05/08/2026
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एक बार फिर एंटीलिया विस्फोटक बरामदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को एंटीलिया विस्फोटक बरामदगी मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
जबकि महाराष्ट्र एटीएस और एनआईए की जांच के आधार पर उन्हें 'मुख्य साजिशकर्ता' बताया गया था। अनिल देशमुख ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में सवाल किया कि इस मामले की जांच करने वाले राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने परमबीर सिंह को आरोपी क्यों नहीं बनाया।
अनिल देशमुख ने दावा किया कि महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की जांच में इस मामले में परमबीर सिंह की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्होंने उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया था। यह मामला 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास एक वाहन में विस्फोटक बरामद होने से संबंधित है।
परमबीर सिंह पर लगाया झूठ बोलने का आरोप
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री देशमुख ने आरोप लगाया कि इसके बाद परमबीर सिंह ने ये झूठे आरोप लगाकर बदला लिया कि उन्होंने (देशमुख ने) पुलिस अधिकारियों के माध्यम से बार और रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रुपये मांगने को कहा था। देशमुख ने दावा किया कि एंटीलिया मामले की जांच का जिम्मा एटीएस से लेकर एनआईए को दिया गया और एनआईए जांच में भी परमबीर सिंह को साजिश का मुख्य साजिशकर्ता पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह साजिश तत्कालीन पुलिस आयुक्त के कार्यालय में रची गई थी।
'बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी NIA से पूछा था सवाल'
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय के कई अधिकारियों के बयानों से भी ये बातें सामने आई हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट की कार्यवाही का जिक्र करते हुए अनिल देशमुख ने दावा किया कि मामले के एक आरोपी को जमानत देते समय न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे ने एनआईए से पूछा था कि परमबीर सिंह को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने पूछा कि इन सबके बावजूद एनआईए ने परमबीर सिंह को आरोपी क्यों नहीं बनाया?
मनसुख हिरन हत्या केस में आरोप तय
मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार को एंटीलिया मामले और इससे जुड़े कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या के मामले में 10 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए, जिनमें पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाजे और प्रदीप शर्मा भी शामिल हैं। वाजे और शर्मा के अलावा इस मामले के अन्य आरोपी रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने, विनायक शिंदे, आनंद जाधव, सतीश तिरुपति मोथकुरी, मनीष वसंतभाई सोनी, नरेश गौड़ और संतोष शेलार हैं। काजी, माने और शिंदे भी पूर्व पुलिसकर्मी हैं।