मचारी********
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खड़िया खनन माफिया पैसे और साख के दम पर हर तरह की क्लियरेंस हफ्तों में हासिल कर लेते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर इस कंपनी को NGT से क्लियरेंस पाने में महीनो लग जाते हैं।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि – “क्या कानून और व्यवस्था सिर्फ़ पैसों वालों के लिए ही है।
कंपनी की बंद होने से पिछले एक साल में ही करीब 150 स्थानीय युवा रोज़गार की तलाश में पलायन कर चुके हैं।
स्थानीय लोग कवि गिरदा की पंक्तियाँ याद कर रहे हैं –
“जैं छोड़ द्यौं खेत बारी, तैं कसि बाचौं पहाड़…”
स्थानीय लोग राज्य सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बाहर से आने वाली बड़ी कंपनियों को सब्सिडी और प्रोत्साहन पैकेज देती है, लेकिन दशकों से रोजगार दे रही इस कंपनी को कोई सहारा नहीं दिया गया।
जिला प्रशासन और राज्य सरकार की उपेक्षा से लोगों में गहरी नाराज़गी है।
अल्मोड़ा मैग्नेसाइट लिमिटेड की बंदी अब केवल औद्योगिक संकट नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक त्रासदी बन चुकी है। गांव उजड़ रहे हैं, पलायन तेज हो रहा है और गरीब कर्मचारी बिना वेतन के भुखमरी की कगार पर हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो वे जन आंदोलन को मजबूर होंगे।
********न्यायिक आदेश और उम्मीदें********
हाईकोर्ट और NGT के आदेशों के कारण खनन कार्य पर रोक लगी है, मगर स्थानीय लोग चाहते हैं कि फैसले पहाड़ की कठिन भौगोलिक स्थिति और आम जनता की आजीविका को ध्यान में रखकर लिए जाएं।
लोगों ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, NGT सभी से ठोस पहल की उम्मीद जताई है।
अब सवाल यह है कि—
*******क्या सरकार और प्रशासन इस कंपनी को पुनर्जीवित कर पहाड़ को #पलायन और #बेरोजगारी से बचाएंगे, या यह उद्योग हमेशा के लिए इतिहास बन जाएगा?******* By CCN News