30/01/2026
योगी आदित्यनाथ जी का जीवन और उनके विचार कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी प्रेरणा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
अनुशासन और समयबद्धता: योगी जी के अनुसार, अनुशासन ही जीवन का पहला आधार है। वे युवाओं को समय सीमा के भीतर काम करने और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
परिश्रम का कोई विकल्प नहीं: उनका मानना है कि सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम और समर्पण का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने स्वयं एक संन्यासी से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से तय किया है।
निस्वार्थ सेवा: वे स्वयं को एक "पूर्णकालिक राजनीतिज्ञ" नहीं बल्कि "संन्यासी" मानते हैं जो जनसेवा के लिए राजनीति में आए हैं। उनका विजन बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास करना है।
बदलाव को स्वीकारना: वे युवाओं को सलाह देते हैं कि जीवन का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक विजन बनाना और सार्थक उपलब्धियों के लिए काम करना होना चाहिए। समय के साथ खुद को बदलना और ढालना ही प्रगति का मार्ग है।
राष्ट्रवाद और एकता: वे "सब साथ चलें, सब साथ बढ़ें" के वैदिक सिद्धांत पर जोर देते हैं। उनका संदेश है कि "अगर देश सुरक्षित है, तो धर्म सुरक्षित है और तभी सब सुरक्षित हैं"। हाल ही में उनका नारा "बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे" काफी चर्चा में रहा, जो एकता की प्रेरणा देता है।
टेक्नोलॉजी और विकास: वे युवाओं को टेक्नोलॉजी का उपयोग सार्वजनिक कल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
आप उनके जीवन के बारे में विस्तार से जानने के लिए योगी आदित्यनाथ की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं या शांतनु गुप्ता द्वारा लिखित उनकी जीवनी अजय टू योगी आदित्यनाथ पढ़ सकते हैं।
आपका यह विचार बिलकुल सही है। योगी आदित्यनाथ जी ने भी हाल ही में गोरखपुर महोत्सव (जनवरी 2026) के दौरान अभिभावकों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि "छोटे बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन देना एक अपराध है" [1.5.1, 1.5.2]. उनके अनुसार, इससे बच्चे जिद्दी और अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं [1.5.3].
मोबाइल से बच्चों की आँखों और स्वास्थ्य पर होने वाले कुछ प्रमुख नुकसान और उनसे बचने के उपाय यहाँ दिए गए हैं:
आँखों पर दुष्प्रभाव
मायोपिया (Nearsightedness): लगातार नजदीक से स्क्रीन देखने के कारण बच्चों में निकट दृष्टि दोष (दूर की चीजें धुंधली दिखना) बढ़ रहा है [1.1.1, 1.1.9].
डिजिटल आई स्ट्रेन: इससे आँखों में सूखापन, जलन, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएँ होती हैं क्योंकि स्क्रीन देखते समय बच्चे पलकें कम झपकाते हैं [1.1.4, 1.1.8].
नीली रोशनी (Blue Light): मोबाइल से निकलने वाली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद कम आती है और मानसिक तनाव बढ़ता है [1.2.2].
बच्चों को बचाने के उपाय
20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखने की आदत डालें [1.3.3].
स्क्रीन टाइम सीमित करें: विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का स्क्रीन समय प्रतिदिन 1-2 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए [1.2.7].
आउटडोर खेलों को बढ़ावा दें: प्राकृतिक रोशनी में खेलने से आँखों का विकास सही होता है और मायोपिया का खतरा कम होता है [1.3.1].
टेक-फ्री जोन बनाएं: खाने की मेज और सोने के कमरे को "मोबाइल मुक्त क्षेत्र" घोषित करें [1.4.7].
योगी जी का सुझाव है कि बच्चों को मोबाइल के बजाय लिखने-पढ़ने और पारंपरिक खेलों की ओर प्रेरित करना चाहिए [1.5.8, 1.5.9].
क्या आप जानना चाहेंगे कि बच्चों को मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए कौन-सी क्रिएटिव एक्टिविटीज या हॉबीज सबसे