18/12/2023
सुबह सुबह एक व्यक्ती ने गौतम बुद्ध से प्रश्न पूछा..?
हे तथागत मै मानता हू की ईश्वर नही हैं,
इसपर आपका क्या कहना हैं..
बुद्ध ने कहा ईश्वर होते हैं जाओ और जाकर खोज करो..?
फिर दोपहर मे
एक व्यक्ती ने प्रश्न किया
हे तथागत ईश्वर होते हैं
आपका क्या मनना हैं.!
बुद्ध ने का -ईश्वर नही होते! जाकर ठीक से ध्यान करो और पता लगाव..
फिर शाम के समय एक व्यक्ती आया और बुद्ध से बोला, हे तथागत क्या आप मुझे बता सकते हो की ईश्वर होते हैं या नही.?
इसके जवाब मे बुद्ध कुछ नही बोलें.!
फिर बुद्ध के शिष्य आनंद ने ये तीनो जवाब सुन लिये और रात सोते समय बुद्ध से बोलें - आज मै सो नही पाऊंगा
आप ने ऊन तीनो लोगो को तीन अलग अलग जवाब क्यु दिए.?
फिर बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद से कहा - ये तीनो जवाब मैने तुम्हे नही दिए आनंद, ऊन लोगो को दिए! फिर तुम क्यु परेशान हो आनंद..!
फिर आनंद ने कहा - फिर मै भी जानना चाहता हू आपने ये तीनो जवाब ऐसे क्यु दिए.?
फिर बुद्ध ने हसकर आनंद से कहा - सुबह जो व्यक्ती आया था उसने बिना खोजे ही मान लिया था की ईश्वर नही होते.!
इसलिये मैने उसके विश्वास के विरुद्ध बात कही.!
फिर जो दोपहर मे आया था
उसने बिना खोजे और बिना देखे ही ईश्वर को मान लिया था की ईश्वर हैं
इसलिये मैने उसके साथ भी विश्वास के विरुद्ध बात कही.!
और जो शाम के वक्त व्यक्ती आया था वो खुद, मेहनत नही करणा चाहता था बल्की उसे सुने सुनाये उत्तर चाहिए थे.!
इसलिये मै मौन हो गया ताकी वह किसी नतीजे पर ना पहुचे और अपनी खोज शुरु करे.!
बुद्ध ने आनंद से कहा -
इस से सीख यही हैं की
लोग बिना खोज, बिना मेहनत कीये ही सुनी सुनाई बातो पर एकीनं करते हैं.!
आप जिंदगी मे भी इसी वजह से दुःखी हो
क्यु की अनुभवआपको किसी चीज का नही हुवा हैं लेकिन सुनी सुनाई बातो को मानकर ये सोचते हैं की मुझे अनुभव हैं..!
बुद्ध कहते हैं
जब तक खुद को अनुभव ना हो किसी की भी बात को मत मानो!
मानो मत, खुद जानो..!!
नमोबुध्दाय 🙏🏻🌹🙏🏻