24/08/2026
आउल जी ने अभी अभी नया नया कुछ ह** है l गलत इंटरप्रेटेशन में माहिर हो चुके हैं l
वैसे शायद वो ये भी नहीं जानते हैं कि देश मनुस्मृति से नहीं संविधान से चल रहा है.. फिर भी उनको खाज हुई और कर दिया *** l
और रही मनुस्मृति कि बात जो कि उन्होने जिज्ञासा वश पढ़ ही लिया हो तो उसमे तो लिखा है...
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।
मनुस्मृति ३/५६ ।।
जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही होती है, उनका सम्मान नही होता है वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।
शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा।।
मनुस्मृति ३/५७ ।।
जिस कुल में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं ,वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती है वह कुल सदैव फलता फूलता और समृद्ध रहता है । (परिवार की पुत्रियों, बधुओं, नवविवाहिताओं आदि जैसे निकट संबंधिनियों को ‘जामि’ कहा गया है ।
सबका अपना अपना स्वभाव और चरित्र होता है…
जिसको जो चाहिए होता है मिल ही जाता है l